लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित गरबा गाला 4.0 अब विवादों में घिर गया है। 15 से 19 अक्टूबर के बीच ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी प्रोडक्शन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में स्टॉल बुक कराने वाले कुछ लोगों ने आयोजकों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। गरबा गाला 4.0 के आयोजकों पर धोखाधड़ी के आरोप। स्टॉल बुक कराने वालों ने लाखों रुपये लेने का लगाया आरोप।पीड़ितों का कहना है कि भारी भीड़ और बेहतर कारोबार का भरोसा देकर स्टॉल बुकिंग के नाम पर उनसे अलग-अलग रकम वसूली गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या कारोबार के सुनहरे सपने दिखाकर स्टॉल संचालकों को गुमराह किया गया?
अजय सिंह
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में 15 से 19 अक्टूबर के बीच आयोजित गरबा गाला 4.0 को लेकर विवाद सामने आया है। ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी प्रोडक्शन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में स्टॉल बुक कराने वाले कुछ लोगों ने आयोजकों पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने और कारोबार के बेहतर अवसर मिलने का भरोसा दिलाकर स्टॉल बुकिंग के नाम पर अलग-अलग रकम वसूली गई।
आरोप लगाने वाले लोगों के मुताबिक, स्टॉल बुक कराने के लिए किसी से 25 हजार रुपये, किसी से 50 हजार रुपये तो कुछ लोगों से लाखों रुपये तक लिए गए। स्टॉल संचालकों का कहना है कि उन्होंने आयोजन में अच्छी बिक्री और मुनाफे की उम्मीद से पैसे लगाए थे। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की बात कही गई थी, जिसके आधार पर उन्होंने स्टॉल बुक कराने का निर्णय लिया।
स्टॉल बुक कराने वाले लोगों का आरोप है कि आयोजन से पहले उन्हें जो उम्मीदें दिखाई गई थीं, उन्हें लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि स्टॉल के लिए मोटी रकम खर्च करने के बाद उन्हें नुकसान की आशंका सता रही है। इसी को लेकर कुछ स्टॉल संचालकों ने आयोजन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
इस मामले में अलग-अलग लोगों से अलग-अलग राशि लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, कितने लोगों ने स्टॉल बुक कराए, कुल कितनी रकम वसूली गई और वास्तविक रूप से कितने लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मामले में आयोजकों का पक्ष, आरोपों के संबंध में उनका जवाब और किसी पुलिस शिकायत या कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
————-हालांकि, ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।



