
—– उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए —–
उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कराये जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) पद्धति पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों को विकसित कराये जाने हेतु द्वितीय चरण में, प्रारम्भिक रूप से 54 बस स्टेशनों के स्थान पर अनुपयुक्त 06 बस स्टेशनों को छोड़ते एवं जनपद चन्दौली को सम्मिलित करते हुये, कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस सम्बन्ध में बिडिंग की कार्यवाही प्रारम्भ करने के लिये ड्राफ्ट आर0एफ0पी0 और ड्राफ्ट कन्सेशन एग्रीमेन्ट को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। बिडिंग प्रक्रिया के दौरान बिड दस्तावेजों में संशोधनों पर स्वीकृति हेतु मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कराये जाने वाले 49 बस स्टेशनों में फाउंड्री नगर (आगरा), अकबरपुर (डिपो कार्यशाला) (अम्बेडकरनगर), अमेठी तथा जगदीशपुर (अमेठी), अयोध्या (ओल्ड बस स्टेशन) (अयोध्या), तरवा (आजमगढ़), रसड़ा तथा बेल्थरा रोड (बलिया), बलरामपुर (डिपो कार्यशाला) (बलरामपुर), हैदरगढ़ (बाराबंकी), बस्ती (डिपो कार्यशाला) (बस्ती), नहटौर (बिजनौर), बदायूं (बदायूं), बुलन्दशहर (पुराना) तथा खुर्जा (बुलन्दशहर), देवरिया (देवरिया), एटा (एटा), फिरोजाबाद तथा शिकोहाबाद (फिरोजाबाद), नोएडा (डिपो कार्यशाला) (गौतमबुद्धनगर), गढ़ तथा लोनी (गाजियाबाद), गोण्डा (डिपो कार्यशाला) (गोण्डा), हरदोई (हरदोई), हाथरस (हाथरस), जौनपुर, मछलीशहर तथा बादशाहपुर (जौनपुर), झाँसी (नई भूमि) (झाँसी), माती (कानपुर देहात), सराय आकिल (कौशाम्बी), गोला (लखीमपुर खीरी), जानकीपुरम तथा कैसरबाग (लखनऊ), सोनौली तथा निचलौल (महराजगंज), विन्ध्याचल (मिर्जापुर), मुरादाबाद (पीतल नगरी) (मुरादाबाद), मुजफ्फरनगर (नई भूमि) (मुजफ्फरनगर), पीलीभीत (पीलीभीत), कुण्डा (प्रतापगढ़), रामपुर (रामपुर), भिनगा (श्रावस्ती), नैमिषारण्य तथा सिधौली (सीतापुर) रॉबर्टसगंज (सोनभद्र), उन्नाव (उन्नाव), काशी (गोलगट्टा) (वाराणसी) तथा चन्दौली (चन्दौली) सम्मिलित हैं।
इन बस स्टेशनों को ’डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण’ (डी0बी0एफ0ओ0टी0) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। बिना किसी सरकारी निवेश के बस स्टेशनों पर शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।निवेशकों की तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। पात्र परियोजनाओं की गणना के लिए समय सीमा 05 वर्ष से बढ़ाकर 08 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की आवश्यकता अनुमानित परियोजना लागत का 25 प्रतिशत निर्धारित की गई है। कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 03 से बढ़ाकर 04 कर दी गई है। इसके लिए समय-सीमा को 06 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दिया गया है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 के समान फ्लोर एरिया रेशियो (एफ0ए0आर0) और ग्राउण्ड कवरेज की निःशुल्क अनुमति प्रस्तावित की गयी है। लीज अवधि (35 या 90 वर्ष) समाप्त होने पर यदि विकासकर्ता स्वामित्व वापस नहीं करता है, तो भूमि का स्वामित्व स्वतः ही परिवहन निगम को प्राप्त हो जाएगा।
डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना प्रारम्भ किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना प्रारम्भ किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। महापुरुषों, राष्ट्रीय स्तर के समाज सुधारकों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियाँ हमारे राष्ट्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। यह मूर्तियां सार्वजनिक स्मृति, सामाजिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय एवं स्थानीय योगदानकर्ताओं के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करती हैं। वर्तमान में अनेक मूर्तियों निर्धारित विधिक मानकों के अनुरूप स्थापित हैं, जो छत्र एवं बाउण्ड्रीवॉल से रहित हैं। इसके कारण यह मूर्तियां मौसम की मार, अतिक्रमण एवं उपेक्षा के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। पर्याप्त सुरक्षा एवं सौंदर्याकरण के अभाव में इन प्रतिमाओं की गरिमा तथा दृश्य आकर्षण भी प्रभावित होता है।
उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य 31 दिसम्बर, 2025 तक स्थापित ऐसी विद्यमान मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनके आसपास के क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण कर उन्हें संरक्षित एवं सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है। योजना के माध्यम से मूर्तियों की भौतिक सुरक्षा तथा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का सरंक्षण किया जा सकेगा। योजना के क्रियान्वयन से मूर्ति स्थलों का सौन्दर्यीकरण एवं गरिमा-वर्धन होगा। इस प्रकार मूर्ति स्थलों को जानकारीपरक एवं जनोपयोगी बनाया जाएगा।
डॉ0 बी0आर0 आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को प्रारम्भ किये जाने से मूर्तियों के आस-पास स्थल का विकास तथा बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन होगा। प्रत्येक विधान सभा में 10 स्मारकों का विकास कराया जाएगा। प्रति स्मारक लागत 10 लाख रुपये निर्धारित है। इस प्रकार कुल 403 विधान सभाओं में 10 स्मारकों के विकास हेतु कुल 403 करोड़ रुपये का व्यय सम्भावित है।
स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत निःशुल्क टैबलेट वितरित किये जाने के सम्बन्ध में 25 लाख टैबलेट क्रय किये जाने हेतु अन्तिम बिड डॉक्यूमेन्ट अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत निःशुल्क टैबलेट वितरित किये जाने के सम्बन्ध में 25 लाख टैबलेट क्रय किये जाने हेतु अन्तिम बिड डॉक्यूमेन्ट पर अनुमोदन प्रदान किया है। निविदा की शर्तों तथा डिवाइसेस की संख्या में परिवर्तन, सफल निविदादाताओं के चयन एवं क्रयादेश निर्गमन पर अनुमोदन प्रदान करने के लिये मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है। प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाये जाने हेतु टैबलेट वितरण की यह एक अभिनव योजना है। स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास आदि विभिन्न शिक्षण/प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लाभार्थी युवा वर्ग को टैबलेट निःशुल्क प्रदान करने से न केवल वह अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को सफलतापर्वक पूर्ण कर सकेंगें वहीं उसके उपरान्त विभिन्न शासकीय/गैर-शासकीय तथा स्वावलम्बन की योजनाओं में भी वे इसका सदुपयोग कर सेवारत/व्यवसायरत हो सकेगें। निःशुल्क टैबलेट वितरण से प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं आई0टी0आई0 तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत कुशल युवा वर्ग तकनीकी रूप से सशक्त बनेगें। इससे युवा वर्ग को रोजगार का सृजन एवं सेवायोजन में सहायता होगी।
उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अन्तर्गत 08 प्रकरणों पर उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियां अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अन्तर्गत 08 प्रकरणों पर उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों पर अनुमोदन प्रदान किया है।
इसके तहत 7608.04 करोड़ रुपये के कुल प्रस्तावित निवेश हेतु 06 औद्योगिक इकाईयों (ओएफबी टैक प्राइवेट लिमिटेड, शाहजहाँपुर ; इण्डिया ग्लाइकौल्स लिमिटेड, गोरखपुर ; सीईएससी ग्रीन पावर लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर ; बिसलेरी इण्टरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, प्रयागराज ; एजीआई कैन, हाथरस ; इण्टीग्रेटेड बैटरीज़ इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर) को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किये जाने, 237 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश की एक इकाई (त्रिवेणी इन्जीनियरिंग, मुरादाबाद) को प्रथम वर्ष हेतु स्वीकृत पूंजीगत सब्सिडी 4,04,47,054.28 रुपये की प्रतिपूर्ति तथा 16139.5 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश की 01 इकाई (अवाडा इलेक्टो्र लिमिटेड, गौतमबुद्धनगर) के लेटर ऑफ कम्फर्ट में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रस्तर-12 में औद्योगिक इकाईयों को छूट, अनुदान एवं वित्तीय सुविधाएं प्रदान किये जाने का प्राविधान किया गया है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु शासन के पत्र दिनांक 14.04.2023 द्वारा दिशा-निर्देश एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित की गयी है। शासनादेश दिनांक 14.04.2023 के प्रस्तर-4 एवं 5 में लेटर ऑफ कम्फर्ट तथा प्रोत्साहनों की स्वीकृति हेतु आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत विवरण का उल्लेख है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यू0पी0 (नोडल संस्था) की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया है। मूल्यांकन समिति द्वारा औद्योगिक इकाईयों के आवेदनों का मूल्यांकन कर संस्तुति प्राधिकारी के समक्ष विचार-विमर्श हेतु प्रस्तुत किये जाने की व्यवस्था है।
मेगा एवं उससे उच्च श्रेणी की औद्योगिक इकाईयों के आवेदन पत्रों पर मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाता है। उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा की गई अन्तिम संस्तुतियों को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया जाता है। उच्चस्तरीय प्राधिकृत समिति की 10 फरवरी, 2026 को सम्पन्न बैठक में 08 प्रकरणों पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त किये जाने की संस्तुति की गयी थी।
जनपद गोरखपुर में ‘उ0प्र0 वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना तथा उससे सम्बन्धित आनुषंगिक विषयों के उपबन्ध के लिए ‘उ0प्र0 वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026’ का आलेख स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद गोरखपुर में ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना तथा उससे सम्बन्धित आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026’ के आलेख को स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित अध्यादेश में आवश्यकतानुसार अन्य निर्णय लिए जाने/संशोधन किये जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है। प्रदेश में वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा, वनावरण एवं वृक्षावरण में वृद्धि तथा औद्यानिकी क्षेत्र में प्रगति राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना से जहाँ एक ओर वन एवं वन्य जीव की सुरक्षा, वनीकरण एवं औद्यानिकी के क्षेत्र में उन्नत खेती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर कृषि एवं पर्यावरण में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्तियों तथा छात्रों-छात्राओं को वानिकी एवं औद्यानिकी के सम्बन्ध में आधुनिक ज्ञान और प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ होंगे।
उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना भारी वैसी वन ब्लॉक, कैम्पियरगंज रेंज, गोरखपुर के अन्तर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर किया जाना प्रस्तावित है। विश्वविद्यालय में वानिकी एवं औद्यानिकी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों में अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु पाठ्यक्रम का संचालन किया जाएगा।वानिकी से सम्बन्धित सेल्वी-कल्चर एवं एग्रो-फॉरेस्ट्री विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन एवं संरक्षण विज्ञान, वन उपज एवं उनके उपयोग, विज्ञान पारिस्थितिकीय, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विज्ञान, वन्य जीव विज्ञान एवं संरक्षण विज्ञान सामान्य एवं सामाजिक विज्ञान पर अध्ययन प्रस्तावित है। औद्यानिकी के तहत वनस्पति विज्ञान, फल और बागवानी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पुष्प कृषि और भू-निर्माण तथा कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी (पोस्ट हार्वेस्टिंग टेक्नोलॉजी) एवं वानिकी तथा औद्यानिकी से सम्बन्धित अन्य सम-सामयिक विषयों में अध्ययन प्रस्तावित है। इसके अन्तर्गत बी0एस0सी0, एम0एस0सी0 तथा पी0एच0डी0 डिग्री के साथ-साथ अल्प अवधि डिप्लोमा कार्यक्रम संचालित होंगे।
विश्वविद्यालय के मुख्य उद्देश्य-वानिकी औद्यानिकी और अन्य सम्बन्धित विषयों में संगठित और गुणात्मक शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान सुनिश्चित करना। वानिकी और औद्यानिकी के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को हरित आवरण से जोड़ने के लिए एक मंच प्रदान करना। वानिकी और औद्यानिकी के क्षेत्र में छात्रों और किसानों आदि की क्षमता वृद्धि। वानिकी, औद्यानिकी आदि से सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न संगठनों, संस्थाओं और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना। प्रयोगशाला से भूमि तक कार्यक्रम के अन्तर्गत अनुसंधान के निष्कर्षों का विस्तार करना। विभिन्न शैक्षिक और अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना आदि।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जनपद बलिया में चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तान्तरित जिला कारागार की 14.05 एकड़ (5.686 हे0) भूमि पर नवीन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के निमित्त गठित की जाने वाली सोसाइटी का मेमोरेण्डम एवं बायलॉज पूर्व में मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित केन्द्र सहायतित योजना फेज-3 के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के सोसाइटी गठन के मेमोरेण्डम एवं बायलॉज की भांति रहेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 437.0021 करोड़ रुपये के व्यय प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया है। मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णयों की मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी देने हेतु आहूत ब्रीफिंग में परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बलिया का नाम महर्षि भृगु के नाम पर रखा जाएगा। इसी के साथ ही ढाई एकड़ भूमि पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व0 चित्तू पाण्डेय के नाम पर स्मारक बनाया जाएगा।
जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में रह रहे शरणार्थी परिवारों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने भारत विभाजन के समय विस्थापित होकर जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में रह रहे शरणार्थी परिवारों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अन्तर्गत संहिता की धारा-76(1) में खण्ड (घघघ) व (घघघघ) को जोड़ा जायेगा।
इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के प्रख्यापन तथा उसके प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख्य पर, विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराये जाने का प्रस्ताव भी मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत किया गया है। निर्णय को लागू करने में कोई व्यावहारिक कठिनाई उत्पन्न होने की स्थिति में उक्त के समाधान हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि पिछले 50-70 वर्षों में स्वामित्व के अभाव में इन परिवारों को खेती के लिये बैंक ऋण प्राप्त करने और सरकारी खरीद केन्द्रों पर अपनी उपज बेचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके समाधान के लिये अध्यादेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। संहिता के प्रवृत्त होने के दिनांक से इन परिवारों को ‘असंक्रमणीय अधिकार’ प्रदान किया जायेगा। इस निर्णय से परिवारों को अपनी जमीन का मालिकाना हक प्राप्त होगा, जिससे आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा। सरकारी केन्द्रों पर अपनी फसल सम्मानजनक तरीके से बेच सकेंगे। इस प्रकार उन्हें न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनका आर्थिक सशक्किरण भी होगा।दशकों से अपनी ही जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ कहे जाने वाले विस्थापित परिवारों को अब ‘भूमिधर’ का सम्मान मिलेगा। राजस्व संहिता में इस संशोधन के माध्यम से प्रदेश सरकार ने अन्त्योदय के संकल्प को सिद्ध किया है।
सिकन्दराराऊ, जनपद हाथरस में बस स्टेशन निर्माण के लिये ग्राम रतनपुर हुसैनपुर में 01 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग के पक्ष में निःशुल्क नामान्तरित/हस्तान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने सिकन्दराराऊ, जनपद हाथरस में बस स्टेशन निर्माण के लिये ग्राम रतनपुर हुसैनपुर में खसरा संख्या-263, रकबा 10.012 हेक्टेयर भूमि में से 01 हेक्टेयर भूमि का परिवहन विभाग के पक्ष में निःशुल्क नामान्तरण/हस्तान्तरण किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। सिकन्दराराऊ क्षेत्र एटा, अलीगढ़, कासगंज एवं हाथरस जैसे प्रमुख जनपदों से जुड़ा हुआ है। 02 राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य स्थित होने के कारण यह क्षेत्र यातायात की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। बस स्टेशन का निर्माण हो जाने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार एवं पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
नरौरा, जनपद बुलन्दशहर में बस स्टेशन एवं डिपो कार्यशाला तथा तहसील तुलीसपुर, जनपद बलरामपुर में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने नरौरा, जनपद बुलन्दशहर में बस स्टेशन एवं डिपो कार्यशाला स्थापित किये जाने हेतु सिंचाई विभाग की भूमि तथा तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिये लोक निर्माण विभाग की भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क नामांतरित/हस्तांतरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार ग्राम जयरामपुर बांगर, तहसील डिबाई, जनपद बुलन्दशहर स्थित सिंचाई विभाग की 43.9230 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रिक्त भूमि में से 1.1260 हेक्टेयर चिन्हित भूमि एवं तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में हरैया तिराहा एवं देवीपाटन मन्दिर के मध्य सड़क के किनारे स्थित राजस्व पाटन के गाटा संख्या-169 रकबा 3.0350 हेक्टेयर भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6(2) के अन्तर्गत डाक बंगला (लोक निर्माण विभाग) के नाम दर्ज है, में से 02 हेक्टेयर भूमि को परिवहन निगम के उपयोगार्थ/निवर्तन हेतु परिवहन विभाग को निःशुल्क नामांतरण/हस्तांतरण किया जायेगा। इसके लिये संगत आदेश सम्बन्धित विभागों के प्राधिकारी निर्गत करेंगे।
ज्ञातव्य है कि जनपद बुलन्दशहर में पूर्व में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया की लीज भूमि पर परिवहन निगम का नरौरा डिपो संचालित था। लीज समाप्त होने के बाद इसे स्थायी रूप से नई भूमि पर स्थापित किया जाना आवश्यक है। जनपद बलरामपुर में देवी पाटन मन्दिर के समीप यात्रियों की सुविधा हेतु एक व्यवस्थित बस स्टेशन की मांग की जा रही थी।
बस स्टेशनों के संचालन से जनता को सुलभ, सस्ती और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलेगी। बस स्टेशन और कार्यशाला के निर्माण से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा। बस स्टेशनों को ‘आर्थिक केन्द्र’ (दुकान, फूड कोर्ट) के रूप में विकसित किया जायेगा। व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से परिवहन निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।
जनपद कन्नौज में विधान सभा क्षेत्र छिबरामऊ के अन्तर्गत च्यवन ऋषि आश्रम के निकट चियासर घाट पर गंगा नदी पर ई0पी0सी0 मोड पर सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग के निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना व लागत 28899.22 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद कन्नौज में विधान सभा क्षेत्र छिबरामऊ के अन्तर्गत विकास खण्ड गुगरापुर में ग्राम चियासर के पास च्यवन ऋषि आश्रम के निकट चियासर घाट पर गंगा नदी पर सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग एवं सुरक्षात्मक निर्माण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना, प्रश्नगत कार्य ई0पी0सी0 मोड पर कराये जाने तथा उक्त कार्य की व्यय वित्त समिति से अनुमोदित लागत 28899.22 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया है। ज्ञातव्य है कि चियासर घाट पर गंगा नदी को पार करने हेतु केवल नाव ही एक मात्र साधन है, जो वर्षा ऋतु में बन्द हो जाता है। इससे नदी के दोनों ओर निवास करने वाली आबादी का आवागमन पूर्ण रूप से बाधित हो जाता है। प्रस्तावित सेतु बन जाने से जनपद कन्नौज व जनपद हरदोई की लगभग 04 लाख आबादी लाभान्वित होगी।
कन्नौज साइड रामगंगा नदी सेतु पलिया बेडीजोर, रामगंगा नदी सेतु अर्जुनपुर से हरदोई, बरेली, शाहजहांपुर से जुड़ जायेंगे। हरदोई साइड के निवासी छिबरामऊ गुरसहायगंज, कन्नौज, कानपुर तथा फर्रुखाबाद राष्ट्रीय राज मार्ग एन0एच0-34 तथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से जुड जायेंगे। इससे समय एवं ईंधन की बचत होगी, क्षेत्रीय निवासियों तथा पर्यटकों के आवागमन में सुविधा होगी और क्षेत्र का चहुँमुखी विकास होगा।
जनपद कुशीनगर में विधान सभा खड्डा के अन्तर्गत नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर ई0पी0सी0 मोड पर दीर्घ सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग के निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना व लागत 70518.19 लाख रु0 का व्यय प्रस्ताव अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने जनपद कुशीनगर में विधान सभा खड्डा के अन्तर्गत नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर दीर्घ सेतु, पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग एवं सुरक्षात्मक निर्माण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना, प्रश्नगत कार्य ई0पी0सी0 मोड पर कराये जाने तथा उक्त कार्य की व्यय वित्त समिति से अनुमोदित लागत 70518.19 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया है।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर नदी पार करने का एक मात्र साधन पान्टून पुल है, जो वर्षा ऋतु में हटा लिया जाता है। प्रस्तावित सेतु का निर्माण हो जाने से बिहार एवं जनपद महराजगंज जाने के लिए लगभग 40-50 कि0मी0 दूरी कम हो जायेगी एवं कुशीनगर तथा महराजगंज साइड के गांव लाभान्वित होंगे। इससे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा।
जनपद शाहजहाँपुर में लिपुलेक भिण्ड मार्ग के 28.300 कि0मी0 लम्बाई में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की सम्पूर्ण परियोजना तथा पुनरीक्षित लागत 26670.09 लाख रु0 स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद शाहजहाँपुर में लिपुलेक भिण्ड मार्ग (राज्य मार्ग सं0-29) के चैनेज 468.750 से चैनेज 497.050 तक (लम्बाई 28.300 कि0मी0) मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की सम्पूर्ण परियोजना तथा उक्त कार्य की व्यय-वित्त समिति द्वारा अनुमोदित पुनरीक्षित लागत 26670.09 लाख रुपये (दौ सौ छाछठ करोड़ सत्तर लाख नौ हजार मात्र) का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। यह मार्ग राज्य मार्ग (एस0एच0-29) श्रेणी का है। इस मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हो जाने से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और जनपद शाहजहाँपुर व आस-पास के क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा।
पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासन हेतु लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप के निर्धारण हेतु की गयी कार्यवाही पर कार्यात्तर अनुमोदन
मंत्रिपरिषद ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासन हेतु लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप के निर्धारण हेतु की गयी कार्यवाही पर कार्यात्तर अनुमोदन प्रदान किया है। ज्ञातव्य है कि 29 जनवरी, 2026 को मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदान किये गये अनुमोदन के क्रम में ग्राम नंगला गोसाई, तहसील मवाना, जनपद मेरठ से 99 विस्थापित परिवारों के जनपद कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद के ग्राम भैंसाया और ग्राम ताजपुर तरसौली में कतिपय शर्तां के अधीन पुनर्वासित किये जाने के आदेश 03 फरवरी, 2026 को जिलाधिकारी कानपुर देहात व मेरठ को निर्गत किये गये थे। इसमें लीज रेंट एवं पट्टे के प्रारूप का उल्लेख नहीं किया जा सका।
प्रकरण की तात्कालिकता एवं मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के दृष्टिगत, पूर्व में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 63 हिन्दू बंगाली परिवारों को तहसील रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात में पुनर्वासित किये जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश दिनांक 11 नवम्बर, 2021 द्वारा निर्धारित लीज रेंट (01 रुपये) एवं पट्टे हेतु निर्धारित प्रारूप के अनुसार, वर्तमान प्रकरण में भी उपरोक्तानुसार कार्यवाही किये जाने हेतु जिलाधिकारी, कानपुर देहात को 27 मार्च, 2026 को आदेश निर्गत कर दिया गया था। उक्त कार्यवाही पर मंत्रिपरिषद द्वारा कार्यात्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।
निजी क्षेत्र के अन्तर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने निजी क्षेत्र के अन्तर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा की स्थापना हेतु प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा को संचालन का प्राधिकार निर्गत किये जाने तथा ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ के प्रतिस्थानी विधेयक को विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, विद्यमान निजी विश्वविद्यालयों के निगमन, उनके कृत्यों के विनियमन तथा उससे सम्बन्धित या आनुषंगिक विषयों की व्यवस्था करने के लिये उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 प्रख्यापित किया गया है। सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस सम्बन्ध में कुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की अध्यक्षता में मूल्यांकन समिति का गठन किया गया। मूल्यांकन समिति की आख्या एवं उसमें प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किये जाने हेतु की गयी संस्तुति के आलोक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रायोजक संस्था को आशय पत्र निर्गत करने की संस्तुति की गयी। संस्तुति के आधार पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त आशय पत्र निर्गत किया गया। आशय पत्र में उल्लिखित शर्तों का सत्यापन कुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की अध्यक्षता में गठित निरीक्षण और सत्यापन समिति द्वारा किया गया। उक्त समिति द्वारा प्रश्नगत विश्वविद्यालय का नाम उ0प्र0 निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की अनुसूची में सम्मिलित करने हेतु संस्तुति की गयी।





















