Monday, March 30, 2026
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सल्फॉस की बिक्री एवं प्रयोग पर नियंत्रण हेतु दिशा-निर्देश जारी

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जनपद के समस्त कीटनाशक विनिर्माता, स्टॉकिस्ट, वितरक (Distributors), कम्पनी स्टॉक एण्ड सेल प्वाइंट, थोक एवं फुटकर कीटनाशक विक्रेता, एग्रीजंक्शन, एफ0पी0ओ0, साधन सहकारी समिति एवं पेस्ट कण्ट्रोल ऑपेरेटर्स को सूचित किया जाता है, कि भारत सरकार से कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं कीटनाशी अधिनियम 1971 के अन्तर्गत सेल्फॉस के रेगुलेशन के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।


एल्यूमीनियम फॉस्फाइड (ALP) जिसे आम बोल-चाल भाषा में सेल्फास भी कहा जाता है, जो एक खतरनाक जानलेवा कीटनाशक है जिसके दुर्घटनावश प्रयोग से जीवन खतरे में पड़ सकता है। जिसके लिये भारत सरकार द्वारा सल्फास बिक्री के कड़े नियम बनाये गये हैं। उक्त जानकारी देते हुये जिला कृषि रक्षा अधिकारी महेश चन्द्र ने आगे बताया कि सेल्फास प्रतिबंधित प्रयोग श्रेणी का रसायन है। एल्युमिनियम फॉस्फाइड से कीट नियंत्रण कार्य केवल सरकार अथवा सरकारी उपक्रमों अथवा सरकारी संगठनों अथवा कीट नियंत्रण संचालकों द्वारा सरकारी विशेषज्ञों या ऐसे विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में ही किए जा सकते हैं जिनकी विशेषज्ञता भारत सरकार के पादप संरक्षण सलाहकार द्वारा अनुमोदित हो, सिवाय एल्युमिनियम फॉस्फाइड 15% 12 ग्राम टैबलेट और एल्युमिनियम फॉस्फाइड 6% टैबलेट के साथ ही एल्युमिनियम फॉस्फाइड की 3 ग्राम की 10 और 20 गोलियों की क्षमता वाले ट्यूब पैक का उत्पादन, विपणन और उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। ALP के घरेलू उपयोग और खुले में भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंध है।


अतः इसका प्रयोग केवल सरकारी एजेन्सी या कॉमर्शियल पेस्ट कण्ट्रोल ऑपरेटर के द्वारा ही किया जा सकता है। किसी अन्य कीटनाशक विक्रेता द्वारा सामान्य उपयोग हेतु विक्रय करने पर उसका कीटनाशक लाइसेन्स भी निरस्त किया जायेगा। प्रतिबंधित प्रयोग श्रेणी के रसायन होने के कारण रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के साथ दिये गये लेबल एवं लीफलेट का अनिवार्य रूप से पालन करना सुनिश्चित करें। कीटनाशी नियमावली-1971 की धारा-41 के क्रम में जहां भी कीटनाशक बनाए जाते हैं, वहां प्राथमिक चिकित्सा के पर्याप्त साधन होने अनिवार्य हैं। समस्त कीटनाशक विनिर्माता व कीटनाशक थोक एवं फुटकर विक्रेताओं एवं पेस्ट कण्ट्रोल ऑपरेटर (पी0सी0ओ0) अपने परिसर में उन सभी कीटनाशकों के एंटीडोट पर्याप्त मात्रा में रखने होंगे जिन्हें वे बेच रहे हैं। ताकि यदि कोई कर्मचारी काम के दौरान जहर के सम्पर्क में आ जाए या कीटनाशक गलती से सूंघ लिया जाए, त्वचा पर गिर जाए या शरीर के अन्दर चला जाए तो उसके तुरन्त उपचार शुरू किया जा सके।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) 4015.1998 गाइडेन्स फॉर हैन्डलिंग पेस्टीसाइड पॉयसनिंग केसेस में दिये गये जानकारी के आधार पर ही कीटनाशक जहर से होने वाली दुर्घटनाओं में व्यक्ति के इलाज हेतु निर्देश दिये गये हैं, जिसके आधार पर ही कोई चिकित्साधिकारी व्यक्ति का इलाज सुनिश्चित करेगा। सल्फास के जहर का कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग द्वारा सेल्फास के सम्बन्ध में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है ।