Tuesday, January 27, 2026
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अब शुद्ध दूध मिलना सपने जैसा

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दूध अपने आप में एक सम्पूर्ण आहार है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और दिमाग तेज होता है इसीलिए घर के बड़े बुजुर्ग से लेकर डॉक्टर्स तक रोजाना दूध पीने की सलाह देते हैं लेकिन मिलावटखोरी और लालच ने सेहत के लिए वरदान इस सफेद दूध को काला कर दिया है। आजकल हरकोई दूध में होने वाली मिलावट को लेकर परेशान है। पहले दूधिये पानी की मिलावट कर दूध बेचते थे। विज्ञानं की प्रगति के साथ बड़े बड़े दूध के प्लांट स्थापित हो गए। मगर मिलावट का गोरख धंधा फिर भी नहीं रुका।

सहकारी और निजी क्षेत्र के साथ सरकारी क्षेत्र में भी दूध में सरेआम मिलावट की खबरे मीडिया में सुर्खिया लिए होती है। अनेक बार जाँच एजेंसियों की छापे मारी में दूध में मिलावट की खबरों से लोग परेशान हो उठते है। आम लोग जानकारी के अभाव में सिंथेटिक या मिलावटी दूध और सही दूध के बीच पहचान नहीं कर पाते हैं। शुद्ध दूध मिलना अब सपना सा लगता है। आज आम आदमी महंगाई के साथ दूध में हो रही मिलावट से खासा परेशान है। हमारे बीच यह धारणा पुख्ता बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली दूध में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है। लोगों की यह चिंता बेबुनियाद नहीं है। आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। खाने पीने के पदार्थो में मिलावट कोई नयी समस्या नहीं है।

मिलावटी और खराब उत्पाद बेचे जाने की खबरें आम हो चुकी हैं. साल-दर-साल इसका दायरा व्यापक होता जा रहा है। त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है ऐसे में मिलावटी दूध के साथ प्रदूषित मावा और दूध से बनी मिठाइयां भी बाजार में बहुतायत से बिकने आएगी। सेहत  के लिए हानिकारक इन वस्तुओं को खरीदने से पहले सतर्कता और जागरूकता जरुरी है।एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था की देश में दूध की जितनी खपत होती है उसके मुकाबले उत्पादन बहुत कम होता है। हिंदी बेल्ट के राज्यों में दूध में मिलावट ज्यादा होती है। विभिन्न जाँच एजेंसियों की जांच में दूध में डिटर्जेंट की मिलावट आम तौर पर पायी गयी।

दूध में पानी के मिलावट आम बात है। शुद्ध दूध मिलना दुर्लभ हो गया है। यहाँ तक की विभिन्न  प्रदेशों  के डेयरी प्लांटों में छापेमारी के दौरान पाया गया कि दूध में डिटर्जेट और यूरिया जैसे रासायनिक पदार्थ खुलेआम मिलाए जा रहे हैं। जयपुर के एक खाद्य प्रसंस्करण अभियांत्रिक रुपेश मिश्रा के अनुसार मिलावटी दूध से शरीर पर कई तरह के दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। यूरिया, कॉस्टिक सोडा और इसमें मौजूद फोरमेलिन से गैस्ट्रोएंट्रटिटिस से लेकर इम्पेयरमेंट, दिल के रोग, कैंसर और मौत तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि दूध में इस्तेमाल किए जाने वाले डिटर्जेंट से पाचन तंत्र की गड़बडिय़ां और फूड पॉयजनिंग हो सकती है।

उच्च एल्केलाइन से शरीर के तंतु क्षतिग्रस्त और प्रोटीन नष्ट हो सकते हैं। रुपेश के मुताबिक पॉली पाउच, मल्टीपल कलेक्शन सेंटर से इक_ा करने के कारण क्वालिटी कंट्रोल पूरी तरह संभव नहीं है। फार्म फ्रेस दूध, एकल स्रोत से प्राप्त होने के कारण गुणवत्ता में बेहतर परिणाम देता है। भारत को कभी सोने की चिडिय़ा कहा जाता था क्योंकि यहाँ दूध दही की नदिया बहती थी। दूध हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का जतन रखता है और सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व पहुंचाता है जिसमें कैल्शियम, मैगनिशियम, जिंक, फॉसफोरस, ऑयोडीन, आइरन, पोटेशियम, फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी12, प्रोटीन, स्वस्थ फैट आदि शामिल है। ये बहुत ही ऊर्जायुक्त आहार होता है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराता है क्योंकि इसमें उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन सहित आवश्यक और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड और फैटी एसिड मौजूद होता है। भारत का विश्व दुग्ध उत्पादन में 18 प्रतिशत हिस्सा है। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कृषि के बाद डेयरी उद्योग की प्रमुख भूमिका है। भारत में कुल दूध का यहां 17 प्रतिशत से भी ज्यादा उत्पादन किया जाता है।

     दुग्ध उद्योग, कृषि की एक श्रेणी है। यह पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्यम है जिसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादन, उसकी प्रोसेसिंग और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। इसके वास्ते गाय-भैंसों, बकरियों या कुछेक अन्य प्रकार के पशुधन के विकास का भी काम किया जाता है। भारत गांवों में बसता है। हमारी आधी से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है तथा 60 प्रतिशत लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब 7 करोड़ कृषक परिवार में प्रत्येक दो ग्रामीण घरों में से एक डेरी उद्योग से जुड़े हैं। भारतीय दुग्ध उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार देश में 70 प्रतिशत दूध की आपूर्ति छोटे सीमांत भूमिहीन किसानों से होती है। भारत में कृषि भूमि की अपेक्षा गायों का ज्यादा समानता पूर्वक वितरण है। भारत की ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में डेरी-उद्योग की प्रमुख भूमिका है। आज यही डेयरी उद्योग मिलावट के कारण बदनाम हो रहा है।