Thursday, January 29, 2026
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बिना स्नान प्रयागराज से विदा हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

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बिना स्नान प्रयागराज से विदा हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
बिना स्नान प्रयागराज से विदा हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला छोड़ा,बिना स्नान किए प्रयागराज से विदा हुए शंकराचार्य। प्रयागराज माघ मेला 2026 से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 दिन पहले ही विदा लेने का ऐलान कर दिया है। शंकराचार्य माघ मेला विवाद 2026 ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मन इतना व्यथित है कि बिना संगम स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। प्रयागराज आस्था और शांति की धरती है, लेकिन जो घटना यहां हुई, उसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।

प्रशासन का प्रस्ताव,फिर भी विदाई

शंकराचार्य ने बताया कि माघ मेला प्रशासन की ओर से उन्हें पत्र और प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें पूरे सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की मौजूदगी में स्नान कराने की बात कही गई थी। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र जल भी शांति नहीं दे पाता।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नान के लिए पालकी से जा रहे थे। पुलिस ने उनकी पालकी रोक दी और पैदल जाने को कहा। इसे लेकर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। शिष्यों के साथ कथित मारपीट और हिरासत के बाद शंकराचार्य नाराज हो गए और शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।

नोटिस,बयान और सियासी तकरार

प्रशासन ने दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका उन्होंने जवाब दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहे जाने से विवाद और बढ़ा। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।

संत समाज में मतभेद

इस विवाद ने संत समाज को भी दो हिस्सों में बांट दिया। हालांकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आए। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे।

‘सत्य की गूंज’ छोड़कर विदाई

अपने बयान में शंकराचार्य ने कहा कि संगम स्नान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति है। लेकिन आज की पीड़ा ने उन्हें बिना स्नान के लौटने को मजबूर किया। उन्होंने कहा कि वे यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।

प्रयागराज जिलाधिकारी का बयान

प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि शंकराचार्य बिना अनुमति पालकी पर आए थे और उस समय संगम पर भारी भीड़ थी। उनके समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े जाने और पुलिस से धक्का-मुक्की की जांच की जा रही है। माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें अब माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के दो प्रमुख स्नान शेष हैं।

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए जाते समय पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी रोक दी। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और अपमान के आरोप लगे। इसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और 11 दिनों तक शिविर में प्रवेश नहीं किया। प्रशासन ने दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका उन्होंने जवाब दिया। विवाद बढ़ने पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, हालांकि तीनों शंकराचार्य उनके समर्थन में रहे।

विवाद के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने शंकराचार्य के समर्थन में इस्तीफा दिया, जबकि अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री के समर्थन में पद छोड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेला और उत्तर प्रदेश की राजनीति को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।