Friday, January 30, 2026
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मिशन शक्ति सिर्फ़ काग़ज़ी या हक़ीकत….?

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साल 2017, योगी आदित्यानाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। सत्ता में आने के बाद उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार महिलाओं की सुरक्षा, उनके सशक्तीकरण और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और इसी के तहत उन्होंने कई घोषणाएं भी की थीं।

लखनऊ, महिलाओं के लिए 181 हेल्पलाइन का दायरा 11 ज़िलों से बढ़ा कर 75 ज़िलों तक करना, लिंगानुपात सुधार, घर से ही भेदभाव को कम करने, ‘पुलिस सूचना कार्यक्रम’ की शुरुआत करने के साथ-साथ एंटी-रोमियो स्क्वैड का गठन शामिल था। महिलाओं के सशक्तीकरण और सुरक्षा को लेकर उठाए गए इन क़दमों की काफ़ी सराहना भी हुई।लेकिन उनका एंटी-रोमियो स्क्वैड कार्यक्रम विवादों में आ गया और कहां ग़ायब हो गया, पता नहीं चला।

अब हाल ही में हाथरस, बलरामपुर और अन्य इलाक़ों में हुई कथित बलात्कार की घटनाओं के बाद योगी आदित्यनाथ ने ‘मिशन-शक्ति’ अभियान की घोषणा की है।इस अभियान के तहत 1535 पुलिस थानों में एक अलग कमरे का प्रावधान किया गया है जिसमें पीड़िता, महिला पुलिसकर्मी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकती है, ताकि तुरंत कार्रवाई हो सके और अपराधी को सज़ा दी जा सके, साथ ही उन्होंने पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती की भी घोषणा की थी।

  उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति कार्यक्रम चलाया जा रहा है वहीं, दूसरी तरफ सरकार के अधिकारियों पर ही महिला उत्पीड़न के आरोप लग रहे हैं। जी हां, पंचायती राज विभाग के उपनिदेशक संजय कुमार वरनवाल के खिलाफ झांसी की मंडलीय सलाहकार द्वारा लगाए गए लैंगिक उत्पीड़न के आरोप सही पाए गए हैं,इस मामले की जांच कर रही कमेटी ने आरोपी उपनिदेशक पर कार्रवाई की सिफारिश की और रिपोर्ट शासन को भेजी है। पंचायती राज के प्रमुख सचिव ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।प्रमुख सचिव पंचायती राज अपने दोषी अधिकारी को क्यों बचा रहे हैं ये समझ से परे है।

मिशन-शक्ति अभियान यूपी सरकार की तरफ़ से नवरात्रों में शुरू किया गया है जो छह महीने तक जारी रहेगा, और इस अभियान में भी नारी सशक्तीकरण और सुरक्षा के लिए कई और एलान किए गए जिसकी शुरुआत लखनऊ से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर से।

हाथरस और उसके बाद अन्य इलाक़ों से आईं कथित बलात्कार की घटनाओं के बाद योगी सरकार की काफ़ी आलोचना हुई। विपक्ष भी इन घटनाओं पर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश में लगा है। हालांकि जानकार मानते हैं कि यूपी में चाहे किसी की भी सरकार आई हो बलात्कार या महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले सामने आते रहे हैं और ये देखा गया है कि जब भी कोई घटना घटती है सरकारें सक्रिय हो जाती हैं।

मिशन-शक्ति एक अच्छा अभियान है लेकिन थानों में जिन महिला पुलिसकर्मी की बात की जा रही है, क्या वे इतनी संख्या में हैं…? ”पहले हमें ये देखना होगा कि क्या महिला पुलिसकर्मी इतनी संख्या में राज्य के थानों में हैं, क्या वो इस काम के लिए प्रशिक्षित हैं, संवेदनशील हैं। सबसे अहम हैं फ़ोर्स को सेंसेटाइज़ करना, और ये भी देखना होगा कि क्या महिला किसी थाने में जाने के लिए तैयार है, चाहे उसकी बात सुनने के लिए महिला ही क्यों न बैठी हो, सरकार को अपराध पर लगाम लगाने के लिए अभियानों के ज़रिए कार्यशैली में निरंतरता लानी होगी। क्योंकि ये देखा जाता है कि एक्शन होने का रिएक्शन होता है और फिर चीज़ें खो सी जाती हैं।”

समाज कहता हैं कि मिशन-शक्ति के हमने बड़े-बड़े विज्ञापन देखे हैं जिसमें जागरूकता की बात है।”ये दावें सुनने में अच्छे लगते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए चीज़ें की जा रही हैं लेकिन महिलाओं की सुरक्षा के लिए ही लाया गया एंटी-रोमियो स्क्वैड कहां है….?”

‘मिशन शक्ति’ में भी महफूज नहीं महिलाएं !

यूपी में पंचायती राज विभाग पर घिनौने आरोप,उपनिदेशक संजय कुमार वरनवाल की ‘गंदी बात’ उजागर जांच में आरोप सिद्ध होने पर भी उपनिदेशक पर कार्रवाई नहीं उपनिदेशक पंचायती राज को कौन बचा रहा है …? पंचायती राज विभाग में महिलाओं का उत्पीड़न होता है ….?

  1. यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है लेकिन सरकार के अधिकारियों पर ही महिला उत्पीड़न का आरोप लग रहे हैं।
  2. 5 महीने पहले झांसी की मंडलीय सलाहकार एक युवती ने पंचायती राज विभाग के उपनिदेशक संजय कुमार वरनवाल पर लैंगिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
  3. पीड़िता ने 25 मई को पंचायती राज निदेशक को शिकायत की, 2 जून को जांच कमेटी गठन हुआ और कमेटी द्वारा उपनिदेशक पर लगे आरोप सही पाए गए हैं।
  4. कमेटी ने आरोपी उपनिदेशक पर कार्रवाई की सिफारिश की है और अपनी रिपोर्ट को प्रशासन को भेजी है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
  5. कमेटी की रिपोर्ट प्रमुख सचिव के दफ्तर में धूल खा रही है और यह समझा नहीं आया है कि प्रमुख सचिव पंचायती राज अपने दोषी अधिकारी को क्यों बचा रहे हैं।

ये मामला करीब पांच महीने पुराना है,झांसी मंडल कार्यालय में बतौर मंडलीय सलाहकार तैनात रही युवती ने अपने साथ उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पीड़िता ने इसकी शिकायत इसी साल 25 मई को पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह से की थी। शिकायत मिलने के बाद दो जून को शासन के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। कमेटी में पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह, विशेष सचिव पंचायती राज रमाशंकर मौर्य, अपर निदेशक राजकुमार, नंदिनी जैन संयुक्त निदेशक एवं एनजीओ संचालक रमा तिवारी को शामिल किया गया।

कमेटी की रिपोर्ट में सही मिले आरोप,कमेटी की रिपोर्ट में उपनिदेशक के खिलाफ आरोपी सही पाए गए, इसके लिए कमेटी ने उपनिदेशक पर कार्रवाई की सिफारिश की और रिपोर्ट प्रमुख सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह को भेज दी। अब यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव के दफ्तर में धूल फांक रही है। प्रमुख सचिव मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश भर में अभियान चला रहे हैं। हालांकि वह अपने विभाग की पीडि़त महिलाओं को न्याय नहीं दे पा रहे हैं।