Tuesday, February 17, 2026
Advertisement
Home राजनीति भीमराव अम्बेडकर ने मांगा अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण

भीमराव अम्बेडकर ने मांगा अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण

290

चौ.लौटनराम निषाद

साल 1935 के भारत सरकार अधिनियम में आरक्षण का प्रावधान किया गया था।भारत सरकार अधिनियम-1937 में अछूत व जंगली जातियों के अछूत पिछड़ी जाति व आदिम पिछड़ी जाति के लिए समानुपातिक कोटा राजनीति में प्रतिनिधित्व के लिए किया गया। 1942 में बी. आर. अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों की उन्नति के समर्थन के लिए अखिल भारतीय दलित वर्ग महासंघ की स्थापना की। उन्होंने सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग की। 1946 के कैबिनेट मिशन प्रस्ताव में अन्य कई सिफारिशों के साथ आनुपातिक प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव दिया गया था। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हो गया। भारतीय संविधान में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान करते हुए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की उन्नति के लिए संविधान में विशेष धाराएं रखी गई हैं। इसके अलावा 10 सालों के लिए उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए अलग से निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए गए थे, जिसे हर दस साल के बाद सांविधानिक संशोधन के जरिए इन्हें बढ़ा दिया जाता है।संविधान लागू होने के बाद 10 अगस्त,1950 को राष्ट्रपति की प्रथम अधिसूचना के द्वारा अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों को जनसँख्या अनुपात में क्रमशः 15 प्रतिशत व 7.5 प्रतिशत आरक्षण कोटा दे दिया गया।