संसद का सदन चलाने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की
राजेन्द्र चौधरी   अखिलेश यादव ने कहा है कि ‘एक देश-एक चुनाव’ का फ़ैसला सच्चे लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा। ये...
जय श्री राम का नारा उत्तेजक नहीं श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है-योगी
संभल में कई मस्जिदों पर अवैध सब स्टेशन बनाकर फ्री कनेक्शन बांटे गए थे। प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन का लाइनलॉस 30 से कम, लेकिन...
कुंदरकी की जीत संविधान की जीत-योगी
कुंदरकी की जीत संविधान की जीत है। शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री ने रखा सरकार का पक्ष। उप्र अकेला राज्य, जिसने बुलडोजर की कार्रवाई को...
जी एल बजाज कालेज में पुलिस पाठशाला आयोजित
अजय सिंह लखनऊ। नोएडा ग्रेटर नॉएडा स्थित जी एल बजाज कॉलेज में "पुलिस की पाठशाला" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के...
विधानमंडल से प्रारंभ होता है यूपी के विकास, सुरक्षा, समृद्धि का रास्ता।मुख्यमंत्री ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले पत्रकारों से की वार्ता ।सरकार...
सेवा बनाम मेवा
विजय गर्ग  सम्मान अच्छे कार्यों की स्वीकृति होकर व्यक्ति की प्रशंसा का परिचायक है। अच्छी उपलब्धि और हितकारी कार्य करनेवाले के कार्य का एक सकारात्मक...
महाकुम्भ के साथ विकास को नई दिशा देंगे प्रधानमंत्री
महाकुम्भ के साथ ही प्रयागराज के विकास को भी नई दिशा देंगे प्रधानमंत्री मोदी। प्रयागराज में करीब 7000 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे...
विद्याथियों के लिए गीता का महत्व
डा. विनोद बब्बर  गीता केवल हमारे लिए नहीं, सम्पूर्ण विश्व के लिए है। मानवमात्र की हित चिंतक है गीता। उसे किसी काल विशेष से भी बांधा नहीं जा सकता क्योंकि सर्वकालीन है गीता।हर युग, हर देश, हर परिवेश, हर समाज, हर आयु वर्ग के समक्ष चुनौतियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती हैं। कुछ लोग इन चुनौतियांे के समक्ष घुटने टेक देते हैं परंतु अधिकांश उनसे पार पाने का प्रयास करते हैं। न जाने क्यों, कर्म करने का उतना तनाव नहीं, जितना कर्म फल का होता है।  कुछ तनावग्रस्त होते हैं तो कुछ तनावों पर नियंत्रण करते हुए केवल कर्म करते रहने के संकल्प पर दृढ़ रहते हैं।एक विद्यार्थी के लिए भी गीता का महत्व है। आज की शिक्षा प्रणाली में किसी भी विद्यार्थी की योग्यता, प्रतिभा को मांपने का एकमात्र तरीका परीक्षा में प्राप्त अंक हैं। अतः यह स्वाभाविक ही है कि परीक्षा, विशेष रूप से बोर्ड की परीक्षा में पहली बार भाग लेने वाले छात्रों की दशा अर्जुन जैसी होती है। पहली बार अपने विद्यालय से दूर, बिल्कुल अलग परिवेश, चारों ओर औपचारिकता जैसी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक निश्चित समय में अधिकतम अंक प्राप्त करने की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतरे एक किशोर की व्यथा को समझना मुश्किल नहीं है। नये तरह के ढेरो प्रश्न।  अधिकांश के उत्तर वह जानता है लेकिन उलझ जाता है कि किसे पहले? लेकिन कैसे आदि-आदि। उसे स्वयं की स्मरण शक्ति और क्षमता पर संदेह होने लगता है। तनावग्रस्त छात्र परेशान होता है क्योंकि वह नहीं जानता कि महात्मा गांधी ने कहा है, ‘जब शंकाएं मुझ पर हावी होती हैं, और निराशाएं मुझे घूरती हैं, आशा की कोई किरण नजर नहीं आती, तब मैं गीता की ओर देखता हूं।’प्रतियोगिता, परीक्षा और तनाव के संबंध में सभी जानते हैं। सबने अपने अपने समय में इसका अनुभव अवश्य किया है। तनाव होना तब तक सामान्य बात है जब तक तनाव का स्तर सामान्य रहे। असामान्य तनाव का अर्थ है- हमारी अपनी बुद्धि ही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन हो जाये।बस इस संतुलन को बरकरार रखने की कला हमें गीता से ही मिल सकती है। वह शिक्षा व जीवन में व्यावहारिक बनने की प्रेरणा देती है। आज के प्रतियोगी जीवन में हमें एक प्रेरक चाहिए। जो हमें समय प्रबंधन सिखाये, तनाव नियंत्रण के गुर बताये। श्रीकृष्ण एक महान प्रेरक हैं। और उनके श्रीमुख से प्रवाहित गीताज्ञान अज्ञान के अंत के लिए ही है। सोशल मीडिया, स्मार्ट फोन, इंटरनेट आदि की तकनीकी तो अभी आई हैं लेकिन महाभारत काल में भी इसकी झलक मिलती है। परिस्थितियां प्रमाण है कि ‘टेलीपैथी’, ‘दिव्यदृष्टि’ प्राप्त की जा सकती है अगर हम अपने कर्तव्यों को लेकर गंभीर रहें, आत्मविकास करें। यही बात एक विद्यार्थी को समझनी है कि गीता हमें स्मार्ट बनना सिखाती है। ऐसा होकर ही हम अपने जीवन की मूर्खताओं को पहले ढकते हैं और फिर अनुभव से उनसे छुटकारा पाते हैं।  कृष्ण कोई और नहीं, बल्कि हमारी चेतना है और तनावों, शंकाओं, विकारों से घिरा हमारा मन अर्जुन है। जो प्रश्न तब थे, वही अब भी हैं। हमारे हर सवाल का जवाब हमारे विवेक के पास है लेकिन विवेक सोया है, तो जवाब नहीं मिल सकता। गीता विवेकवान बनाती है। जिसका विवेक जागृत हो जाता है, उसका जीवन सफलता और प्रेरणा का गीत बन जाता है।श्रीमद्भगवद् गीता हमें स्वयं में विश्वास और ईश्वर में आस्था की प्रेरणा देते हुए सिखाती है कि हमें मैदान छोड़कर भागना नहीं है, बल्कि रचनात्मक बनना है। परिणाम का तनाव छोड़कर अपने कर्तव्य पथ पर चलते रहने वाला ही जीवन का आंनद प्राप्त करता हैं। तकनीक के विकास को अपना विकास मानने के कारण ही तो हम अपना आंतरिक विकास करना भूल गये है। इसी कारण किशोर छात्र के सामने काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर और अहंकार रूपी भाव तो हैं ही, अपसंस्कृति, नशा, कामुकता, विदेशी शक्तियों के भ्रमजाल, देशद्रोही विचारधारा जैसे अनेक शत्रु प्रलोभन और आकर्षण के साथ विद्यमान हैं। आज भी एक अपरिपक्व युवा उस अर्जुन की तरह उन्हें अपना मानते हुए उनसे युद्ध करने को सहज तैयार नहीं है। उसे इस फिसलन भरे वातावरण से निकलने और बचाने का काम श्रीमद् भागवत गीता ही कर सकती है।विश्व के श्रेष्ठ ग्रंथों में शामिल गीता, न केवल सबसे ज्यादा पढ़ी, बल्कि कही और सुनी भी जाती है। द्वितीय अध्याय का 47 वां और सबसे अधिक प्रचलित श्लोक है-कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।चतुर्थ अध्याय का 39 वां श्लोक कहता है-श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः। ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के दसवें अध्याय के 20वें श्लोक में कहा है - अहमात्मा...
सशक्त भारत निर्माण के लिए स्वस्थ भारत का होना जरूरी
’सशक्त भारत’ के निर्माण के लिए ‘स्वस्थ भारत’ का होना जरूरी। आयुष्मान वय वंदना कार्ड वितरण समारोह में बोले मुख्यमंत्री। हर नागरिक की आरोग्यता...
प्रदूषण से बढ़ता कैंसर का जोखिम
विजय गर्ग  भारत में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत हिस्सा कैंसर का है। हाल ही में 'द लांसेट' में प्रकाशित एक...

भाजपा राज में कलाकारों को असुरक्षा-अखिलेश यादव

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राजेन्द्र चौधरी लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर 27 मार्च 2021 को विश्व...

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सहारा में फंसे निवेशकों के लिए बड़ी राहत!

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सहारा में फंसे निवेशकों के लिए बड़ी राहत! 10 लाख तक क्लेम करने का फिर से मिला गोल्डन चांस। सालों से अपनी गाढ़ी कमाई की...
राजस्थान के डिस्टर्ब्ड एरिया बिल पर राजनीति 

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लखनऊ। राजस्थान की राजनीति इन दिनों एक ऐसे प्रस्तावित कानून के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसने सत्ता, विपक्ष, समाज और प्रशासन सभी को आमने-सामने...
विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता

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तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप कल्चर, डिजिटल क्रांति और वैश्विक निवेश के बीच भारत खुद को नए अवसरों की भूमि के रूप में स्थापित...
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता को मिली नई अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

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प्रमोद तिवारी को देश के वैश्विक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम संसदीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। ओम बिरला...
भाजपा को उत्तर प्रदेश में हराना जरूरी-अखिलेश यादव

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अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा को उत्तर प्रदेश में हराना जरूरी है। भाजपा को हराना मतलब यूपी को बचाना। बीजेपी सरकार ने...