Saturday, January 17, 2026
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अशोक गहलोत को समर्थन राजस्थान के 13 निर्दलीय विधायक एकमत

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  • अशोक गहलोत को समर्थन पर राजस्थान के 13 निर्दलीय विधायक एकमत, लेकिन 23 जून की बैठक में बसपा वाले कांग्रेसी विधायकों की उपस्थिति पर एतराज।
  • विधायकों की संयुक्त बैठक पर संशय। मंत्री सुभाष गर्ग के रवैये से नाराजगी।
  • निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़, सुरेश टाक और खुशवीर सिंह जोजावर ने कहा कि बसपा से आए कांग्रेसी विधायकों के बैठक में शामिल होने की जानकारी नहीं।

एस0 पी0 मित्तल

राजस्थान। राजस्थान में राजनीतिक संकट के दौरान ही 23 जून को जयपुर में होटल अशोका में 13 निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों की संयुक्त बैठक होनी है, इस बैठक का उद्देश्य कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति समर्थन प्रकट करना है। लेकिन बैठक से पहले ही निर्दलीय विधायकों की बैठक में बसपा से आए 6 कांग्रेसी विधायकों की उपस्थिति पर एतराज जताया जा रहा है। अनेक विधायकों का कहना है कि विधानसभा में बहुजन समाजवादी पार्टी का वजूद ही खत्म हो गया है। जब बसपा के 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया गया है तो फिर इन विधायकों की पहचान बसपा से क्यों हो रही है?

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जब 23 जून की बैठक में निर्दलीय विधायकों की है तो फिर 23 जून की बैठक में निर्दलीय विधायकों की है तो फिर कांग्रेस के 6 विधायक शामिल क्यों हो रहे हैं? 22 जून को निर्दलीय विधायक खुशवीर सिंह जोजावर, राजकुमार गौड़ और सुरेश टाक का कहना रहा कि निर्दलीय विधायकों की बैठक में कांग्रेस के 6 विधायक भी शामिल होंगे, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी विधानसभा के रिकॉर्ड में अब बसपा का कोई विधायक नहीं है। 23 जून की बैठक किसकी पहल पर हो रही है के सवाल पर तीनों विधायकों ने कहा कि सभी 13 निर्दलीय विधायकों ने एकमत होकर बैठक बुलाई है।

गत वर्ष अगस्त में जब विधानसभा में कांग्रेस सरकार के समर्थन पर मत विभाजन हुआ तो हम सभी 13 निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ खड़े थे और आज भी हम गहलोत के साथ हैं। गहलोत को समर्थन देने पर निर्दलीय विधायकों में कोई मतभेद नहीं है। हमारे विधानसभा क्षेत्र के विकास में गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। हमने जो मांगा वो मुख्यमंत्री ने दिया है। कांग्रेस विधायकों की आपसी बयानबाजी पर टिप्पणी किए बगैर तीनों विधायकों ने कहा कि हम चाहते हैं कि राजस्थान में स्थिर सरकार हो।

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अशोक गहलोत के नेतृत्व में मजबूत और प्रभावी सरकार चल रही है। स्वयं संक्रमित होने के बाद भी मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में प्रतिदिन कार्य किया है। कोरोना की दूसरी लहर में गहलोत के नेतृत्व में ही डटकर मुकाबला किया गया है। तीनों विधायकों ने कहा कि हम बिना शर्त गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं और भविष्य में भी देते रहेंगे? हमने मुख्यमंत्री के सामने कभी भी मंत्री या अन्य कोई पद देने का प्रस्ताव नहीं किया। सीएम गहलोत हमारे प्रति जो स्नेह भाव रखते हैं वो ही काफी है। हमें सिर्फ अपने क्षेत्र के विकास की चिंता रहती है।

विधायकों की संयुक्त बैठक पर संशय :-

निर्दलीय विधायकों से ऐतराज के बाद अब 23 जून को जयपुर में होटल अशोका में सायं पांच बजे होने वाली निर्दलीय विधायकों की बैठक में बसपा वाले 6 कांग्रेसी विधायकों के शामिल होने पर संशय हो गया है। जानकार सूत्रों के अनुसार निर्दलीय विधायकों के एतराज को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस के रणनीतिकारों ने संयुक्त बैठक पर पुनर्विचार किया है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में चिकित्सा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग के रवैये से भी निर्दलीय विधायकों में नाराजगी बताई जा रही है।

सुभाष गर्ग स्वयं राष्ट्रीय लोकदल के विधायक हैं, लेकिन इन दिनों अशोक गहलोत की सरकार को बचाने में सक्रिय हैं। राजनीतिक हालातों का फायदा उठाते हुए सुभाष गर्ग सभी गैर कांग्रेसी लेकिन गहलोत समर्थक विधायकों के नेता बनना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार निर्दलीय विधायकों के साथ बसपा वाले कांग्रेसी विधायकों की संयुक्त बैठक का सुझाव भी गर्ग का ही रहा। यहां यह उल्लेखनीय है कि सुभाष गर्ग राष्ट्रीय लोकदल के इकलौते विधायक हैं। लेकिन सीएम अशोक गहलोत से निकटता होने की वजह से पहली बार में ही मंत्री और विधायक बन गए।


ये है निर्दलीय और बसपा वाले कांग्रेसी विधायक:-


राजस्थान विधानसभा में 200 में से 13 निर्दलीय विधायक हैं, सभी 13 विधायक गहलोत के साथ हैं। इन 13 विधायकों में 9 कांग्रेस पृष्ठ भूमि के हैं, लेकिन जो 3-4 विधायक भाजपा या अन्य दल की पृष्ठभूमि वाले हैं, वे भी गहलोत के साथ हैं। निर्दलीय विधायकों में संयम लोढ़ा, महादेव सिंह खंडेला, बाबूलाल नागर, ओम प्रकाश हुडला, खुशवीर सिंह जोजावर, लक्ष्मणमीणा, आलोक बेनीवाल, सुरेश टाक, बलजीत यादव, रमिला खडिय़ा, कांति प्रसाद मीणा, राजकुमार गौड व रामकेश मीणा हैं। इसी प्रकार बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक सर्वश्री राजेन्द्र सिंह गुढा, लखन सिंह, दीपचंद खेडिय़ा, जोगेन्द्र सिंह अबाना, संदीप यादव तथा वाजिब अली हैं। कांग्रेस में शामिल होने के बाद लखन सिंह को तो कांग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष भी बना दिया गया है।