

24 दिन में चार फरारी फिर भी नहीं जागे जेल अधिकारी। अधीक्षक के बजाए अधीक्षक की पत्नी चला रही आगरा जेल। आगरा जिला जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने जेल प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक बंदी से गिनती कटवाने के नाम पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई।बेतहाशा वसूली से आक्रोश, जेल में कभी भी हो सकता बवाल।आगरा जिला जेल में बंदी से गिनती कटवाने के मांगे एक करोड़!
लखनऊ। 24 दिन में चार फरारी फिर भी नहीं जाग रहे जेल अधिकारी…आगरा जिला जेल अधिकारियों पर फरारी की घटनाओं के बाद भी कोई असर नहीं दिखाई पड़ रहा है। बेखौफ जेल अधिकारियों ने गिनती कटवाने और मशक्कत के लिए एक करोड़ रुपए की मांग की। यही नहीं इस जेल में जेल अधीक्षक के बजाए उनकी पत्नी जेल चला रही हैं। सुरक्षाकर्मियों को अवकाश देने से लेकर ड्यूटी लगाने का काम इन्हीं के हाथों में है। उधर जेल अधिकारियों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।
बीती पांच जनवरी को कन्नौज जेल से सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर दो बंदी जेल की चहारदीवारी फांद कर फरार हो गए। इस घटना को हुए अभी एक पखवारा भी नहीं बीत पाया था कि अयोध्या मंडलीय जेल से भी दो बंदी फरार हो गए। कन्नौज जेल में फरारी के लिए जेलर समेत दस लोगों को और अयोध्या जेल घटना के लिए वरिष्ठ अधीक्षक समेत 11 लोगों को निलंबित किया गया। अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर हुई इस कार्यवाही का आगरा जेल अधिकारियों पर कोई असर दिखाई नहीं पड़ा। बेखौफ अधिकारी इसके बाद भी बंदियों से वसूली करने में जुटे हुए है।
सूत्रों का कहना है कि बीते दिनों क्रिप्टो करेंसी मामले में पुलिस ने विनोद स्वामी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जेल पहुंचते ही अधिकारियों ने बंदी का शोषण शुरू कर दिया। सूत्रों की माने तो बंदी विनोद स्वामी से मशक्कत के लिए एक करोड़ रुपए की मांग की। मांग नहीं पूरी होने पर बंदी को सफाई कमान (नालियों की गंदगी साफ करने) में लगाने की धमकी भी दी गई। यही नहीं बताया गया है कि जेल अधीक्षक जेलर नहीं अधीक्षक की पत्नी चला रही है। सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाने से लेकर अवकाश देने और कैंटीन की कमाई का हिसाब किताब रखने की जिम्मेदारी भी जेल अधीक्षक की पत्नी के हाथों में हैं। पत्नी के हाथों में कमान होने का मामला जेलकर्मियों के चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर इस संबंध में जब आगरा जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन नहीं उठा। मैसेज का भी जवाब देना उन्होंने मुनासिब नहीं समझा। परिक्षेत्र डीआईजी पी एन पांडेय ने भी फोन नहीं उठाया।
कब होगी आगरा जेल के भ्रष्टाचारी अफसर पर कार्रवाई
बीते सितंबर माह में हिंदू सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि आगरा जेल में अधीक्षक और जेलर ने लूट मचा रखी है। जेल में बंदियों से प्रतिदिन पांच से सात लाख रुपए की अवैध वसूली की जा रही है। मशक्कत के नाम पर बंदियों से छह हजार से कई लाख तक की वसूली की जा रही है। बंदियों के कल्याण के लिए संचालित की जा रही कैंटीन तो अफसरों की कमाई का मुख्य स्रोत बन गई है। कैंटीन की बिक्री में बढ़ोत्तरी करने के लिए जेल में बंदियों को घटिया भोजन परोसा जा रहा है।
कैंटीन में जेल के बाहर आसानी से 15 रुपए में मिलने वाली खाद्य सामग्री को 50 से 60 रुपए में बेचा जा रहा है। जेल में प्रवेश की प्रतिबंधित वस्तुओं की कालाबाजारी की जा रही है। पान, बीडी, मसाला, सिगरेट, तंबाकू, गांजा, चरस और ब्लेड को अनाप शनाप दामों पर बेचा जा रहा है। शिकायत पर प्रमुख सचिव कारागार ने भी किसी भी भ्रष्ट जेल अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।























