विद्यालय प्रबंधन की छवि धूमिल करने का प्रयास-रस्तोगीविद्यालय प्रबंधन ने हर स्तर पर की नियमानुसार कार्रवाई।
लखनऊ, पहले तो नियम विरुद्ध काम करने का मेरे विद्यालय प्रबंधन पर दबाव डाला गया और जब गलत काम नहीं किया गया तो प्रेसवार्ता कर प्रबंधन पर बेबुनियाद आरोप लगाया गया। ऐसा एक शिक्षक नेता डॉ आर पी मिश्रा द्वारा किया गया। नेता ने आरोप लगाया कि मेरा विद्यालय प्रबंधन अपनी सहायक अध्यापिका श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव, जो वर्तमान मे दयानन्द गर्ल्स इंटर कालेज मे प्रधानाध्यापिका है से कार्यमुक्ति प्रमाणपत्र देने के लिए दो लाख रुपया घूस मांग रहा है। जबकि ऐसा सत्य से परे है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा बकायदे नियमानुसार कार्यवाही करते हुए कार्यमुक्ति प्रमाणपत्र न केवल समय से तैयार किया गया बल्कि श्रीमती दिव्या को रिसीव भी करा दिया गया। ऐसे और भी बहुत से झूठे आरोप लगाए गए।
उक्त बातें आज लक्ष्मी नारायण भगवती गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबन्धक बृजेश कुमार रस्तोगी ने एक प्रेसवार्ता मे कहीं। झूठे आरोपों से व्यथित श्री बृजेश रस्तोगी ने शिक्षक नेता के सभी आरोपों को एक एक कर साक्ष्य सहित पत्रकारों के सामने रखा।
उन्होने कहा कि आरोप मे एक है कि हमारे विद्यालय की पूर्व सहायक अध्यापिका श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव का दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज लखनऊ में प्रधानाचार्य के पद पर चयन हो जाने के फलस्वरूप उनको कार्यमुक्त किए जाने हेतु प्रबंधन द्वारा दो लाख रुपए की घूस मांगी गयी और नहीं दिये जाने पर कार्यमुक्ति आदेश नहीं दिया गया। जबकि सच्चाई यह है कि श्रीमती दिव्या को विद्यालय प्रबंधन द्वारा दिनांक 05.10.2019 को ही कार्यमुक्ति आदेश निर्गत कर दिया गया था जिसे उन्होंने विद्यालय में उपस्थित होकर बिना किसी आपत्ति के प्राप्त भी कर लिया था।
अन्य आरोप के मुताबिक श्रीमती दिव्या ने चयन संबंधी पत्र (दिनांक 22.08.2019) प्राप्त होने पर दिनांक 01 अक्टूबर 2019 से कार्यमुक्त किये जाने संबंधी पत्र लिखित रूप से हमारे विद्यालय में दिया था तथा मौखिक अनुरोध भी किया था। जबकि सच्चाई यह है कि दिनांक 30.09.2019 में हस्ताक्षरित श्रीमती दिव्या द्वारा लिखा हुआ एक पत्र दिनांक 01.10.2019 को मिला था जिसमे दिनांक 01.10.2019 से एक वर्ष का अवैतनिक अवकाश व कार्यमुक्त किए जाने का अनुरोध किया गया था। विद्यालय प्रबंधन ने अपनी त्वरित कार्य निबटाने वाली कार्यशैली के तहत नियमित प्रक्रिया के अनुसार 04 अक्टूबर 2019 को विद्यालय के प्रबंध कमेटी की औपचारिक आवश्यक बैठक कर दिनांक 05.10.2019 को श्रीमती दिव्या का कार्यमुक्ति आदेश निर्गत करते हुए उन्हें उपलब्ध करा दिया गया था। गौरतलब है कि इस दौरान श्रीमती दिव्या द्वारा कभी भी अपने कार्यभार ग्रहण कर लिए जाने संबंधी कोई सूचना विद्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गयी, जिसके कारण विद्यालय प्रबंधन ने सामान्य प्रक्रिया अपनाते हुए कार्यवाही की थी। कार्यमुक्ति के 1 सप्ताह बाद श्रीमती दिव्या द्वारा दिनांक 12.10.2019 को एक पत्र कार्यालय मे प्राप्त कराया गया जिसमे दिनांक 01.10.2019 को दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण करने की सूचना देते हुए उसी तिथि से कार्यमुक्ति आदेश दिये जाने की मांग की गयी थी, जो नियम विरुद्ध होने के कारण विद्यालय प्रबंधन द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
श्री रस्तोगी ने कहा कि एक आरोप यह भी है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (द्वितीय) लखनऊ द्वारा दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर दिनांक 01.10.2019 से ही श्रीमती दिव्या का हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिया गया था फिर भी प्रबंधन द्वारा कार्यमुक्त आदेश उसी तिथि से नहीं दिया गया। जबकि सच्चाई यह है कि कार्यमुक्ति आदेश के बिना जिला विद्यालय निरीक्षक (द्वितीय) द्वारा उनका हस्ताक्षर प्रमाणित नहीं किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यूँ किया गया यह समझ से परे है या यह कहें कि नए और पुराने विद्यालय प्रबंधन की तरह शिक्षा विभाग को भी अंधेरे मे रखा गया।
अन्य आरोप है कि 16 सितंबर 2020 को संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक लखनऊ द्वारा मौखिक रूप से कहे जाने पर भी हमारे विद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्यमुक्ति आदेश नहीं दिया गया। इस मामले मे संयुक्त शिक्षा निदेशक महोदय द्वारा 16 सितंबर 2020 को बुलाये गए बैठक में बतौर प्रबन्धक मुझसे मौखिक ही कहा गया कि विवादित पांच दिनों (दिनांक 01.10.2019 से दिनांक 05.10.2019 तक) की उपार्जित अवकाश (EL) का प्रार्थना पत्र लेकर आप चाहे तो मामले को इनके हित मे निस्तारित कर सकते है लेकिन इंनका वेतन नए विद्यालय से ही दिया जायेगा। जबकि उस बैठक की कार्यवाही का निर्णय अभी तक विद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि कार्यमुक्ति आदेश जारी हो जाने के बाद किसी भी प्रकार के अवकाश की स्वीकृति का अधिकार विद्यालय के प्रबंधन के पास कहाँ रह जाएगा ? यह विचारणीय प्रश्न है।
आरोप ये भी है कि श्रीमती दिव्या का वेतन एक वर्ष से रोका गया है। जबकि किसी शिक्षक/प्रधानाचार्य का वेतन निर्गत/स्वीकृत करने का अधिकार जिला विद्यालय निरीक्षक के पास होता है न कि विद्यालय प्रबन्धन के पास। विद्यालय प्रबंधन की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है।
श्री रस्तोगी ने कहा कि आरोप लगाने की भूमिका मे महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना मिशन शक्ति अभियान का आधार लिया गया है जबकि एक नारी की स्वयं की गलतियों की वजह से पिछले तीन माह से हमारे विद्यालय की सभी शिक्षिकाओं और शिक्षरेत्तर कर्मचारियों को, इस कोरोना संकट की घड़ी मे बिना वेतन के कितनी दुश्वारीयों से रोज दो-चार होना पड़ रहा है। इसका मलाल किसी को नहीं है। श्री रस्तोगी ने कहा कि इस बाबत शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से मिलकर उन्हे पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए न केवल न्याय की गुहार लगाएगा बल्कि ऐसे कुत्सित प्रयास करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा। इस मौके पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ कल्पना श्रीवास्तव सहित परिवार के सदस्य मौजूद रहे।























