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एक अनदेखा श्रम, एक चुप संघर्ष
डॉ. प्रियंका सौरभ
समाज में कुछ धारणाएँ इतनी गहरी पैठ बना लेती हैं कि वे सवालों से परे सत्य मान ली जाती हैं। “अध्यापिका की...
ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी
ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी,सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की...
प्रकृति, धन और स्वास्थ्य: एक संतुलित दृष्टिकोण
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान प्रकृति से दूर, धन के पीछे और स्वास्थ्य को नजरअंदाज करता नजर आता है। लेकिन क्या सच...
सृजन, सुविधा और नकल की नई संस्कृति
डिजिटल दौर में सृजन, सुविधा और नकल की एक नई संस्कृति तेजी से आकार ले रही है। जहां एक ओर तकनीक रचनात्मकता को नई...
चुनाव के बाद चुप्पी: क्या राइट टू रिकॉल समय की मांग है?
चुनाव खत्म होते ही नेता जनता से दूर और जनता सवालों के साथ अकेली—क्या यही लोकतंत्र की असली तस्वीर है? पाँच साल तक वादों...


















