
आजीविका मिशन से बदली महिलाओं की तकदीर। ‘कृष्णा आजीविका समूह’ बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल।आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में ‘कृष्णा आजीविका समूह’ महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरा है। समूह से जुड़ी महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनते हुए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि समाज में भी अपनी एक नई पहचान बनाई है। यह पहल दिखाती है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं अपने परिवार और समाज दोनों की तस्वीर बदल सकती हैं।
बिन्दु सुनील
भोपाल। संकल्प मजबूत हो और साथ में सामूहिक प्रयास जुड़ जाए तो सीमित संसाधन भी बड़ी सफलता की कहानी लिख सकते हैं। बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के ग्राम कुल्पा की 13 महिलाओं ने यही कर दिखाया है। कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह से जुड़कर इन महिलाओं ने न केवल इनके जीवन में खुशहाली आई है, बल्कि पूरे गांव में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी कायम हुई है।
कुछ वर्ष पहले जब इन महिलाओं ने समूह की शुरुआत की थी, तब उनके पास संसाधन कम थे लेकिन हौसले बुलंद थे। अनुशासन, एकजुटता और नियमित बचत को आधार बनाकर उन्होंने समूह को मजबूत किया। नियमित बैठकें, हर माह बचत, समय पर ऋण वापसी और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया ने समूह को आगे बढ़ने की शक्ति दी।
समूह को क्रमशः द्वितीय सीसीएल में 2 लाख और तृतीय सीसीएल में 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से महिलाओं ने बकरी पालन, जनरल स्टोर्स, पान दुकान, सब्जी उत्पादन, ऑनलाइन सेंटर और ट्रैक्टर खरीद जैसे कई छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए। इन प्रयासों ने न केवल उनकी आय बढ़ाई, बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी सृजित किए।

चतुर्थ सीसीएल के रूप में फिर 3 लाख रुपये की सहायता मिली, जिससे महिलाओं ने अपने व्यवसायों का विस्तार किया। इसके साथ ही ग्राम संगठन से 1 लाख 10 हजार रुपये की CIF राशि भी प्राप्त हुई, जिसका उपयोग कृषि और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया गया।आज समूह की कई महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वछला दशहरे दीदी की मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये, पुस्तकला वर्मा दीदी की 25 हजार रुपये, रामबती दमाहे और इमला शेंडे दीदी की लगभग 15 हजार रुपये तथा विमला नागपुरे दीदी की लगभग 8 हजार रुपये हो गई है। अन्य सदस्य भी बकरी पालन और कृषि कार्य से 4 से 5 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त कर रही हैं।
इस समूह की सबसे प्रेरणादायक कहानी नीरा दशहरे की है। उन्होंने समूह से मिले सहयोग और ऋण का उपयोग अपनी तीनों बेटियों की शिक्षा में किया। आज उनकी तीनों बेटियां नौकरी कर रही हैं और लगभग 1 लाख रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं। ग्राम कुल्पा की ये महिलाएं आज यह साबित कर रही हैं कि जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की नई रोशनी भी फैला सकती हैं।













