कारागार “अन्ना” ने खत्म किया सहारनपुर का मोह…!

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जेल मुख्यालय के लिए मुख्य सचिव के आदेश का कोई मायने नहीं
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राकेश यादव

कारागार विभाग के “अन्ना” ने खत्म किया सहारनपुर का मोह…! जहां जाने की होड़ लगती थी अब वहां जाने को कोई तैयार नहीं। वरिष्ठ अधीक्षक की जेल पर अधीक्षक तैनात कर हुई खानापूर्ति।

लखनऊ। पश्चिम की सहारनपुर जेल पर तैनाती के लिए एक समय अधिकारियों में होड़ मची रहती थी। इस जेल पर आज कोई वरिष्ठ अधिकारी जाने को तैयार नहीं है। इसकी मुख्य वजह जेल विभाग के ‘अन्ना’ हैं। ‘अन्ना’ की ईमानदार और साफ सुथरी छवि ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। ‘अन्ना’ का स्लोगन “न खाऊंगा और न खाने दूंगा…” विभागीय कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है।

लोकपाल विधेयक को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर कई दिनों तक अनशन पर बैठने वाले अन्ना हजारे ने ईमानदारी को लेकर जमकर सुर्खियां बटोरीं। इनकी यादों को कारागार विभाग के अधिकारी ताजा कर दी। विभाग में ईमानदार छवि का यह अधिकारी ‘अन्ना’ के नाम से चर्चित हो गया है। वर्तमान समय में यह ‘अन्ना’ सहारनपुर जेल पर तैनात है। ‘अन्ना’ के रहते हुए जेल में बंदियों से अवैध वसूली होना तो दूर की बात उनका उत्पीड़न तक करने की हिम्मत न तो अधिकारी उठा पा रहे है और न ही जेल के सुरक्षाकर्मी। बंदियों को मानक के अनुसार भोजन एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। ‘अन्ना’ बंदियों के साथ इस तरह घुल मिलकर व्यवहार करते है जैसे वह परिवार के सदस्य हो। बंदी भी ‘अन्ना’ के समक्ष पूरी तरह से अनुशासन में रहते है।

अधीक्षक की जेल पर भेजी गई वरिष्ठ अधीक्षक

सहारनपुर मंडलीय कारागार में अन्ना से विवाद के बाद हटाई गई वरिष्ठ अधीक्षक को अधीक्षक वाली प्रयागराज जिला कारागार भेजा गया है। वहीं गाजीपुर जेल के अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक की जेल पर तैनात किया गया है। कारागार विभाग में वरिष्ठ अधीक्षक की जेल पर अधीक्षक और अधीक्षक की जेल पर वरिष्ठ अधीक्षक तैनात करने की कोई नई परंपरा नहीं है। वर्तमान समय में ऐसा कई जेलों पर देखा जा सकता है।

जेल विभाग के ‘अन्ना’ ने सहारनपुर जेल में राशन कटौती, मशक्कत, मुलाहिजा, मुलाकात, कैंटीन, बैठकी, एम एस के सहित आमदनी के सभी श्रोतों पर रोक लगा दी। बीते दिनों इसी मामले को लेकर तत्कालीन वरिष्ठ अधीक्षक और ‘अन्ना’ के बीच विवाद हो गया था। विवाद को निपटाने के लिए ‘अन्ना’ को विभाग के मुखिया तत्कालीन आईजी जेल ने लखनऊ तलब भी किया था। मुखिया की हिदायतों के बावजूद ‘अन्ना’ की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया। अंततः जेल की वरिष्ठ अधीक्षक का तबादला अधीक्षक की जेल पर कर दिया गया। ‘अन्ना’ के इस जेल पर तैनात होने की वजह से कोई वरिष्ठ अधीक्षक इस जेल पर आने को तैयार नहीं हो रहा है। कारागार “अन्ना” ने खत्म किया सहारनपुर का मोह…!