Tuesday, May 5, 2026
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योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

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योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी, जिनका सीधा असर प्रदेश के विकास, रोजगार और आम जनता की सुविधाओं पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए ये निर्णय राज्य को नई दिशा देने की ओर बढ़ते कदम माने जा रहे हैं।

वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम (OTD सी0एम0 फेलो) के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम (OTD सी0एम0 फेलो) के संचालन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम (OTD CM Fellow) का उद्देश्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 01 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुँचाने के लक्ष्य में जिला स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना है। इसके दृष्टिगत प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला OTD सेल की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए 01 OTD Fellow (आर्थिक विकास) एवं 01 OTD Fellow (डेटा विश्लेषक) को OTD CM Fellow के रूप में आबद्ध किये जाने का निर्णय लिया गया है।


फेलो विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर कृषि, उद्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार तथा जिला घरेलू उत्पाद (DDP) से सम्बन्धित संकेतांकों की नियमित समीक्षा किये जाने में सहयोग करेंगे तथा डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए मासिक एवं त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस हेतु नियोजन विभाग द्वारा विकसित डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग एवं KPI आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक एवं परिणामोन्मुख बनेगी। OTD CM Fellow हेतु सम्बन्धित विषयों में परास्नातक उपाधि की पात्रता एवं अधिकतम 40 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है, जबकि अनिवार्य अर्हता की उपाधि में निर्धारित प्रतिशत, शोध प्रकाशन एवं प्रासंगिक अनुभव को अधिमान दिया जायेगा। चयनित फेलो को 50,000 रुपये प्रतिमाह पारिश्रमिक, लैपटॉप, यात्रा भत्ता एवं आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम प्रारम्भिक रूप से एक वर्ष के लिए होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर नवीनीकृत किया जा सकेगा।


कार्यक्रम के अंतर्गत OTD CM फेलो का चयन स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एस0टी0सी0), उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाएगा। चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा (50 अंक) अधिमानी अर्हता (30 अंक) $ साक्षात्कार (20 अंक) त्र कुल 100 अंक। प्रारम्भिक कार्यकाल 01 वर्ष (प्रदर्शन आधारित नवीनीकरण)। OTD CM फेलो द्वारा स्थानीय संसाधन, सम्भावनाओं एवं निवेश अवसरों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित विकास रणनीतियां तैयार करने में जिला व्ज्क् सेल को सहयोग प्रदान किया जायेगा, जिससे विभिन्न अन्तर्निहित विभागीय योजनाओं के बेहतर प्राथमिकता निर्धारण एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रदेश के 150 राजकीय विद्यालयों में नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लि0 (टाटा उद्यम) के सहयोग से DREAM Skill Labs की स्थापना के सम्बन्ध में

प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में नवीन तकनीकी ज्ञान/पाठ्यक्रमों को समाविष्ट कर उद्योग जगत की वर्तमान एवं भावी तकनीकी आवश्यकताओं की पूर्ति के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने 150 राजकीय विद्यालयों में नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लिमिटेड (टाटा उद्यम) के सहयोग से DREAM (Design, Robotics, Electronics, Additive, Manufacturing) Skill Labs की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत प्रत्येक जनपद के 02 राजकीय विद्यालयों में 01-01 क्लस्टर, अर्थात 150 क्लस्टर को DREAM Skill Labs के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस सम्बन्ध में विभाग व नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लिमिटेड के मध्य हस्ताक्षरित किए जाने वाले मेमोरेण्डम ऑफ एग्रीमेण्ट के आलेख को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है।


प्रथम चरण में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रत्येक मण्डल मुख्यालय में 01 क्लस्टर अर्थात 18 क्लस्टर में DREAM Skill Labs स्थापित की जाएगी। 01 क्लस्टर में 01 राजकीय इण्टर कॉलेज/राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज ‘हब’ होगा एवं उसके संगत निकटस्थ 03 राजकीय विद्यालय ‘स्पोक्स’ होंगे। DREAM Skill Labs की स्थापना से छात्र-छात्राओं को वर्तमान एवं भविष्य की तकनीकी व औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल एवं गुणवत्तायुक्त तकनीकी शिक्षण-प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा। इससे राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सरकारी व निजी क्षेत्र की कम्पनियों/इकाइयों में प्लेसमेण्ट व सेवायोजन के बेहतर अवसर मिलेंगे।

सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्षिक स्थानान्तरण नीति 2026-27 स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्षिक स्थानान्तरण नीति 2026-27 को स्वीकृति प्रदान की है। यह स्थानान्तरण नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए है। स्थानान्तरण 31 मई, 2026 तक किये जाएंगे। समूह ’क’ एवं समूह ’ख’ के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में सम्बन्धित जनपद में कुल 03 वर्ष पूर्ण कर चुके हों, को उक्त जनपदों से स्थानान्तरण किये जाने की व्यवस्था एवं समूह ’क’ एवं समूह ’ख’ के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में एक मण्डल में 07 वर्ष पूर्ण कर चुके हों, को उक्त मण्डल से स्थानान्तरित कर दिया जाएगा।विभागाध्यक्ष/मण्डलीय कार्यालयों में की गयी तैनाती अवधि को स्थानान्तरण हेतु उक्त निर्धारित अवधि में नहीं गिना जाएगा। मण्डलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम अवधि 03 वर्ष होगी तथा इस हेतु सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के स्थानान्तरण प्राथमिकता के आधार पर किये जाने की व्यवस्था की गयी है।

समूह ’क’ एवं ’ख’ के स्थानान्तरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत एवं समूह ’ग’ एवं समूह ’घ’ के कार्मिकों के स्थानान्तरण संवर्गवार कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा तक किए जा सकेंगे।

समूह ’ग’ हेतु पटल परिवर्तन/क्षेत्र परिवर्तन के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश संख्या-8/2022/सा0-119/सैंतालिस-4-2022-(1/3/96) दिनांक 13 मई, 2022 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने की व्यवस्था की गयी है। समूह ’ख’ एवं समूह ’ग’ के कार्मिकों के स्थानान्तरण यथासम्भव मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गयी है।


मंदित बच्चों/चलन क्रिया से पूर्णतया प्रभावित दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किए जाने की व्यवस्था की गयी है, जहाँ उनकी उचित देखभाल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। भारत सरकार द्वारा घोषित प्रदेश के 08 आकांक्षी जनपद व 34 जनपदों के 100 आकांक्षी विकास खण्डों में तैनाती संतृप्तीकरण किए जाने की व्यवस्था की गयी है। स्थानान्तरण सत्र की अवधि की समाप्ति के उपरान्त समूह ‘क’ एवं समूह ‘ख’ के कार्मिकों के सम्बन्ध में विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री जी का अनुमोदन प्राप्त कर स्थानान्तरण किया जा सकेगा।

उ0प्र0 ई-साक्ष्य प्रबन्धन नियम-2026, उ0प्र0 इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका (निर्गतीकरण, तामीला तथा निष्पादन) नियम-2026 तथा उ0प्र0 सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस-2026 अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने पूर्व में अधिसूचित उत्तर प्रदेश ई-साक्ष्य प्रबन्धन नियम-2026, उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका (निर्गतीकरण, तामीला तथा निष्पादन) नियम-2026 तथा उत्तर प्रदेश सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस-2026 से सम्बन्धित दिशा-निर्देशों को संज्ञान में लेते हुए उक्त को अनुमोदित कर दिया है। नवीन न्याय संहिताओं यथा भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ई-साक्ष्य, ई-समन एवं सामुदायिक सेवा से सम्बन्धित विषयगत मॉडल नियम/गाइडलाइंस माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की सहमति से तैयार किए गए हैं।


उत्तर प्रदेश ई-साक्ष्य प्रबन्धन नियम-2026 के माध्यम से डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण एवं न्यायालय में प्रस्तुतीकरण हेतु एक वैज्ञानिक एवं मानकीकृत व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे साक्ष्यों की अखण्डता (Integrity) एवं ‘Chain of Custody’ सुनिश्चित की जा सकेगी। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका (ई-समन) नियम-2026 के अन्तर्गत समन/वारंट के इलेक्ट्रॉनिक निर्गमन, डिजिटल प्रमाणीकरण (e-Sign) तथा ईमेल, मोबाइल एवं मैसेजिंग ऐप के माध्यम से तामीला की व्यवस्था की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तीव्रता, पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित होगी। साथ ही, महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का विशेष प्राविधान भी किया गया है।


उत्तर प्रदेश सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस-2026 के अन्तर्गत छोटे अपराधों के लिए कारावास के विकल्प के रूप में ’सामुदायिक सेवा’ को एक सुधारात्मक दण्ड के रूप में लागू किया गया है, जिससे अपराधियों के पुनर्वास को प्रोत्साहन मिलेगा तथा कारागारों पर भार में कमी आएगी। इसके अन्तर्गत स्वच्छता, वृक्षारोपण, गौ-सेवा, यातायात प्रबन्धन आदि सार्वजनिक कार्यों में सहभागिता का प्राविधान किया गया है।उक्त नियमावलियाँ तथा मार्गदर्शिकाएँ व्यापक महत्व की हैं। इनके सम्बन्ध में मुख्यमंत्री जी द्वारा उक्त के अधिसूचित किए जाने के उपरान्त उक्त नियमों से मंत्रिपरिषद को अवगत कराने के विभागीय प्रस्ताव को अनुमति दी गई थी। अतएव पूर्व में अधिसूचित इन नियमावलियों तथा मार्गदर्शिकाओं को मंत्रिपरिषद के संज्ञान में लाकर अनुमोदित कराया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 35 करोड़ पौधरोपण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 35 करोड़ पौधरोपण हेतु प्रदेश के समस्त शासकीय विभागों/मा0 उच्च न्यायालय परिसरों/कृषकों/संस्थाओं/व्यक्तियांं/निजी एवं शासकीय शिक्षण संस्थाओं/भारत सरकार के विभाग एवं उपक्रम/स्थानीय निकायों यथा-ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, नगर निगम, प्राधिकरण आदि/रेलवे/रक्षा/औद्योगिक इकाइयों/सहकारी समितियों तथा अन्य को सम्बन्धित शासकीय विभागों/संस्थाओं के माध्यम से वन एवं वन्यजीव विभाग की पौधशालाओं से निःशुल्क पौध (यूकेलिप्टस एवं पॉपलर को छोड़कर) उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय भी लिया गया कि निःशुल्क पौध उपलब्धता के सम्बन्ध में भविष्य में किसी संशोधन/परिवर्धन (वित्तीय उपाशय को छोड़कर) की आवश्यकता होने पर मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से उक्त संशोधन/परिवर्धन किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 14 करोड़ पौधों का रोपण वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा किया जाएगा। 21 करोड़ पौधों का रोपण राजकीय विभागों द्वारा जनसहभागिता से किया जाएगा। वृक्षारोपण जन आन्दोलन वर्ष 2026-27 का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषकों की आय में वृद्धि करना है। वन एवं वन्यजीव विभाग की पौधशालाओं में वृक्षारोपण 2026-27 हेतु कुल 50 करोड़ पौध उपलब्ध हैं।
गत वर्ष की भांति वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी वृक्षारोपण में शामिल समस्त शासकीय विभागांं/संस्थाओं/व्यक्तियों को सम्बन्धित शासकीय विभागों/संस्थाओें के माध्यम से वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा निःशुल्क पौध (यूकेलिप्टस एवं पॉपलर को छोड़कर) उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।

उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लि0 की 765/400/220/132 के0वी0 पारेषण लाइनों में लगाए जाने वाले विभिन्न टावरों हेतु कृषकों/भू-स्वामियों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति को ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अंगीकृत किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लि0 द्वारा निर्मित होने वाली 765/400/220/132 के0वी0 पारेषण लाइनों में लगाए जाने वाले विभिन्न टावरों हेतु कृषकों/भू-स्वामियों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति को ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अंगीकृत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय के अन्तर्गत टावर बेस के नीचे 200 प्रतिशत क्षेत्रफल (चारों तरफ 01 मीटर अतिरिक्त के अनुसार) एवं राइट ऑफ वे के कॉरिडोर के 30 प्रतिशत क्षेत्रफल भूमि मुआवजे की लागत की गणना, उस क्षेत्र विशेष के जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार की जाएगी।

वर्तमान में राज्य में पारेषण परियोजनाओं हेतु टावर बेस क्षेत्र के लिए क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा रहा है। तथापि राइट ऑफ वे कॉरिडोर क्षेत्र हेतु पृथक भूमि आधारित क्षतिपूर्ति का कोई प्राविधान प्रभावी नहीं है। इस निर्णय से भू-स्वामियों/कृषकों को भूमि उपयोग प्रतिबन्ध से उत्पन्न आर्थिक प्रभावों हेतु न्यायोचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जा सकेगी। पारेषण परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामाजिक स्वीकृति एवं भूमि उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे पारेषण परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन में सुविधा होगी।

मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/खण्ड पीठ लखनऊ में कार्यरत लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 02 वर्ष के स्थान पर अधिकतम 03 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/खण्ड पीठ लखनऊ में न्यायिक कार्यों के सुगम और सुचारु रूप से संचालन हेतु मा0 न्यायमूर्तिगण के सहायतार्थ सृजित 135 लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट के पदों के सापेक्ष कार्यरत लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 02 वर्ष के स्थान पर अधिकतम 03 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मा0 उच्च न्यायालय में मुकदमों की बढ़ती संख्या के कारण विधिक बिन्दुओं पर कानूनों को तलाशने में मा0 न्यायमूर्तिगण के लगने वाले बहुमूल्य समय की बचत के उद्देश्य से, सुसंगत तथ्य, निर्णयज-विधि को ढूंढकर मा0 मुख्य न्यायाधिपति एवं अन्य मा0 न्यायमूर्तिगण के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु, मा0 न्यायमूर्तिगण के सहायतार्थ सृजित लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट के पदों के सापेक्ष कार्यरत लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट का वर्तमान कार्यकाल 02 वर्ष है।

वर्तमान में 40,000 रुपये प्रतिमाह की दर से प्रति लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट को मानदेय दिया जा रहा है। रिट पिटीशन (सिविल) संख्या-1022/1989 ऑल इण्डिया जजेज एसोसिएशन व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य में मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित अद्यतन आदेश दिनांक 20 मई, 2025 के दृष्टिगत, लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 02 वर्ष के स्थान पर अधिकतम 03 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव है। लॉ क्लर्क (ट्रेनी)/रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 02 वर्ष के स्थान पर अधिकतम 03 वर्ष होने पर उनकी दक्षता, अनुभव व ज्ञान का अधिकतम उपयोग होगा। मा0 न्यायमूर्तिगण को भी कार्य करने में सहजता, आसानी व सुविधा होगी एवं मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा।

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के अन्तर्गत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना हेतु उ0प्र0 सहकारी कताई मिल्स संघ लि0 की 04 मिलों की कुल 251.805 एकड़ भूमि हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के अन्तर्गत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना हेतु उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड की जनपद अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर तथा बिजनौर स्थित निष्प्रयोज्य पड़ी 04 मिलों की कुल 251.805 एकड़ भूमि हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस हेतु रजिस्ट्री डीड सम्बन्धी कार्यवाही उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड तथा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के मध्य सम्पादित की जानी है। चूंकि उपरोक्त भूमि सार्वजनिक प्रयोजन व जनहित में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तान्तरित की जा रही है, अतः मंत्रिपरिषद ने इस पर स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क से छूट प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है।

भारत का वस्त्र उद्योग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का आधार स्तम्भ है, जो औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और व्यापक पैमाने पर रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाता है। वस्त्र उद्योग, विशेषकर महिलाओं सहित, 45 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से तथा लाखों अन्य को अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्रदान करता है। यह उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी0डी0पी0) में लगभग 2 प्रतिशत और कुल औद्योगिक उत्पादन में 11 प्रतिशत का योगदान करता है।


संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्कों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। टेक्सटाइल पार्क के विकास हेतु जनपद वाराणसी के ग्राम रमना एवं नैपुराकलां में 75 एकड़ भूमि का हस्तान्तरण हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को किया गया है, जिस पर टेक्सटाइल पार्क के विकास की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। कताई मिलों की भूमि को लैण्ड बैंक के रूप में संरक्षित किया गया है। इन स्थलों के समीप टेक्सटाइल उद्योग लगाने हेतु अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। बन्द पड़ी इन मिलों की भूमि का उपयोग टेक्सटाइल पार्क के विकास हेतु यदि किया जाता है, तो निजी उद्यमियों द्वारा यहाँ निवेश की सम्भावना बढ़ेगी। इन 04 कताई मिलों के समीप उपलब्ध टेक्सटाइल ईको-सिस्टम व निवेशकों की आवश्यकता का प्रारम्भिक आकलन किया गया है।

झांसी जल संस्थान, झांसी द्वारा झांसी बबीना पेयजल योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में की गयी जलापूर्ति के मद में उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को देय जल मूल्य की बकाया धनराशि के भुगतान के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने झांसी जल संस्थान, झांसी द्वारा झांसी बबीना पेयजल योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में की गई जलापूर्ति के मद में उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को देय जल मूल्य की बकाया धनराशि 17.65 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद बेंच, लखनऊ में योजित विशेष अपील संख्या-391/2025 उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) व अन्य बनाम श्रीमती मनोरमा श्रीवास्तव व 21 में झांसी जल संस्थान, झांसी द्वारा झांसी बबीना पेयजल योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में की गयी जलापूर्ति के मद में उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को देय जल मूल्य 17.65 करोड़ रुपये की बकाया धनराशि के भुगतान के आदेश पारित किये गये हैं। उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) के कार्मिकों/पेंशनरों के वेतन/पेंशन एवं सेवानिवृत्त कार्मिकों के सेवानिवृत्तिक देयकों (ग्रेच्युटी/अवकाश नगदीकरण इत्यादि) का भुगतान इसी धनराशि से किया जाना है, जिसके सन्दर्भ में ही मा0 उच्च न्यायालय में उक्त वाद योजित है। जिला पंचायत राज अधिकारी, जनपद झांसी द्वारा अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से वित्तीय वर्ष 2024-25 (जुलाई-2024 तक) में 07 ग्राम पंचायतों में जल आपूर्ति की गयी।


झांसी बबीना पेयजल योजना से कुल 07 ग्राम पंचायतों यथा सिमरावारी (तिलक नगर), खैलार, मानपुर, सैयर, बबीना रूरल, घिसौली एवं पुरा को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। इन ग्राम पंचायतों को केन्द्रीय वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की पर्याप्त धनराशि प्राप्त नहीं होती है, जिससे वह पेयजल आपूर्ति का बकाया बिल भुगतान नहीं कर पा रही हैं। मा0 न्यायालय के निर्देश का अनुपालन किये जाने एवं सम्बन्धित ग्राम पंचायतों में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध न होने के कारण पूर्व की भांति राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि में से 17.65 करोड़ रुपये को पंचायतीराज निदेशालय स्तर पर रोक कर, झांसी बबीना पेयजल योजना की बकाया धनराशि को उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को हस्तांतरित किया जाना है।


उक्त के दृष्टिगत उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को झांसी बबीना पेयजल योजना के अन्तर्गत पंचायतीराज विभाग की बकाया धनराशि 17.65 करोड़ रुपये दिये जाने हेतु पंचम राज्य वित्त आयोग की वित्तीय वर्ष 2025-26 की अन्तिम किश्त (मार्च, 2026) की धनराशि 900 करोड़ रुपये में से 17.65 करोड़ रुपये उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) के भुगतान हेतु रोक कर, पंचायती राज निदेशालय द्वारा शेष धनराशि 15ः15ः70 के अनुपात में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत को आवंटित कर दी गयी है। अतः रोकी गयी धनराशि 17.65 करोड़ रुपये पंचायतीराज निदेशालय द्वारा उ0प्र0 जल निगम (नगरीय) को हस्तान्तरित किया जाना प्रस्तावित है।

जनपद कुशीनगर में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना हेतु 0.405 हेक्टेयर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तान्तरित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद कुशीनगर में केन्द्र सहायतित योजना के अन्तर्गत नर्सिंग कॉलेज की स्थापना हेतु मौजा रामपुर तप्पा चौरा बड़गाँव परगना सि0जो0 तहसील, तहसील-पडरौना में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के बगल स्थित गाटा संख्या-473/1.054 हेक्टेयर, जो राजस्व अभिलेख में सीलिंग खाते की भूमि दर्ज है तथा पडरौना-कुबेरस्थान मुख्य मार्ग से 500 मीटर दक्षिण स्थित है, में से 0.405 हेक्टेयर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तान्तरित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए नर्सिंग कैडर की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सापेक्ष नर्सिंग कॉलेजों की संख्या सीमित होने के कारण नर्सिंग एजुकेशन को सुदृढ़ करने के लिए नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना आवश्यक एवं अपरिहार्य है।


केन्द्र सहायतित योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को 27 नर्सिंग कॉलेज आवंटित किए गए हैं, जो कि एक कीर्तिमान है। उक्त 27 नर्सिंग कॉलेजों में जनपद कुशीनगर भी सम्मिलित है। भारत सरकार द्वारा प्रति नर्सिंग कॉलेज की लागत 10 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें 60 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 40 प्रतिशत राज्यांश निहित है।
मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से कुशीनगर सहित निकटवर्ती जनपदों के मरीजों को चिकित्सीय उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, प्रदेश के निवासियों को नर्सिंग क्षेत्र में कैरियर बनाने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

400/220 के0वी0, 3×500 एम0वी0ए0 (जी0आई0एस0) उपकेन्द्र सेक्टर-28 यीडा (गौतमबुद्धनगर) तथा सम्बन्धित लाइनों व ‘बे’ सहित निर्माण कार्य टी0बी0सी0बी0 मोड पर कराने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने यमुना एक्सप्रेस-वे इण्डस्ट्रियल डेवलपमेण्ट अथॉरिटी क्षेत्र में अनुमानित लागत 653.53 करोड़ रुपये की 400/220 के0वी0, 3×500 एम0वी0ए0 जी0आई0एस0 उपकेन्द्र सेक्टर-28 यीडा (गौतमबुद्धनगर) तथा सम्बन्धित लाइनों व ‘बे’ सहित निर्माण परियोजना को, उ0प्र0 विद्युत नियामक आयोग के प्राविधानों के अनुरूप, टैरिफ बेस्ड कॉम्पटीटिव बिडिंग (टी0बी0सी0बी0) मोड से कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, डेटा सेण्टर, फिल्म सिटी एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों को विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। साथ ही, मानक के अनुरूप ग्रिड की स्थिरता को सुदृढ़ करते हुए भविष्य की बढ़ती विद्युत माँग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जनपद लखनऊ में आउटर रिंग रोड के रैथा अण्डरपास से पी0एम0 मित्र पार्क (टेक्सटाइल पार्क) तक 6-लेन में निर्माण तथा आई0आई0एम0 से आउटर रिंग रोड रैथा अण्डरपास मार्ग के 2-लेन चौड़ीकरण तथा सुदृढ़ीकरण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना एवं पुनरीक्षित लागत 546.51 करोड़ रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में आउटर रिंग रोड के रैथा अण्डरपास से पी0एम0 मित्र पार्क (टेक्सटाइल पार्क) तक 6-लेन में निर्माण (लम्बाई 14.280 कि0मी0) तथा आई0आई0एम0 लखनऊ से आउटर रिंग रोड रैथा अण्डरपास मार्ग (लम्बाई 8.700 कि0मी0) के 2-लेन चौड़ीकरण तथा सुदृढ़ीकरण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना एवं पुनरीक्षित लागत 546 करोड़ 51 लाख 83 हजार रुपये के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना पी0एम0 मित्र पार्क को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर औद्योगिक विकास एवं यातायात सुविधा को बढ़ावा देगी।

लोक निर्माण विभाग में कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के लिए निविदाओं के निस्तारण हेतु प्रक्रिया निर्धारित

मंत्रिपरिषद ने लोक निर्माण विभाग में कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के लिए निविदाओं के निस्तारण हेतु प्रक्रिया निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अनुसार विभाग में कार्यों की गुणवत्ता में सुधार एवं अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा रोकने हेतु 05 करोड़ रुपये से अधिक लागत हेतु एस0बी0डी0 तथा 05 करोड़ रुपये से कम लागत हेतु टी-1 एवं टी-2 के माध्यम से प्राप्त होने वाली निविदाओं में कम लागत के आधार पर प्राप्त निविदाओं में अतिरिक्त परफॉर्मेन्स सिक्योरिटी निविदादाताओं से जमा कराए जाने का प्रस्ताव है।
15 प्रतिशत से अधिक कम दरों के निविदादाताओं के चयन से पूर्व सम्बन्धित ठेकेदारों के निर्माणाधीन/निर्मित कार्यां की नियमानुसार गुणवत्ता की जाँच कराए जाने, 15 प्रतिशत से कम दरों पर ऐसे निविदादाता, जिनका प्रदेश में कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है एवं तकनीकी बिड खुलने की तिथि से 02 वर्ष पूर्व कोई निर्माण कार्य पूर्ण न किया गया है, उनसे अतिरिक्त परफॉर्मेन्स सिक्योरिटी लिए जाने तथा प्राप्त निविदाओं के निस्तारण हेतु समुचित व्यवस्था की जा रही है।  

पश्चिम एशिया में संघर्ष/युद्ध के कारण अन्तरराष्ट्रीय बाजारों में पेट्रोलियम पदार्थों की दरों में वृद्धि के फलस्वरूप सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले बिटुमिन की दरों में अत्यधिक वृद्धि के कारण मूल्य समायोजन का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने पश्चिम एशिया में संघर्ष/युद्ध के कारण अन्तरराष्ट्रीय बाजारों में पेट्रोलियम पदार्थों की दरों में वृद्धि के फलस्वरूप सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले बिटुमिन की दरों में अत्यधिक वृद्धि के कारण मूल्य समायोजन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। लोक निर्माण विभाग में अधिकतर अनुबन्धों में मूल्य वृद्धि का क्लॉज नहीं है। अतः ऐसे अनुबन्धों में बढ़ी दरों के कारण बिटुमिन सम्बन्धी निर्माण कार्यों को ठेकेदार/फर्मों द्वारा पूर्ण किया जाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के परिपत्र दिनांक 17 अप्रैल, 2026 द्वारा बिटुमिन की दरों में हुई वृद्धि हेतु मूल्य समायोजन के आदेश निर्गत किए गए हैं। अतः लोक निर्माण विभाग में ऐसे मामले, जिनकी निविदा दिनांक 01 अप्रैल, 2026 के पूर्व आमंत्रित की गई हो तथा 05 करोड़ रुपये से कम लागत एवं 05 करोड़ रुपये से अधिक लागत के ऐसे अनुबन्ध, जिनमें किसी भी प्रकार की मूल्य वृद्धि देय नहीं है, में बिटुमिन की दरों में हुई वृद्धि हेतु मूल्य समायोजन का प्रस्ताव किया जा रहा है।

निजी क्षेत्र में अमरदीप विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद की स्थापना हेतु आशय-पत्र निर्गत किए जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के अन्तर्गत निजी क्षेत्र में अमरदीप विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था अमरदीप मेमोरियल ट्रस्ट, फिरोजाबाद को कतिपय शर्तां तथा अधिनियम की धारा-6 के प्राविधानों के अन्तर्गत आशय-पत्र निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार प्रायोजक निकाय द्वारा इस आशय का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा कि सम्पर्क मार्ग के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार के विवाद, शासन के संज्ञान में आने पर विवाद के गुणदोष/प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए शासन द्वारा आशय-पत्र वापस लिया जा सकता है और इस पर प्रायोजक संस्था को कोई आपत्ति नहीं होगी। प्रायोजक संस्था द्वारा प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय का भवन नगरीय क्षेत्र में होने के कारण नव-निर्माण हेतु भवन का नक्शा फिरोजाबाद शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण से नियमानुसार स्वीकृत/पास कराकर अनुपालन आख्या के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।


उत्तर प्रदेश राज्य में नये निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना करने और विद्यमान निजी विश्वविद्यालयों को निगमित करने तथा उनके कृत्यों को विनियमित करने के उद्देश्य से ’उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019’ प्रवर्तित किया गया है। उक्त अधिनियम की धारा-4 में नये विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने, धारा-5 में प्रस्ताव का मूल्यांकन किए जाने व धारा-6 में आशय-पत्र निर्गत किए जाने विषयक प्राविधान विहित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 12 सन् 2019) की धारा-58 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल, उत्तर प्रदेश राज्य में निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की प्रक्रिया को विनियमित करने की दृष्टि से उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली, 2021 का प्रख्यापन किया गया है। उक्त नियमावली के नियम-14 के अन्तर्गत उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति के समक्ष मन्तव्य एवं संस्तुति सहित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का प्राविधान है। उच्चस्तरीय समिति की बैठक दिनांक 29 जुलाई, 2025 को सम्पन्न हुई, जिसमें नगरीय क्षेत्र के अर्न्तगत ग्राम पचवान, तहसील व जिला फिरोजाबाद में कुल 20.08 एकड़ भूमि पर अमरदीप विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश की स्थापना हेतु अमरदीप मेमोरियल ट्रस्ट को आशय-पत्र निर्गत किए जाने की संस्तुति की गयी। उच्चस्तरीय समिति द्वारा की गयी संस्तुति के सन्दर्भ में अमरदीप विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किए जाने का प्रस्ताव है।