
अशोक भाटिया
1967 में रिलीज़ फिल्म उपकार ने कलाकार मनोज कुमार को भारत कुमार की संज्ञा दिलाई थी।इस लोकप्रिय फ़िल्म में एक से एक बेहतरीन गीत थे। सभी ने बॉलीवुड ने धूम मचाई थी। अमर गायक मन्ना डे की सुरीला आवाज़ में ‘देते हैं… देते हैं भगवान को धोखा, इनसां को क्या छोड़ेंगे ‘बहुत ही मशहूर हुआ था। फिल्म की रिलीज को आज 47 साल हो गए । इन 47 वर्षों में भगवान को धोखा देने के छोटे–छोटे हजारों मामले आये होंगे पर हाल ही में आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर का जो मामला सामने आया है, उसने फिल्म के गीत को चरितार्थ करते हुए बता दिया कि तिरुपति के लड्डुओं में पशु चर्बी का इस्तेमाल कर लोग किस हद तक और कितना बड़ा भगवान को दोखा दे सकते है। देते हैं भगवान को धोखा,इनसां को क्या छोड़ेंगे…
हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के एक दावे से न केवल बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है बल्कि यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुच गया है व दिल्ली सरकार को भी संज्ञान लेना पड़ा है। मामला इस प्रकार बताया जाता है कि वर्तमान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू के अनुसार पिछली सरकार के दौरान तिरुपति के लड्डुओं में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने दावा किया कि पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को भी नहीं बख्शा और लड्डू बनाने के लिए घटिया सामग्री और पशु चर्बी का इस्तेमाल किया।
टीडीपी ने कथित प्रयोगशाला रिपोर्ट दिखाई जिसमें दिए गए घी के नमूने में ‘पशु की चर्बी’, ‘लार्ड’ (सूअर की चर्बी से संबंधित) और मछली के तेल की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। नमूने लेने की तारीख नौ जुलाई, 2024 थी और प्रयोगशाला रिपोर्ट 16 जुलाई की थी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या घी का टेंडर ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को दी गई अनदेखी या जानबूझकर छूट का मामला है? मीडिया के हाथ घी के टेंडर की कॉपी लगी है जिसने खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया गया और घी को जांच के लिए नहीं भेजा गया। टेंडर के क्लॉज 80 के अनुसार आपूर्ति की गई घी की प्रत्येक खेप के लिए एनएबीएल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना जरूरी है।
इसके अलवा टेंडर क्लॉज 81 के अनुसार तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को घी के नमूनों को लैब परीक्षण के लिए भेजना अनिवार्य है। सवाल उठ रहे हैं कि अगस्त 2023 और जुलाई 2024 के बीच ब्लैक लिस्टेड कंपनी के पहले के नमूनों में ये मिलावट कैसे नहीं पकड़ी गई? क्या टीटीडी ने एनएबीएल/लैब परीक्षण के लिए नमूने नहीं भेजे? क्या ब्लैक लिस्टेड कंपनी ने उस बैच का एनएबीएल प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया जिसमें मिलावट पाई गई थी?
आपको बता दे कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन करता है। प्रकाशम जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने घटिया किस्म का घी सस्ते दामों पर खरीदा, जिससे लड्डू की गुणवत्ता प्रभावित हुई और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम की पवित्रता को नुकसान पहुंचा।उन्होंने कहा था कि आज हमने घी आपूर्तिकर्ता को बदल दिया है। हमने कर्नाटक से नंदिनी ब्रांड का घी खरीदना शुरू कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि (तिरुपति के लड्डू में मिलावटी घी और पशु चर्बी की मौजूदगी के आरोपों के बाद) उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। जब भावनाएं आहत हुई हैं, तो क्या मुझे उन्हें (दोषियों को) छोड़ देना चाहिए? वो भी तब, जब अक्षम्य गलतियां की गई। लोगों की अपने-अपने धर्मों में आस्था है।”
टीटीडी के ईओ राव कहना था कि चारों सैंपल की रिपोर्ट में एक जैसे नतीजे आए हैं, इसलिए हमने तुरंत सप्लाई रोक दी। ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अब कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने आगे कहा कि गुणवत्ता में कमी का कारण इन-हाउस लैब का न होना, सैंपल को जांच के लिए बाहरी लैब में भेजना और उचित दरें न होना है। आपूर्तिकर्ताओं ने इन कमियों का फायदा उठाया और 320 से 411 रुपये के बीच घी की आपूर्ति की।’
नंदिनी ने पुष्टि की कि जब जुलाई 2023 में उसे पता पड़ा कि तिरुपति लड्डू अब उनके घी से नहीं बनाए जाएंगे क्योंकि टीटीडी ने तमिलनाडु की नई कंपनी को पैनल में शामिल किया है जो सस्ती दर पर घी उपलब्ध करा रही है। इसके बाद, एआर डेयरी फूड (तमिलनाडु स्थित) को लड्डू के लिए घी की आपूर्ति का ठेका मिला जिसके तहत 320 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से घी की सप्लाई की गई। जब जुलाई 2024 में एनडीडीबी कैल्फ ने घी के नमूनों पर रिपोर्ट दी, नमूनों में बीफ फैट, मछली का तेल, लार्ड (पशु वसा) सहित मिलावट पाई गई। मिलावट की रिपोर्ट के बाद एआर डेयरी फूड का ठेका रद्द कर दिया गया।
वैसे एआर डेयरी प्रोडक्ट्स ने पूरे मामले से इंकार करते हुए कहा है कि जून और जुलाई में मामला सामने आया था। हमने तिरुपति मंदिर में 0.1% की भी सप्लाई नहीं की है। स्वीकृति के बाद चार टैंकर (घी) दिए गए। उन्होंने भुगतान किया। पांचवें टैंकर की उन्होंने शिकायत की है। हमने इसे चैलेंज किया है। हम प्रतिष्ठित NAPL लैब में परीक्षण और एगमार्क अथॉरिटी द्वारा प्रमाणित होने के बाद ही टैंकर भेज रहे हैं। मामले को राजनीतिक बनाया जा रहा है। रोजाना 10 टन की जरूरत है जबकि हम 0.1% भी सप्लाई नहीं कर रहे हैं।रिपोर्ट में हमारा नाम नहीं, रिजल्ट में अन्य कारण भी बताए .कंपनी ने आगे कहा, जो रिपार्ट आई है, उसमें अन्य कारण भी बताए गए हैं जैसे- चारा या पशु दवा के कारण भी ऐसा हो सकता है। उस लैब रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए। उस रिपोर्ट में हमारा नाम नहीं है लेकिन उसमें रिजल्ट के अन्य कारण भी बताए गए हैं। चूंकि, यह क्लोज सब्जेक्ट था और हम इसे टेक्निकल रूप से देख रहे थे। रिपोर्ट के बाद यह फिर गरमा गया है। हम आरोपों को खारिज करते हैं और रिपोर्ट को चैलेंज किया है।
बताया जाता है कि गुजरात की लैब में जिन कंपनी के घी की जांच की है वह एआर डेयरी का है। टीटीडी का कहना है कि नतीजे मिलने पर घी की आपूर्ति रोक दी गई थी। टीटीडी अनुसार बीते 6 जुलाई और 12 जुलाई को इस कंपनी ने चार टैंकर भेजे थे। इससे पहले 15 से लेकर 6 जुलाई तक इस कंपनी ने 6 टैंकर भेजे थे जिसमें से एक टैंकर में 15 हजार लीटर घी की सप्लाई होती थी लेकिन 6 जुलाई को भेजे 2 टैंकर और 12 जुलाई को 2 टैंकर में से सैंपलों में गड़बड़ी के चलते उन्हें गुजरात भेजा गया था। बाकी के टैंकरों पर रोक लगा दी गई थी। टीटीडी ने बताया कि इससे पहले प्रसाद के बनने वाले लड्डुओं के लिए घी कर्नाटक की डेयरी ब्रांड नंदिनी से आ रहा था।
ज्ञात हो कि अयोध्या के राम मंदिर उद्घाटन पर तिरुपति मंदिर से एक लाख लड्डुओं का प्रसाद आया था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद से संतों में उबाल है। जिले के पुजारी व साधु-संतों में रोष देखने को मिल रहा है। मौनी महाराज ने कहा कि इस जांच में पता चला है कि तिरुपति के प्रसाद में बीफ और मछली का तेल मिलाया गया है। यह कब से हो रहा है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की रिपोर्ट में हुआ खुलासा होने से संतों में उबाल है। सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। मौनी महाराज ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है और सनातन धर्म पर हमला है। सरकार गंभीरता से इस मामले की जांच करें।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलावट को लेकर जो रहस्योद्घाटन किया है, वो बहुत ही गंभीर धार्मिक अपराध है। जगन मोहन रेड्डी की सरकार में प्रसाद में जानवरों की चर्बी से बनी घी का उपयोग किया जा रहा था। साथ ही अखिल भारतीय संत समिति ने एक नई मांग पेश कर दी है । उनके अनुसार मठ, मंदिर चलाना सरकार का काम नहीं है लेकिन देश के चार लाख मंदिर इनके कब्जे में हैं। प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलाना धार्मिक रूप से अक्षम्य और बहुत बड़ा अपराध है। यह षड्यंत्र है। इस बात के उजागर के लिए हम चंद्रबाबू नायडू के सरकार की प्रशंसा करनी ही चाहिए। देते हैं भगवान को धोखा,इनसां को क्या छोड़ेंगे…























