
नन्हे-नन्हे दो साथी,निकले लेकर अपनी गाड़ी।
एक चला नीली मोटर पर,दूजी लाल सवारी।
धीरे-धीरे चलो भैया,हँसकर बोली प्यारी बहना।
रास्ता अपना खेल बने,धूप लगे जैसे सोना।
कभी गाड़ी, कभी ठहाका,कभी ढोल की धुन बजती।
नन्हे कदमों की दुनिया में,खुशियों की गली सजती।
नन्हा भैया गाड़ी चलाए,नन्ही बहना हँसती जाए।
धीरे-धीरे खेलें दोनों,साथ-साथ मुस्काएँ।
छोटी-सी उनकी दुनिया,खुशियों से भर जाए।
– डॉ.सत्यवान सौरभ























