
क्षेत्रीय किसान जमीन का मुवावजा मिलने पर ही तमसा नदी के लिए देंगे अपनी जमीन,मवई में तमसा नदी की खुदाई में जा रही हैं सैकड़ों बीघा किसानों की जमीने,जमीन विवाद को लेकर ही अमीर पुर गांव के पास रुकी हुई है तमसा नदी की खुदाई।
अब्दुल जब्बार एडवोकेट
अयोध्या, भेलसर जिले से हो कर निकली पौराणिक तमसा नदी जिसका उदगम स्थल विकास खंड मवई के लखनीपुर में है।जिसको पुनर्जन्म देने के लिए मनरेगा के द्वारा उसकी खुदाई हो गई हैं जिसमें अभी तीन किलोमीटर बाकी है।किसानों ने बताया कि हम अपनी जमीन तमसा के लिए मुफ्त में नही देंगे।इसके बदले जमीन या फिर रुपये मिलेंगे तभी देंगे।वही संबंधित अधिकारियों की माने तो नदी की खुदाई में आने वाली जमीन किसानों के नाम नही है राजस्व विभाग से मिलकर अपने नाम करवा लिया है इस लिए मुवावजा नही दिया जायेगा।
अयोध्या जनपद के विकास खंड मवई के लखनीपुर गांव में पौराणिक तमसा नदी का उदगम स्थल होने से मनरेगा योजना के तहत अम्बेडकर नगर तक नदी की खुदाई करवाई गई और उसके दोनों ओर पटरियो पर हरे भरे पेड़ लगाए गए।बाद में तमसा नदी को अयोध्या बाराबंकी की सीमा पर बह रही कल्यानी नदी में उसका संगम करा दिया जाय। जिसको लेकर मनरेगा के अधिकारियों ने उदगम स्थल से लेकर अमीरपुर गांव तक नदी की खुदाई की गई लेकिन आगे जैसे ही काम बढ़ता तब तक किसानों ने रोक लगा दिया कि हम अपनी जमीन मुफ्त में दे देंगे तो हम अपने परिवार को किस तरह से चलाएंगे।जिसको लेकर हुनहुना,बीबीपुर,लखनीपुर के किसान एजाज अहमद,मंशाराम,खलकुन निशा,छेदी लाल,मारूफ,शमीम,राम मनोहर,फैयाज आदि की जमीन खुदाई में जा चुकी हैं जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की है इन सभी ने बताया कि जो जमीन नदी की खुदाई में गई हैं वह हम सभी के नाम है हम लोगों ने खरीद कर अपने नाम बैनामा करवाया है।सभी किसानों का आरोप है कि मनरेगा के अधिकारियों ने जबरन जमीन पर कब्जा करने के बाद उसमें नदी की खुदाई करवाई।
1950 तक के नक्शे में नदी का कोई जिक्र ही नही है।जब मुवावजा के लिए कहा गया तो बताया कि जिस जमीन पर आप का कब्जा था वह जमीन नदी की है इसी प्रकार अमीरपुर के आगे नदी की खुदाई का कार्य आगे नही बढ़ सका।जहां पर अमीरपुर के ग्रामीणों ने एक जुट होकर एक वर्ष पूर्व धरना प्रदर्शन करते हुए नदी की खुदाई पर रोक लगा दिया था।कई ऐसे किसान हैं जिनकी पूरी की पूरी जमीन ही जा रही हैं जिससे उनके परिवार के सामने भोजन के लाले पड़ जायेंगे। इस बात को लेकर जब डीसी मनरेगा नगेन्द्र राम मोहन त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नदी की खुदाई का कार्य जल्द ही शुरू होगा।जब किसानों के मुवावजे को लेकर पूंछा गया तो बताया कि वहाँ पर किसानों की जमीन हैं ही नहीं जिस जमीन पर कब्जा था वह नदी के नाम 30 -40 वर्ष पूर्व दर्ज हैं।पहले सीधे जमीन खाली करने के लिए कहा जायेगा न मानने पर जबरन खुदाई कराई जाएगी।























