यूपी में SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी, लाखों नामों पर उठे सवाल

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यूपी में SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी, लाखों नामों पर उठे सवाल
यूपी में SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी, लाखों नामों पर उठे सवाल

यूपी में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक मचा हड़कंप! लाखों नामों पर सवाल, हज़ारों लोग परेशान, और सियासत में भूचाल! किसका नाम शामिल, किसका नाम बाहर? कहीं आपका नाम भी तो नहीं कटा? क्यों इस लिस्ट को लेकर विपक्ष हमलावर और सरकार बेफ़िक्र? आज की इस बड़ी खबर में जानिए— SIR ड्राफ्ट लिस्ट से जुड़ी पूरी सच्चाई, क्या है प्रक्रिया, और आगे क्या पड़ सकता है इसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर। क्या आम जनता के साथ हो रहा है अन्याय? क्या ये सिर्फ़ प्रक्रिया है या किसी बड़ी साज़िश की तैयारी? यूपी में SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी, लाखों नामों पर उठे सवाल

यूपी में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो गई है। इसमें 2.89 करोड़ यानि 18 फीसदी नाम कट गए हैं। सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ के वोटरों के नाम कटे हैं। यहां 30.05 फीसदी तक वोट कट गए। पहले यहां 39.94 लाख वोटर थे, अब 27.94 लाख ही बचे हैं। यानी करीब 12 लाख वोटरों के नाम कटे. गाजियाबाद दूसरे नंबर पर है,जहां 28.83 फीसदी वोट कटे। पहले 28 लाख वोटर थे, जो अब 20 लाख बचे हैं। 25.98 फीसदी के साथ बलरामपुर तीसरे नंबर पर है। यहां 4 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम कटे। एक्सपर्ट का कहना है कि SIR की ड्राफ्ट सूची यूपी की सियासत को बदलने का संकेत दे रही।


SIR ड्राफ्ट जारी होने के बाद यूपी के 5 धार्मिक जिलों- अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज और गोरखपुर पर सबसे ज्यादा नजर रही। सबसे ज्यादा 24.64% वोट प्रयागराज में कटे। वहीं, दूसरे नंबर पर मथुरा रहा, जहां 19.20% वोट कटे। गोरखपुर में 36,66,533 वोटर थे। अब 30,20,908 वोटर बचे हैं। मतलब करीब 17.61% वोट कम हुए हैं। 2022 के चुनाव में भाजपा ने यहां क्लीन स्वीप किया था। गोरखपुर शहर सीट से सीएम योगी विधायक हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में हार के चलते अयोध्या सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही थी। यहां 19,07,800 वोटर थे। अब यहां 15,70,258 वोटर बचे हैं। यहां करीब 17.69% वोटर कम हो गए। विधानसभा चुनाव- 2022 में यहां तीन सीटों पर कमल खिला था,जबकि दो सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। हालांकि उपचुनाव में सपा एक सीट हार चुकी है। वहीं,उसके दूसरे विधायक बागी होकर भाजपा का दामन थाम चुके हैं।


प्रयागराज में 46,92,860 वोटर थे, जो अब 35,36,554 वोटर बचे हैं। मतलब करीब 24.64% वोटर घटे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां की 12 सीटों में से एनडीए ने 8 पर जीत दर्ज की थी। 4 सीटें सपा के खाते में गई थीं। हालांकि 2 साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों यह सीट भाजपा को गंवानी पड़ी थी. वाराणसी में 31,53,705 वोटर थे। अब यहां 25,80,500 वोटर बचे हैं. मतलब करीब 18.18% वोट कटे हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सभी 8 सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी। मथुरा में 19,47,368 वोटर थे. यहां 15,73,574 वोटर बचे हैं। यहां 19.20% वोट कटे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां सभी 5 सीटों पर कमल खिला था। प्रदेश के इन 10 जिलों में कुल 74 सीटें थीं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 58 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। सपा के हाथ सिर्फ 16 सीटें आई थीं। भाजपा ने आगरा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, शाहजहांपुर जिले की सभी सीटों पर क्लीन स्वीप किया था. अब इन जिलों में बड़ी संख्या में वोटर कम हुए हैं. SIR के चलते पहली बार लोगों ने शहर की बजाय अपने पैतृक निवास स्थान को तरजीह दी। SIR में भी इसका असर दिख रहा है।


लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, नोएडा, कानपुर बरेली, गाजियाबाद जैसे जिलों में, जहां शहरी आबादी सबसे अधिक है, वहां वोटर कम हुए हैं। इन शहरों में अभी तक भाजपा का मजबूत आधार था। अब इन कम वोटरों की वजह से निश्चित तौर पर असर पर भी सबसे अधिक भाजपा पर ही पड़ेगा। चुनाव में ये कितना निर्णायक होगा, ये देखने वाली बात होगी। यूपी के 5 मुस्लिम बहुल जिले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल में मुस्लिम मतदाता 40 से 50% तक हैं। इन जिलों में 20% तक वोटर कम हुए हैं। इन जिलों में विधानसभा की 28 सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में इसमें 11 सीटों पर एनडीए जीता था। बाकी 17 सीटों पर सपा गठबंधन को बढ़त मिली थी। हालांकि चुनाव बाद रालोद भाजपा के साथ आ चुका है।


प्रदेश में 46 लाख से ज्यादा मृतकों के नाम हटाए गए हैं। इनमें भी 11 जिलों में एक लाख से अधिक ऐसे वोटर थे, जिनकी मौत हो चुकी है। प्रयागराज में 1,73,812, सीतापुर में 1,29,101, लखनऊ में 1,28,242, बरेली 1,15,270, आगरा 1,06,358, गोंडा 1,05,356, कानपुर नगर 1,04,046, जौनपुर 1,03,125, आजमगढ़ 1,02,383 व हरदोई 1,02,212 ऐसे वोटर थे, जिनकी मौत हो चुकी थी।प्रदेश के 8 जिलों में सबसे अधिक ऐसे मतदाता मिले, जो परमानेंट दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो चुके हैं। इनमें लखनऊ में 5,35,855 (13.41%), गाजियाबाद में 3,59,937(12.68%), गौतमबुद्धनगर में 2,20,161 (11.80%), मेरठ में 3,13,022, (11.59%), कानपुर नगर में 3,91,627 (11.07%), हापुड़ में 1,21,483 (10.50%), प्रयागराज में 4,88,959 (10.42%) और बागपत में 1,00,719 (10.31%) वोटर स्थायी रूप से दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो चुके हैं।


लखनऊ शहर की 5 सीटों में से भाजपा 3 और सपा 2 सीटों पर काबिज है। ग्रामीण की चारों सीटें भाजपा के पास हैं। सबसे ज्यादा कैंट विधानसभा क्षेत्र से (39.11 फीसदी) मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी यहां 53 फीसदी ही वोटिंग हुई थी। दूसरे नंबर पर उत्तर विधानसभा है, यहां 38.40 फीसदी वोटर बाहर हुए हैं। इस विधानसभा की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि यहां ज्यादातर वोटर गैर जिलों के हैं। लखनऊ पूर्वी में 36.61%, सरोजनीनगर में 31.42%, लखनऊ मध्य में 34.61% वोटर कम हुए हैं। ये विधानसभा खांटी लखनऊ कहलाता है,यहां वोटर कम हुए हैं। लखनऊ पश्चिम में 30% वोटर घटे हैं। यहां सबसे अधिक 6 लाख वोटर थे, अब 4.20 लाख ही रह गए.फिलहाल SIR ड्राफ्ट लिस्ट के आकड़ों ने सभी सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है… यूपी में SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी, लाखों नामों पर उठे सवाल