अखिलेश-जयंत का सीटों को लेकर मंथन 40 सीटों पर फाइनल….!

लखनऊ में अखिलेश यादव से मिलने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट पहुंचे, दोनों नेताओं के बीच करीब 2 घंटे बातचीत हुई। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 143 सीटों पर मंथन हुआ।माना जा रहा है कि मुलाकात में सीटों के बंटवारे पर फाइनल बातचीत होगी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में यह तय होगा कि जाट लैंड में आरएलडी और सपा कौन-कौन सी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बैठक के बाद ही तय होगा कि गठबंधन में पार्टी को कितनी सीट सपा दे रही है।

करीब एक महीने पहले जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच विधानसभा को लेकर मुलाकात हुई थी। इसमें जयंत चौधरी ने 45 सीटों की मांग रखी थी। अखिलेश इस पर तैयार नहीं हुए थे। लिहाजा बात 40 सीटों तक पहुंच गई। इस पर सहमति बन गई है। 36 सीटों पर जयंत चौधरी अपने सिंबल हैंडपंप पर उम्मीदवार उतारेंगे। 4 सीटों पर जयंत के उम्मीदवार सपा के सिंबल साइकिल पर चुनाव मैदान में होंगे।

उत्तर प्रदेश के वेस्ट में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ के छह मंडल में 26 जिले हैं, जहां 136 विधानसभा सीटे हैं और इन सीटों पर जाटों का खासा प्रभाव है और वही निर्णायक भूमिका निभाते आये हैं। जयंत चौधरी की निगाह इन्हीं सीटों पर है और वे चाहते थे कि इनमें से अधिकांश सीटों पर आरएलडी के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ें, ऐसे में पश्चिमी यूपी की इन्हीं सीटों पर आरएलडी चुनावी ताल ठोंकने की तैयारी है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश आरएलडी का गढ़ है, लेकिन पिछले 10 साल में हुए चुनावों के नतीजे पार्टी के लिए बेहद निराशाजनक रहे हैं। यही वजह है कि जयंत के लिए अखिलेश से 40 सीटें लेना आसान नहीं होगा। पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 277 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 266 जमानत जब्त हो गई थी। एकमात्र उम्मीदवार सहेंदर सिंह रमाला को छपरौली विधानसभा सीट से जीत मिली थी।2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद आरएलडी का प्रदर्शन बेहद निराशा जनक रहा। पार्टी के सभी उम्मीदवार हार गए। खुद चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी मुजफ्फरनगर और बागपत लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे।

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