
डॉ.रोहित गुप्ता (आयुर्वेदिक)
जैसे-जैसे उत्तर भारत में पारा गिर रहा है, वैसे-वैसे घर-घर में सर्दी, खांसी और गले में खराश की समस्याएं पैर पसार रही हैं। जहां लोग तुरंत राहत के लिए एंटीबायोटिक्स की ओर भाग रहे हैं, वहीं आयुर्वेद विशेषज्ञ एक प्राचीन और अचूक नुस्खे को अपनाने की सलाह दे रहे हैं: गुड़ और सोंठ (सूखा अदरक) का मेल। इसे आयुर्वेद में ‘प्राकृतिक पेनकिलर’ और ‘इम्युनिटी बूस्टर’ माना गया है।
क्यों खास है यह जोड़ी? (आयुर्वेदिक विज्ञान)
आयुर्वेद के अनुसार, गुड़ और सोंठ दोनों की तासीर ‘उष्ण’ (गर्म) होती है, जो शरीर में जमे हुए कफ को पिघलाने और निकालने में मदद करती है।
गुड़ का महत्व- गुड़ शरीर की श्वसन नली की सफाई करता है और आयरन की प्रचुर मात्रा के कारण हीमोग्लोबिन बढ़ाता है, जिससे शरीर को ठंड से लड़ने की ताकत मिलती है।
सोंठ का कमाल- सोंठ (Dry Ginger) में ‘जिंजरॉल’ (Gingerol) नामक तत्व होता है, जिसमें जबरदस्त एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह फेफड़ों की सूजन कम करने और इन्फेक्शन को खत्म करने में माहिर है।
उपयोग के 3 सबसे प्रभावी तरीके- सर्दियों की विभिन्न समस्याओं के लिए आप इसे नीचे बताए गए तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं
1. सूखी खांसी के लिए सोंठ-गुड़ की गोलियां- आधा कप कद्दूकस किए हुए गुड़ में 2 चम्मच सोंठ पाउडर और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। इसमें थोड़ा सा घी डालकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें।
कैसे लें-
दिन में 2-3 बार एक-एक गोली चूसें। यह गले की खराश और सूखी खांसी में तत्काल राहत देता है।
2,. जमे हुए कफ के लिए गुनगुना काढ़ा,एक गिलास पानी में एक छोटा टुकड़ा गुड़ और आधा चम्मच सोंठ डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए।
कैसे लें- रात को सोने से पहले इसे चाय की तरह गुनगुना पिएं। यह छाती में जमे हुए बलगम (Mucus) को साफ करने में मदद करता है।
3- शरीर के दर्द और ठंड से बचाव के लिए: सोंठ के लड्डू पुराने समय से ही सर्दियों में सोंठ, गुड़, घी और मेवों के लड्डू बनाने की परंपरा रही है।
कैसे लें– सुबह दूध के साथ एक लड्डू का सेवन करें। यह न केवल जुकाम से बचाता है, बल्कि सर्दियों में होने वाले जोड़ों के दर्द को भी ठीक करता है।
सावधानियां और विशेषज्ञ सलाह- आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि गुड़ और सोंठ का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि इनकी तासीर अत्यधिक गर्म होती है।
किन्हें बचना चाहिए- जिन लोगों को नकसीर (नाक से खून आना), बवासीर या पेट में अल्सर की समस्या है, उन्हें इसका सेवन कम करना चाहिए।
शुद्धता का ध्यान- हमेशा गहरे रंग के या जैविक (Organic) गुड़ का चुनाव करें। सफेद या चमकीला गुड़ अक्सर रसायनों (Chemicals) से साफ किया जाता है, जो सेहत को नुकसान पहुँचा सकता है।
महंगी दवाओं और सिरप के बजाय, रसोई में मौजूद यह ‘विंटर कॉम्बो’ आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकता है। यह न केवल बीमारी को ठीक करता है, बल्कि शरीर को अंदरूनी गर्माहट भी प्रदान करता है।
























