पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान

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पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान
पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान
राजू यादव

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1973 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए की गई थी। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए गोष्ठी। हर साल एक अलग विषय चुना जाता है, जो पर्यावरण के सामने आने वाली किसी खास चुनौती पर फोकस करता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी हमारा एकमात्र आवास है और इसका संरक्षण करना हमारा सामूहिक दायित्व है।1972 में हुए संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन के बाद 1973 से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण के मुद्दों पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को बल दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल एक विशेष थीम चुनी जाती है, जो किसी खास पर्यावरणीय मुद्दे पर चर्चा को बढ़ावा देती है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति के संरक्षक हैं और एक स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना हमारी ज़िम्मेदारी है। पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान

पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान

प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और मानव जीवनशैली के लिए इनके गलत उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। दूषित पर्यावरण उन घटकों को प्रभावित करता है, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने, प्रकृति और पर्यावरण का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है जिसमें हम रहते हैं। इसमें हमारे चारों ओर के सभी जीवित और निर्जीव तत्व शामिल होते हैं, जैसे कि हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे, जानवर और अन्य जीव-जंतु। पर्यावरण के घटक परस्पर एक-दूसरे के साथ जुड़कर एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं।हालांकि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और मानव जीवनशैली के लिए इनके गलत उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। दूषित पर्यावरण उन घटकों को प्रभावित करता है, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने, प्रकृति और पर्यावरण का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं।

भारतीय आदर्श योग संस्थान ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनेश्वर मिश्र पार्क में पौधारोपण किया। वृक्षारोपण से अधिक महत्वपूर्ण उसका संरक्षण है योगाचार्य के.डी. मिश्रा ने कहा कि एक पेड़ लगाना और उसे तैयार करना लगभग 100 पुत्रों के बराबर है। वहीं राजू यादव ने कहा कि वृक्ष लगाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका संरक्षण करना है। जिस प्रकार से हम अपने बच्चों को 20 साल तक देख-रेख करते हैं ठीक उसी प्रकार से हमें जितने भी पेड़ लगाए कम से कम 5 वर्ष तक उसकी निगरानी करनी चाहिए। वृक्ष मानव जीवन का एक बड़ा आधार है बिना वृक्ष के जीवन संभव नहीं है। इसलिए आज हम सब मिलकर शपथ लेंगे कि अपने जीवन में प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसरों पर एक वृक्ष का रोपण जरूर करेंगे और उसे 5 वर्ष तक देखरेख में रखेंगे।कोशिश यह करना है कि पॉलिथीन का प्रयोग कम कर अपने पर्यावरण को बचाना है। डॉ. प्रतिभा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण के साथ उसके संरक्षण के तरीके भी बताएं और उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन को मानव जीवन की भाँति जीना है तो पर्यावरण को सुरक्षित संरक्षित करना होगा। वृक्षारोपण से ही मानव जीवन सुरक्षित होगा। जिस प्रकार से आज डायनासोर देखना दुर्लभ या नामुमकिन सा हो गया है ठीक उसी प्रकार से ऐसा ना हो जाय कि हम पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं आगे चलकर हमें उस कैटेगरी में आकर खड़ा होना पड़े। डॉ. प्रतिभा ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई सारी बातें बतायी और उन्होंने कहा कि हमें पॉलिथीन के प्रयोग से बचना चाहिए और कोशिश यह करें कि नेचुरल तरीके से जीवन यापन करें। और जहां तक संभव हो सके दैनिक उपयोग की कुछ आवश्यक वस्तु अपने साथ अपने पर्स में लेकर चले जिससे कि पॉलीथिन का प्रयोग कम से कम किया जा सके। पर्यावरण बचाने की कई सारी जैविक तरीके भी बताएं। डॉ. प्रतिभा के जीवन शैली बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण की रही है इसीलिए आज भी वह पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर बच्चे हों या बुजुर्ग सबको कुछ ना कुछ ज्ञान की बातें बताती रहती हैं। पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान

आज हम लोग जिस तरह से बहुत तेजी के साथ अव्यवस्थित ढंग से दुष्प्रभाव के बारे में बिना सोचे समझे आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे है वह उचित नहीं है। हमारे देश में किसी भी प्रकार से प्रकृति व पर्यावरण के साथ सामंजस्य बनाकर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन ना करना आज एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। सभी पक्षों के द्वारा कानून पर्यावरण के सरंक्षण पर होने वाले खर्चों में चोरी छिपे कटौती करके, अत्याधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से प्रदूषण नियंत्रण के नियम कानूनों की अनदेखी करने वाली सोच प्रदूषण कम करने में बहुत बड़ी बाधक है। आज हमारे देश के सारे सिस्टम की सोच देश में स्थापित उधोगों के लिए अपने देश के प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज्यादा दोहन करने की हो गयी है, जिसके चलते हम स्वयं भूमि, जल व वायु को प्रदूषित करके देश को जल्द से जल्द विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की श्रेणी में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। आज और भविष्य में यह स्थिति हम सभी के स्वास्थ्य व पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद घातक है और इस समस्या से हमारे देश के नीतिनिर्माता ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के पर्यावरण प्रेमी भी अवगत और चिंतित है। आज खुद मानव जनित घातक प्रदूषण के चलते मनुष्य व जीव जंतु जिस तरह के प्रदूषित वातावरण में रह रहे है, अगर स्थिति को यही पर समय रहते तत्काल नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में अब तरह-तरह की समस्याओं के चलते स्थिति दिन-ब-दिन बहुत तेजी से खराब होती जायेगी। यह हालात बरकरार रहे तो देश में बहुत सारी जगहों पर पीने योग्य पानी, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु व केमिकल रहित मिट्टी बीते दिनों की बात हो सकती है। देश में हर तरफ प्रदूषण की भयावह हालात होने के बाद आज भी हमारे देश में बार-बार पर्यावरण संरक्षण को लेकर के नियम कायदा-कानूनों के सही ढंग से अनुपालन के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय से बेहद तल्ख टिप्पणी आती है, हमारे देश के सिस्टम को प्रदूषण व पर्यावरण से जुड़े बेहद गंभीर मसलों पर एनजीटी जैसी महत्वपूर्ण शीर्ष संस्था आयेदिन फटकार लगाती रहती है, लेकिन उसके बाद भी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक प्रभावी कदम कागजों की बंद फाईल से निकल कर धरातल पर न जाने क्यों व किसके दवाब में आसानी से कार्यान्वित नहीं हो पाते हैं। सरकार की बात करें तो देश में बेहद तेजी के साथ बढ़ते प्रदूषण के स्तर के बाद भी पर्यावरण संरक्षण के बेहद ज्वलंत मसले पर केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली में प्रदूषण नियंत्रण धरातल पर प्राथमिकता में बिल्कुल भी नजर नहीं आता है। आज हम सभी देशवासियों को समय रहते यह समझना होगा कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर भाषण देकर, फिल्म देखकर, किताब पढ़कर या लेख लिखकर नहीं हो सकता, बल्कि हर भारतवासियों को अपनी प्यारी धरती के प्रति अपनी जिम्मेदारी दिल व दिमाग दोनों से समझनी होगी, तभी भविष्य में धरातल पर प्रदूषण नियंत्रण के कुछ ठोस प्रभाव नजर आ सकेंगे।

योगाचार्य के.डी. मिश्रा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता हानि और कई पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में जागरूक करने का एक खास अवसर है। यह दिन लोगों को पर्यावरण को बचाने के लिए प्रेरित करता है। पर्यावरण स्वस्थ जीवन और ग्रह पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । पृथ्वी विभिन्न जीवित प्रजातियों का घर है और हम सभी भोजन, हवा, पानी और अन्य जरूरतों के लिए पर्यावरण पर निर्भर हैं। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने पर्यावरण को बचाना और संरक्षित करना महत्वपूर्ण है। पर्यावरण हमें उत्पादन के लिए संसाधन प्रदान करता है जिसमें नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधन शामिल हैं। पर्यावरण में सूर्य, जल, वायु और मिट्टी शामिल है जिसके बिना मानव जीवन का अस्तित्व नहीं होगा। यह आनुवंशिक विविधता और जैव विविधता प्रदान करके जीवन को बनाए रखता है।हम पर्यावरण से हैं, पर्यावरण हर किसी के जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पर्यावरण से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। पर्यावरण में सभी मनुष्य, जीव-जन्तु, प्राकृतिक पेड़-पौधे, मौसम, जलवायु सभी समाहित हैं। पर्यावरण न केवल जलवायु में संतुलन बनाए रखने का काम करता है बल्कि जीवन के लिए आवश्यक सभी चीजें भी प्रदान करता है।

विश्व पर्यावरण दिवस एक वैश्विक आयोजन है, जिसे प्रत्येक वर्ष 5 जून को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र (UN) का पर्यावरण के लिए विश्वव्यापी जागरूकता एवं कार्रवाई को बढ़ावा देने का मुख्य माध्यम है। 150 से अधिक देशों में मनाया जाने वाला यह दिन जन जागरण के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है, जो पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं और सरकारों, व्यवसायों, गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्तियों के बीच सहयोग को बढ़ावा प्रदान करता है। 5 जून को विश्वभर में लोगों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के महत्त्व के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है, साथ ही लोगों को पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्काल रूप से एकजुट करने का भी प्रयास किया जाता हैं। “भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा सहनशीलता” थीम के साथ, विश्व 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस 2024 मनाने के लिए तैयार है। जैसा कि वैश्विक समुदाय इस महत्त्वपूर्ण दिन पर पृथ्वी का सम्मान करने और पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आते हैं। पर्यावरण है सबकी जान रखें इसका ध्यान