

जेल से फरारी करवाइए हीरक पदक पाइए! बुलंदशहर, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर जेल में लूट मचाने वाले अधीक्षकों को रजत पदक। गणतंत्र दिवस पर कानपुर जेलर समेत दर्जनों दागदारों अफसरों को मिला पदक। एआईजी जेल प्रशासन की बेटियों की सेवा करने वाले वार्डर भी हुए सम्मानित। जेल से फरारी पर हीरक पदक..!
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में गणतंत्र दिवस पर पैसा लेकर रेवड़ी की तरह पदक बांटे गए हैं। यही वजह है कि जेल से फरारी के आरोपी जेलर को विभाग के डीजी प्रशंसा चिन्ह हीरक पदक से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही बुलंदशहर, फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर जेल में लूट मचाने मचाने वाले अधीक्षकों को रजत पदक देकर सम्मानित किया गया है। पदकों की सूची में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि एआईजी जेल प्रशासन की नोएडा के एक कॉलेज में पढ़ रही दो बेटियों की सेवा करने वाले वार्डर तक को डीजी के प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत कर दिया गया है। विभाग की सूची को लेकर विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा तो यहां तक है कि नगदी लेकर लोगों को पदक वितरित किए गए हैं। उधर विभाग के आला अफसरों ने इस मसले पर मौन धारण कर रखा है।
देश के 77 वें गणतंत्र दिवस से तीन दिन पहले 23 जनवरी को कारागार विभाग ने विभाग में उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को हीरक, स्वर्ण, रजत और प्रशंसा प्रमाण पत्र देने की एक सूची जारी की। मुख्यालय के एआईजी जेल प्रशासन की ओर से जारी की गई इस सूची में दर्जनों की संख्या में आरोपी और दोषियों के नाम देखने को मिले हैं। सूची में बीते दिनों कानपुर नगर की जेल से बंदी की फरारी के मामले में निलंबित के बाद बहाल होकर पुनः कानपुर पहुंचे जेलर मनीष कुमार को डीजी जेल के हीरक (प्लैटिनम) पदक से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही बुलंदशहर, फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर जेल में मशक्कत, बैठकी, हाता समेत अन्य मदो में लूट मचाने वाले अधीक्षकों कोमल मंगलानी, अमित चौधरी और अभिषेक चौधरी को रजत पदक से अलंकृत किया गया है।
प्रकाशित सूची में रोचक बात यह देखने को मिली कि एआईजी जेल प्रशासन की नोएडा के एक कॉलेज में पढ़ रही दो बेटियों की सेवा करने वाले वाले वार्डर अक्षय समेत एक अन्य को डीजी का प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही कन्नौज जेल में तैनात और प्रशिक्षण संस्थान में रहकर मुख्यालय में अधिकारियों की चापलूसी करने वाले दो डिप्टी जेलरों को भी डीजी के प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह तो बानगी है। सूची में दर्जनों की संख्या में दोषी, आरोपी और दागदार अधिकारियों को विभिन्न पदक और प्रशस्ति पत्र देकर अलंकृत किया गया है। पदक वितरण विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर इस संबंध में जब एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह और प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो इन अधिकारियों का फोन ही नहीं उठा।
अफसरों की वसूली का जरिया बना पदक के लिए नामों का चयन!
कारागार विभाग में अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए शुरू की पदक वितरण व्यवस्था अब अधिकारियों की वसूली का जरिया बनकर रह गई है। सूत्रों की माने तो विभाग में वसूली करके अधिकारियों और कर्मियों को पदक दिए जा रहे है। यही वजह है विभाग के कई पात्र कर्मियों को इस सम्मान से वंचित रहना पड़ रहा है। पदक से वंचित एक डिप्टी जेलर ने बताया कि वह इस बार स्वर्ण पदक की दावेदार थी लेकिन मुख्यालय में संबंधित अधिकारी से नहीं मिलने की वजह से उसे पदक नहीं दिया गया। एक बाबू ने बताया कि बीते दो साल से उसका नाम पदक के नहीं भेजा जा रहा था। इस बार कोशिश करके भेजवाया लेकिन उसके बाद भी नहीं मिले। इनका आरोप है कि विभाग में पैसा और जुगाड वालों को ही पदक दिया जाता है। जेल से फरारी पर हीरक पदक..!
























