Monday, April 6, 2026
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शिक्षानीति पर घिरी सरकार,अखिलेश ने उठाए सवाल

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शिक्षानीति पर घिरी सरकार,अखिलेश ने उठाए सवाल
शिक्षानीति पर घिरी सरकार,अखिलेश ने उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना है कि शिक्षित समाज ही सवाल करता है, और सरकार सवालों से बचना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा पीढ़ी को रूढ़िवाद और अंधविश्वास की ओर धकेला जा रहा है, जिससे देश का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

राजेन्द्र चौधरी

भाजपा चाहती है लोग अशिक्षित रहें। बच्चे न पढ़े-लिखे, क्योंकि पढ़े लिखे लोग सरकार से सवाल करते हैं। यह सरकार सवाल नहीं सुनना चाहती है। भाजपा युवा पीढ़ी को रूढ़िवादी और अंधविश्वास में फंसाना चाहती है। बच्चों और युवाओं का भविष्य खराब कर रही है। युवाओं को पीछे ले जा रही है। इसीलिए शिक्षा विभाग को चौपट कर दिया। अखिलेश यादव ने कहा है कि इस सरकार ने शिक्षा विभाग को बर्बाद कर दिया। इस सरकार में शिक्षा की प्राथमिकता कभी नहीं रही है। प्राइमरी शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक शिक्षा को चौपट कर दिया है। भाजपा सरकार शिक्षा को नहीं बढ़ाना नहीं चाहती है। युवा, पीढ़ी को रुढिवादी बनाकर वैज्ञानिक सोच, शोध और नवाचार से वंचित करना चाहती है। गरीब परिवारों के बच्चे जिन स्कूलों में पढ़ने जा रहे थे, भाजपा सरकार ने उन स्कूलों को बंद कर दिया। भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में हजारों की संख्या में प्राइमरी स्कूल बंद हो चुके हैं। पढ़ाई की व्यवस्था खत्म कर दिया। शिक्षा के प्रति सरकार के सौतेले व्यवहार के कारण प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि प्राइमरी स्कूलों की जर्जर स्थिति को देखते हुए समाजवादी पार्टी की सरकार ने पढ़ाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर को अच्छा बनाने के लिए फैसले लिए। उन पर कार्य किया। प्राइमरी स्कूलों को अच्छा बनाया। बच्चों को हॉट कुक्ड मील की शुरुआत की। प्राइमरी स्कूलों में मिड डे मील में हर दिन अलग मीनू की शुरुआत की थी। बच्चों को फल और दूध मिलता था। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया था। स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। प्रदेश में अभिनव स्कूलों को बनाना शुरू किया था। दिल्ली के संस्कृति स्कूल की तरह लखनऊ के चकगंजरियां में संस्कृति स्कूल बनाया गया। शिक्षा विभाग को हर जिले में इसी तरह स्कूल बनाने का निर्देश दिया गया लेकिन भाजपा सरकार ने लखनऊ के संस्कृति स्कूल चलाया ही नहीं। भाजपा सरकार शिक्षा विरोधी है। पढ़ाई लगातार महंगी होती जा रही है। इतनी महंगाई में गरीब अपने बच्चों को कै से पढ़ा पाएगा?


    समाजवादी सरकार ने शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और रोजगार परख बनाने की दिशा में काम किया था। प्रदेश में 18 लाख छात्र-छात्राओं को लैपटॉप बांटे। लैपटॉप को गरीब और सामान्य परिवारों के छात्रों तक पहुंचाकर भेदभाव खत्म किया। कोविड के समय उसी लैपटॉप ने सबसे ज्यादा काम किया। भाजपा सरकार के पास झूठे वादे और प्रोपेगंडा के सिवाय कुछ नहीं है। इस सरकार की गलत नीतियों से शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। समाजवादी सरकार ने शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उनका वेतन बढ़ाया था। शिक्षामित्रों को वेतन मिलने लगा था लेकिन भाजपा सरकार ने उनके साथ अन्याय किया। शिक्षकों को फिर से शिक्षामित्र बनाकर मानदेय पर कर दिया। पिछले दस सालों शिक्षामित्रों को मामूली मानदेय देकर प्रताड़ित करती रही। अवसाद और तंगी के कारण सैकड़ों शिक्षामित्रों की मौत हो गयी। अब चुनावी साल में शिक्षामित्रों के मानदेय को थोड़ा सा बढ़ाकर सरकार ढिढोंरा पीट रही है।समाजवादी सरकार दस साल पहले शिक्षामित्रों को जितना वेतन देती थी भाजपा सरकार बढ़ाने के बाद भी अभी आधा भी नहीं कर पायी है। शिक्षा विभाग की बर्बादी के लिए पूरी तरह से भाजपा सरकार जिम्मेदार है। प्रदेश की जनता और  शिक्षक इस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी।