
मुख्यमंत्री ने जनपद सिद्धार्थनगर में 1052 करोड़ रु0 की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास तथा ‘सिद्धार्थनगर महोत्सव’ का शुभारम्भ किया। उ0प्र0 उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बन चुका, विकास की इस यात्रा में निरन्तरता बनाये रखने के लिए प्रदेश सरकार दृढ़संकल्पित। भगवान बुद्ध की पावन धरा पर आयोजित ‘सिद्धार्थनगर महोत्सव’ यहां के कलाकारों, किसानों, युवाओं तथा संस्थाओं सहित प्रत्येक वर्ग के उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। लगभग 125 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध के अवशेष पिपरहवा से इंग्लैण्ड पहुंचा दिये गये, प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार के प्रयासों से भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष भारत लौटे। राज्य सरकार प्रदेश की 25 करोड़ आबादी को अपना परिवार मानकर जनकल्याणकारी परियोजनाओं के लिए बिना भेदभाव के धनराशि उपलब्ध करा रही। गांव, गरीब, किसान, युवा, महिलाएं तथा समाज का प्रत्येक तबका विकास का आधार होना चाहिए, इसी भाव के साथ डबल इंजन सरकार कार्य कर रही। डबल इंजन सरकार द्वारा प्राण-पण से कार्य करने के परिणामस्वरूप पूर्वी उ0प्र0 से इन्सेफेलाइटिस बीमारी कुछ ही वर्षों में समाप्त हुई। विकसित भारत जी-राम-जी योजना के अन्तर्गत 125 दिन के रोजगार की गारण्टी सुनिश्चित की जा रही। मुख्यमंत्री ने प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार सहित अन्य लोगों के दुःखद निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। सिद्धार्थनगर:उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बना उत्तर प्रदेश-मुख्यमंत्री
सिद्धार्थनगर/लखनऊ। विश्व को मानवता, करुणा और मैत्री का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध की पावन धरा पर सिद्धार्थनगर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव शब्द स्वयं में एक विराट अवधारणा को समाहित किये हुये है। सिद्धार्थनगर महोत्सव यहां के कलाकारों, किसानों, युवाओं तथा संस्थाओं सहित प्रत्येक वर्ग के उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बन चुका है। विकास की इस यात्रा में निरन्तरता बनाये रखने के लिए प्रदेश सरकार दृढ़संकल्पित है। आज जनपद सिद्धार्थनगर में ‘सिद्धार्थनगर महोत्सव’ का शुभारम्भ तथा 1052 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने प्लेन क्रैश की दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार सहित अन्य लोगों के दुःखद निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बड़े महोत्सव के आयोजन से पूर्व स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिए। गायन-वादन के साथ-साथ विविध कलाओं से सम्बन्धित प्रतिस्पर्धा ग्राम पंचायत, वार्ड, नगर पंचायत, नगर पालिका, क्षेत्र पंचायत, तहसील तथा विधानसभा स्तर पर की जानी चाहिए। इस प्रतिस्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को मुख्य महोत्सव में सम्मानित करने के साथ उनके परफार्मेन्स को जनता-जनार्दन के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह कलाकार प्रगतिशील किसान, श्रमिक, खिलाड़ी, उद्यमी सहित जीवन के किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति हो सकते हैं।
सिद्धार्थनगर जनपद राजकुमार सिद्धार्थ के नाम पर बना है। आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व यहाँ उन्हीं का राज था। कपिलवस्तु उनकी राजधानी थी। वह सब कुछ त्याग कर ज्ञान की खोज तथा जीवन की सच्चाई जानने के लिये निकले। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ गया में जाकर लम्बी साधना की। ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात उन्होंने पहला उपदेश सारनाथ में दिया। उन्होंने अपने जीवन के सर्वाधिक चतुर्मास श्रावस्ती जनपद में व्यतीत किये।
ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति होने के कारण मनुष्य के मन में मानवीय गरिमा, उसकी सुरक्षा और सम्प्रभुता का भाव सदैव बना रहता है। सर्वश्रेष्ठ कृति होने के नाते मनुष्य द्वारा अच्छा सोचने, बोलने तथा सकारात्मक दिशा में पहल करने के अच्छे परिणाम प्राप्त हांगे। ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’, ‘धम्मम् शरणम् गच्छामि’ तथा ‘संघम् शरणम् गच्छामि‘। धर्म की शरण में जाने के लिये बुद्धि और विवेक की आवश्यकता होती है। यदि बुद्धि व विवेक के साथ-साथ संगठन होगा, तो सकारात्मक ऊर्जा लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन का कारण बनेगी। यही कार्य डबल इंजन सरकार कर रही है।

हमारा दायित्व है कि जनता-जनार्दन द्वारा दी गयी शक्ति का उपयोग जनता-जनार्दन के हित में बिना भेदभाव करके दिखाएं। आज सिद्धार्थनगर महोत्सव के शुभारम्भ पर 1052 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात इस जनपद को प्रदान की जा रही है। यह परियोजनाएं यहां के जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गये प्रस्तावों एवं प्रयासों से जनपद में लागू हो रही हैं। राज्य सरकार प्रदेश की 25 करोड़ आबादी को अपना परिवार मानकर जनकल्याणकारी परियोजनाओं के लिए बिना भेदभाव के धनराशि उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष मई महीने में मध्य उत्तर प्रदेश के भ्रमण के दौरान पाया कि वहां के किसान दो फसल के बाद तीसरी मक्का की फसल उपजा रहे थे। एटा, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, हरदोई आदि जनपदों के अन्नदाता किसानों ने अवगत कराया कि उन्हें तीसरी फसल से 01 लाख रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। यहां के किसानों को भी इस दिशा में प्रयास करना होगा। फूड प्रोसेसिंग के प्रस्ताव लाएं, प्रदेश सरकार धनराशि तथा सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। अच्छी नीयत होने पर नियन्ता भी सहयोग करता है। यहां का अन्नदाता किसान जैसी बरसात चाहता था, रात्रि से वैसी बरसात इन्द्रदेव द्वारा की जा रही है। यह एक प्रकार से धरती माता से सोना उगाने के लिए अन्नदाता किसान के लिए व्यवस्थित ईश्वरीय कृपा है।
सिद्धार्थनगर महोत्सव में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय को सम्मिलित होने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह जीवन हताशा व निराशा के लिए नहीं है। मनुष्य का जीवन उत्साह और उमंग के लिए प्राप्त हुआ है। एक-दूसरे के साथ मिलकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ विकास के अभियान को आगे बढ़ाना आवश्यक है। प्रत्येक जगह काट-छांट नहीं होनी चाहिए। अच्छी सोच के साथ किये गये प्रयासों का परिणाम है कि सिद्धार्थनगर में श्री माधव बाबू के नाम पर श्री माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज का निर्माण हुआ है। यह मेडिकल कॉलेज शानदार तरीके चल रहा है। यहां नर्सिंग कॉलेज भी प्रारम्भ हो चुका है। आज महिला छात्रावास का शिलान्यास तथा 1,000 सीट की क्षमता के ऑडिटोरियम को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सिद्धार्थनगर जनपद आकांक्षी जनपद इसलिए था, क्योंकि यहां विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव था। लोग पलायन के लिए मजबूर थे। बीमार मानसिकता के लोगों ने जनपद सिद्धार्थनगर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश को बीमार बना दिया था। मच्छर और माफियाओं के आगोश में ला दिया था। परिणामस्वरूप, इन्सेफेलाइटिस से कमजोर वर्ग के हजारों बच्चों की मौत होती थी। हमारे लिए वह दलित, अति पिछड़ा, अल्पसंख्यक तथा वोट बैंक नहीं थे, बल्कि वह बच्चे उत्तर प्रदेश की अमानत व हमारे परिवार का हिस्सा थे। डबल इंजन सरकार ने प्राण-पण से काम किया और दशकों की बीमारी कुछ ही वर्षों में समाप्त कर दी गयी। अब सिद्धार्थनगर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश का कोई भी बच्चा इस बीमारी से दम नहीं तोड़ता है।
लगभग 125 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध के अवशेष पिपरहवा से इंग्लैण्ड पहुंचा दिये गये थे। इन अवशेषों की वहां तथा ताइवान में नीलामी हो रही थी। यहां के सांसद ने प्रयास किया तथा हमने एक पत्र लिखा। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा किये गये प्रयासों से भगवान बुद्ध से जुड़े यह पवित्र अवशेष भारत लौट आए हैं। अब कपिलवस्तु में विपश्यना केन्द्र बनाया जा रहा है। वहां विकास के कार्य आगे बढ़ाये जा रहे हैं। पहले मित्र राष्ट्र नेपाल से कनेक्टिविटी अच्छी नहीं थी। प्रदेश सरकार ने फोर-लेन की बेहतर इण्टर स्टेट तथा इण्टरनेशनल कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रयास किया है। आज सिद्धार्थनगर को फोर-लेन की कनेक्टिविटी से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। खलीलाबाद से बहराइच होकर जाने वाली रेलवे लाईन 80 किलोमीटर सिद्धार्थनगर जनपद से गुजरती है। यह कार्य निवेश को आकर्षित करेगा। गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरीडोर सिद्धार्थनगर जनपद के बांसी, डुमरियागंज तथा इटवा विधानसभा क्षेत्रों को टच करते हुए विकास का नया कॉरीडोर बनने जा रहा है। यह चीजें दिखाती हैं कि सरकार बांटकर विकास नहीं कर सकती, बल्कि समग्रता के भाव से देखती है।
भेदभाव मुक्त तथा सतत विकास की दृष्टि से किये जाने वाले प्रयास ही रामराज्य की अवधारणा के साकार रूप हैं। राशन, आवास, आयुष्मान भारत सहित समस्त सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों, महिलाओं तथा युवाओं आदि को बिना भेदभाव प्राप्त होना आवश्यक है। प्रधानमंत्री जी ने इसी अवधारणा पर फोकस कर योजनाओं का निर्माण किया है। डबल इंजन सरकार सबका साथ-सबका विकास के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। गरीब कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मनरेगा में पहले कच्चा काम ही किया जा सकता था। पक्के काम की गुंजाइश नहीं थी। केवल 100 दिन के रोजगार की गारण्टी थी। अब विकसित भारत जी-राम-जी की नयी योजना के अन्तर्गत 125 दिन के रोजगार की गारण्टी सुनिश्चित करायी जा रही है। यदि मांगने पर ग्राम पंचायत रोजगार नहीं देगी, तो उसे मुआवजा देना होगा। अब पक्का कार्य भी किया जा सकता है। गांव, गरीब, किसान, युवा, महिलाएं तथा समाज का प्रत्येक तबका विकास का आधार होना चाहिए। इसी भाव के साथ डबल इंजन सरकार ने इस कार्य को आगे बढ़ाया।
सिद्धार्थनगर की एक महिला उद्यमी ने भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में काला नमक चावल की ब्राण्डिंग व उसके एक्सपोर्ट के माध्यम से आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां की एक महिला स्वयंसेवी संस्था ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ तथा ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ का लाभ लेकर 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी प्राप्त कर रही है। ‘एक जनपद एक उत्पाद योजना’ तथा ‘मत्स्य सम्पदा योजना’ के माध्यम से सिद्धार्थनगर ने महिला उद्यमिता के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है। पिछली बार ‘एक जनपद एक उत्पाद योजना’ के लिए कॉमन सर्विस सेण्टर दिया गया था। जहां काला नमक चावल का उत्पादन होता है तथा जहां से इसे निर्यात किया जा सकता है, वहां जगह चिन्हित कर कॉमन सर्विस सेण्टर की सुविधा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। सिद्धार्थनगर:उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बना उत्तर प्रदेश-मुख्यमंत्री























