Wednesday, February 11, 2026
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कारागार विभाग के बकाया बजट में होगी बंदरबांट!

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कारागार विभाग के बकाया बजट में होगी बंदरबांट!
विभागीय जेल परिक्षेत्रों पर आईपीएस डीआईजी का कब्जा!
राकेश यादव
 राकेश यादव

कारागार विभाग के बकाया बजट में होगी बंदरबांट! कारागार विभाग के बकाया बजट को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को मिले 2700 करोड़ रुपये में से अब तक सिर्फ 900 करोड़ ही खर्च हो पाए हैं। ऐसे में बचे हुए 1800 करोड़ रुपये को महज़ 40 दिनों में खर्च करने की तैयारी है। सवाल यह है कि क्या इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी रकम का उपयोग संभव है, या फिर एक बार फिर बंदरबांट और जल्दबाज़ी में भुगतान की पटकथा लिखी जा रही है? नियमों, प्रक्रियाओं और पारदर्शिता को ताक पर रखकर कहीं सरकारी खजाने को ठिकाने लगाने की कोशिश तो नहीं हो रही—यही सबसे बड़ा सवाल है।

लखनऊ। प्रदेश सरकार का इन दिनों बजट सत्र चल है। विधान भवन में चल रहे इस बजट सत्र के दौरान प्रदेश के विकास के तैयार की गई योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए विभागों को बजट का आवंटन किया जाएगा। कई विभाग बीते वित्तीय वर्ष में आवंटित हुए बजट को अभी तक खर्च नहीं कर पाएं है। इनमें कारागार विभाग भी एक है। इस विभाग को वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 2700 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया। विभाग वित्तीय वर्ष खत्म होने से दो माह पूर्व तक सिर्फ 900 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया है। विभाग को बचे हुए 40 दिनों में 1800 करोड़ रुपए खर्च करना है। 10 माह में सिर्फ 900 करोड़ खर्च करने वाले विभाग के लिए 40 दिनों में 1800 करोड़ रुपए खर्च करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इस धनराशि की खपत में जमकर बंदरबांट और लूट होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के कारागार विभाग को जेलों के संचालन, बंदियों के भोजन, सुरक्षा उपकरणों समेत अन्य मद के लिए वित्तीय वर्ष 2025- 26 के लिए करीब 2700 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई थी। इसमें जेलों में अत्याधुनिक उपकरण लगाने और उनके मेंटिनेंस के लिए 65 करोड़ रुपए, प्रदेश की जेलों में चल रहे उद्योगों में उत्पादन का रॉ मैटेरियल और मसालों की खरीद के लिए करीब 15 करोड़ रुपए, जेलों के निर्माण और मेंटिनेंस के लिए करीब 1300 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई।

सूत्रों का कहना है वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 10 माह 13 दिन आवंटित करीब 2700 करोड़ की धनराशि में विभाग सिर्फ 900 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया है। शेष बचे करीब 40 दिनों में विभाग को 1800 करोड़ रुपए की मोटी धनराशि को खर्च करना शेष बचा है। सूत्रों की माने तो जेल अधिकारी मेंटिनेंस और आधुनिकीकरण के लिए पांच प्रतिशत देकर बजट आवंटित कराते है। इसके साथ ही बकाया धनराशि से होने वाली खरीद फरोख्त, निर्माण कार्य, मेंटिनेंस और अन्य मद में होने वाले खर्चों में जमकर बंदरबांट किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही कि इतना मोटा बकाया बजट की धनराशि को बंदरबांट और कमीशनखोरी के लिए ही खर्च नहीं किया गया। पूर्व में बुलंदशहर, केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ आदि जेलों में बिना कोई कार्य कराए ही पूरा भुगतान कर बजट खपत कर देने की शिकायत भी कारागार मुख्यालय को प्राप्त हुई थी, परंतु कारागार मुख्यालय द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। बल्कि उन जेलों को और अतिरिक्त बजट पुनः दे दिया गया। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

        करोड़ों खर्च के बाद भी फरारी रोक नहीं पा रहे अधिकारी

प्रदेश के जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष विभाग को करोड़ों रुपए की धनराशि आवंटित करती है। घटना के समय करोड़ों की लागत से लगाए गए अत्याधुनिक उपकरण खराब मिलते है। कन्नौज और अयोध्या जेल से चार बंदियों की फरारी इस सच की पुष्टि करती नज़र आ रही है। प्रदेश की जेलों पर निगरानी रखने के लिए कारागार मुख्यालय में करोड़ों की लागत से वीडियो वॉल का निर्माण कराया गया है। यह उपकरण विभाग के लिए सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। विभाग के उच्चाधिकारी इस गंभीर मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।