भ्रष्ट कार्मिक को थप्पड़ मारना गरिमा के अनुरूप नहीं Slapping corrupt personnel is not in line with dignity

भ्रष्ट कार्मिक को थप्पड़ मारना सांसद सीपी जोशी की पद के गरिमा के अनुरूप नहीं।

एस0 पी0 मित्तल

जब कोई कार्मिक जायजा काम करने के लिए भी रिश्वत मांगता है तो ऐसे कार्मिक पर बहुत गुस्सा आता है। जब किसी गरीब व्यक्ति से रिश्वत मांगी जाती है तो गुस्सा और बढ़ जाता है। रिश्वतखोर कार्मिक पीड़ित व्यक्ति की गरीबी का भी ख्याल नहीं रखता। राजस्थान के चित्तौड़ जिले में अफीम की खेती होती है। इसके लिए किसानों को जिला अफीम कार्यालय से खेती करने का लाइसेंस लेना होता है। कई बार भूमि के नामांतरण के लिए भी अनुमति लेनी होती है। गरीब किसानों को लाइसेंस देने और नामांतरण के नाम पर रिश्वत ली जाती है। जिला अफीम कार्यालय में रिश्वत लेना आम बात है। रिश्वत की शिकायतों के मद्देनजर ही चित्तौड़ के भाजपा सांसद सीपी जोशी प्रतापगढ़ के जिला अफीम कार्यालय का जायजा लिया। अनुबंध पर काम करने वाले एक कार्मिक से जब सांसद जोशी ने पूछा की लाइसेंस देने के किसानों से कितनी राशि वसूली जा रही है तो उसने सहज भाव से कहा कि पांच हजार रुपए प्रति लाइसेंस। इस पर सांसद जोशी को गुस्सा आ गया और उन्होंने एक थप्पड़ संबंधित कार्मिक को मार दिया। हालांकि जोशी का यह गुस्सा एक गरीब किसान के गुस्से की तरह था, लेकिन जोशी सांसद के जिस पद पर हैं उसे देखते हुए जोशी को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था।

आखिर जोशी 10 लाख से भी ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में उन्हें अपने पद की गरिमा का ख्याल रखना ही चाहिए। जहां तक प्रतापगढ़ के जिला अफीम कार्यालय में रिश्वतखोरी का सवाल है तो अकेले एक कार्मिक की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि वह प्रति लाइसेंस पांच हजार रुपए की वसूली करे। सांसद जोशी को यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करनी ही है तो उन बड़े अधिकारियों का पता लगाना चाहिए जिनके संरक्षण में अनुबंधित कार्मिक रिश्वत ले रहा है। असल में थप्पड़ खाने वाला कार्मिक तो रिश्वत की राशि को एकत्रित करने वाला है। रिश्वत की मोटी राशि अफीम कार्यालय में ऊपर तक बटती है। क्योंकि थप्पड़ मारने का वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, इसलिए इस मामले में तूल पकड़ लिया है। हो सकता है कि एक दो दिन में सांसद के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो जाए और सांसद को भी माफी मांगनी पड़े। लेकिन अच्छा हो कि इस थप्पड़ कांड के बाद अफीम कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगे। गरीब किसानों को बिना रिश्वत के ही लाइसेंस मिलने चाहिए।

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