Sunday, February 1, 2026
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यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री

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यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री
यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय उद्योग संगठनों और प्रमुख उद्यमियों के साथ बैठक कर उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई दिशा देने का स्पष्ट संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किया गया निवेश केवल किसी एक राज्य का विकास नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में किया गया निवेश है। प्रदेश की खुशहाली, व्यापक रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत सरकार का सबसे बड़ा साझेदार है, और सरकार इस सहभागिता को और मजबूत करना चाहती है। उन्होंने उद्योग समूहों से सीएसआर के माध्यम से प्रदेश के विकास और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उत्पादों की पैकेजिंग, डिजाइनिंग और एक्सपोर्ट प्रमोशन को बेहतर बनाने, भूमि, लॉजिस्टिक्स और अनुमोदन से जुड़ी लागत कम कर निवेश को और अधिक आकर्षक बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने उद्योग बन्धु की बैठकों को नियमित और प्रभावी बनाने के लिए राज्य, मण्डल और जनपद स्तर पर वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किया गया निवेश केवल एक राज्य में निवेश नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में किया गया निवेश है। आज उत्तर प्रदेश जिस आर्थिक मजबूती और स्थिरता की ओर बढ़ रहा है, उसमें उद्योग जगत की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की खुशहाली, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत सबसे बड़ा सहयोगी है और सरकार इस साझेदारी को और मजबूत करना चाहती है। उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों को केवल निवेश नहीं, बल्कि विकास की साझेदारी का अभिन्न हिस्सा मानती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश करने वाला प्रत्येक उद्यमी, सरकार को अपने साथ खड़ा पाएगा और नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा प्रशासन तीनों स्तरों पर सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योग समूह अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सी0एस0आर0 के तहत योगदान कर सकते हैं। सरकार उद्योगों के सामाजिक योगदान को प्रदेश के समावेशी विकास का मजबूत आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए एम0एस0एम0ई0 सेक्टर में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुझाव देने की बात कही। उन्होंने पैकेजिंग, डिजाइनिंग और एक्सपोर्ट प्रमोशन को और मजबूत करने में उद्योग समूहों से सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर में महिलाओं की बड़ी भूमिका को रेखांकित करते हुए इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए अधिक अवसर सृजित करने हेतु ठोस और व्यावहारिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों के अनुरूप समय पर इन्सेंटिव वितरण के लिए उद्यमियों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि घोषित प्रोत्साहन पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उद्योगों तक पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने खिलौना उद्योग की सम्भावनाओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रदेश में खिलौना पार्क का विकास किया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने औद्योगिक भूमि की लागत कम करने पर भी विशेष जोर दिया और कहा कि भूमि, लॉजिस्टिक्स और अनुमोदन से जुड़ी लागत को कम कर निवेश को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एम0एस0एम0ई0 इकाइयों और नए उद्यमियों के लिए सुगम वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उद्योग बन्धु की बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर आयोजित उद्योग बन्धु की बैठकों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इन बैठकों में उद्योग जगत द्वारा रखी गई समस्याओं और अपेक्षाओं का समाधान अगली बैठक से पहले हर हाल में होना चाहिए। उद्योग बन्धु की राज्य स्तरीय बैठक केवल लखनऊ तक सीमित न रहे, बल्कि अन्य मण्डल मुख्यालयों पर भी आयोजित की जाए।

मण्डल स्तर पर मण्डलायुक्त और ए0डी0जी0/आई0जी0 की उपस्थिति में प्रत्येक दो माह में उद्योग बंधु की बैठक आयोजित की जाए। इसमें सम्बन्धित मंत्रीगणों के साथ सी0ई0ओ0 इन्वेस्ट यू0पी0 और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। राज्य स्तर पर प्रत्येक तिमाही बैठक मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में आयोजित की जाए, ताकि उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित और संतोषजनक समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव आवास को निर्देश दिए कि आवासीय पार्किंग के लिए उपयोग हो रही भूमि पर अनावश्यक कर न लिए जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था लागू की जाए, जिससे नागरिकों और उद्योग से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त भार न पड़े। महत्वपूर्ण बैठक में एक विशेष प्रस्तुतिकरण के माध्यम से उद्यमियों को बीते लगभग 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश की परिवर्तनकारी विकास यात्रा से अवगत कराया गया। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि नीतिगत स्थिरता, व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और प्रशासनिक सुधारों के चलते उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में शामिल हो चुका है।

देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जिसकी कुल लम्बाई करीब 1,225 किलोमीटर है। वर्तमान में प्रदेश में 06 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं और 07 निर्माणाधीन हैं। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है और दादरी में दोनों कॉरिडोर का इंटरसेक्शन राज्य को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करता है। यह भी बताया गया कि प्रदेश में 04 अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कुल 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जबकि जेवर में अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तेजी से आकार ले रहा है। इन सुविधाओं से उद्योगों के लिए कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। प्रस्तुतिकरण में निर्यात क्षेत्र की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का मर्चेंडाइज निर्यात बढ़कर लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो बीते सात-आठ वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, डिफेंस और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निर्यात की क्षमता लगातार बढ़ी है।

यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री


औद्योगिक विस्तार के आंकड़े साझा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2003 में प्रदेश में लगभग 8,980 फैक्ट्रियां पंजीकृत थीं, जो वर्तमान में बढ़कर करीब 27,000 तक पहुंच चुकी हैं। औद्योगिक निवेश अब महानगरों के साथ-साथ पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में भी तेजी से फैल रहा है। चौथी ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा चुका है। अब लगभग 06 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए जी0बी0सी0/5 आयोजित की जाने वाली है। नीतिगत सुधारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश को डिरेगुलेशन 1.0 में देश में पहला स्थान मिला है। भवन निर्माण उपविधि-2025, ऑटो-स्क्रूटनी प्रणाली, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और 40 से अधिक कानूनों में संशोधन कर लगभग 200 अनुपालनों को समाप्त किए जाने जैसे सुधारों से उद्योगों को बड़ी राहत मिली है।


शीघ्र प्रारम्भ होने जा रहे निवेश मित्र 3.0 के माध्यम से 40 से अधिक विभागों की सेवाओं को एकीकृत किया गया है, दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय कमी की गई है और रियल-टाइम ट्रैकिंग तथा डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बैठक में औद्योगिक क्लस्टरों के उन्नयन की जानकारी देते हुए बताया गया कि अगले 02 वर्षों में लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से 185 औद्योगिक क्लस्टरों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य के प्रमुख उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता रही। इनमें भारतीय उद्योग परिसंघ उत्तर प्रदेश, फेडरेशन ऑफ इण्डियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री उत्तर प्रदेश, पी0एच0डी0 चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री, एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ऑफ इण्डिया (एसोचैम), एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ऑफ इण्डिया (एसोचैम) उत्तर प्रदेश, भारतीय उद्योग संघ, लघु उद्योग भारती, दलित इण्डियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री, नैसकॉम तथा भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन का परिसंघ शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने बजट 2026-27 के सन्दर्भ में और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और प्रभावी बनाने के लिए उद्यमियों तथा उद्योग संगठनों से व्यावहारिक सुझाव देने का आह्वान किया। उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश माहौल और विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और सुझाव साझा किए। भारतीय उद्योग परिषद (सी0आई0आई0) के वाइस चेयरमैन अभिषेक सराफ ने डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ नोड में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए भूमि आवंटन की आवश्यकता बताई और इस दिशा में शीघ्र निर्णय की अपेक्षा की। फिक्की उत्तर प्रदेश के चेयरमैन मनोज गुप्ता ने औद्योगिक भूमि को फ्री होल्ड किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि इससे निवेशकों का विश्वास और दीर्घकालिक निवेश दोनों बढ़ेंगे। इण्डिया पेस्टीसाइड लिमिटेड के गैर कार्यकारी निदेशक विश्वास स्वरूप अग्रवाल ने विभिन्न कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन के लिए मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए इसे उद्योगों के लिए बड़ा और सकारात्मक सुधार बताया।


एसोचैम के को-चेयरमैन ने हसन याकूब ने ’वन कम्पनी-वन रजिस्टर-वन लेटर’ जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया, जिससे अनुपालन प्रक्रिया सरल हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ की तर्ज पर फिलीपींस में भी एक कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है, जो प्रदेश की नीति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। वहीं एसोचैम उत्तर प्रदेश द्वारा युवाओं के प्लेसमेंट के लिए किए जा रहे नियोजित प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। औद्योगिक कौशल और वित्तीय बाजार से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने आई0टी0आई0 संस्थानों को और विकसित करने, वहां रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित करने तथा इक्विटी मार्केट के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। इसे भविष्य की मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया। उद्योग संगठनों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में ओ0टी0एस0 योजना लाए जाने की मांग रखी। साथ ही, यह सुझाव दिया कि देश के विभिन्न एक्सपोर्ट काउंसिल्स के साथ उत्तर प्रदेश की एम0एस0एम0ई0 इकाइयों का नियमित संवाद कराया जाए, जिससे निर्यात को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल सके।


नैस्कॉम के लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन रमीश जैदी ने छोटी आई0टी0 कम्पनियों के लिए ‘प्लग-एण्ड-प्ले’ फैसिलिटी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे स्टार्ट-अप्स और उभरती टेक कम्पनियों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। क्रेडाई यू0पी0 के प्रेसीडेंट शोभित मोहन दास ने रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग बन्धु की तर्ज पर नियमित अंतराल पर आवास बन्धु की बैठक आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। दलित इण्डियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के स्टेट प्रेसिडेंट मनीष वर्मा से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक जनपद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कम से कम 10 युवा उद्यमियों को तैयार करने के लिए ठोस और योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि समावेशी औद्योगिक विकास को गति मिल सके। इस अवसर पर औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, एम0एस0एम0ई0 मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवन्त सिंह सैनी, सलाहकार मुख्यमंत्री अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्य सचिव एस0पी0 गोयल, डी0जी0पी0 राजीव कृष्ण, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना संजय प्रसाद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यूपी में निवेश राष्ट्रहित में निवेश:मुख्यमंत्री