
घोटाले में कार्रवाई को राजस्व विभाग ने भेजा पत्र, डिफेंस कारिडोर मामला अभिषेक प्रकाश सहित 16 अधिकारियों पर होनी है कार्रवाई। सरोजनीनगर में वर्ष 2021-22 में सरकारी जमीन के नाम पर मुआवजे की लूट करने वालों में केवल तहसील के अफसर ही नहीं राजस्व परिषद के कई अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। डिफेंस कारिडोर घोटाला पर योगी की नज़र
ब्यूरो निष्पक्ष दस्तक
लखनऊ। डिफेंस कारिडोर घोटाला पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी नजर बनी हुई है। उन्होंने अपने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है किसी भी लापरवाह अधिकारी को बक्से नहीं। मुख्यमंत्री योगी की छवि प्रदेश में साफ एवं सुंदर है जिसे धूमिल करने के लिए लगातार अधिकारी आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में इन्वेस्टर समिट पर समिट हो रही है। प्रदेश में रोजगार लाने की बात की जा रही है। मुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री कैबिनेट दिन-रात मेहनत कर रही है और अधिकारी उस पर पलीता लगाने से बाज़ है आ रहे हैं। जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी नजर गड़ाए हैं। मुख्यमंत्री का साफ निर्देश है कि किसी भी अधिकारी कर्मचारी एवं नेता को बक्सा नहीं जायेगा। जो भी लापरवाही करता पाया जाए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार उत्तर प्रदेश में किसी प्रकार के भ्रष्टाचार को करने वाले एवं भ्रष्टाचारियों की मदद करने वाले पर कार्यवाही करने के मूड में है। डिफेंस कारिडोर भूमि घोटाले में राजस्व विभाग ने तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश सहित 16 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र संबंधित विभागों को भेज दिया है। अब विभाग अपने-अपने यहां के आरोपित अफसरों के निलंबन सहित अन्य कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिन पहले ही इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
डिफेंस कारिडोर के लिए लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील में भटगांव ग्राम पंचायत की भूमि अधिग्रहण में किए गए घोटाले की जांच मुख्यमंत्री ने राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष डा. रजनीश दुबे से कराई थी। अगस्त 2024 में शासन को भेजी गई 83 पन्नों की जांच रिपोर्ट में अभिषेक प्रकाश सहित कई अन्य अधिकारियों को आरोपित बनाया गया था। डिफेंस क़ारिडोर में इकाइयों की स्थापना के लिए वर्ष 2020-21 ब्रह्मोस मिसाइल के अलावा रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियां भूमि की तलाश कर रही थीं।
अधिकारियों के साथ साठगांठ करके अधिग्रहण प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर कर आवंटियों के नाम जोड़े गए थे। भूखंडों पर जिन लोगों का कब्जा ही नहीं था, उनको भी मालिक बताया था। अधिकारियों ने मालिकाना हक की जांच के बिना ही मुआवजा वितरित कर दिया था। सरोजनी नगर तहसील के तत्कालीन अफसरों ने अपने रिश्तेदारों व नौकरों को भी भूमि दिलाई थी। भूमाफिया और अधिकारियों ने मिलकर करीब 20 करोड़ रुपये का मुआवजा हड़प लिया था।
भूमि घोटाले में तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के अलावा 15 अधिकारियों पर आरोप हैं। इनमें तत्कालीन एडीएम (प्रशासन) अमरपाल सिंह, एसडीएम संतोष कुमार सिंह, शंभू शरण सिंह, आनंद कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार। चार तत्कालीन तहसीलदार विजय कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, उमेश कुमार सिंह तथा मनीष त्रिपाठी। तत्कालीन नायब तहसीलदार कविता ठाकुर, तत्कालीन लेखपाल हरिश्चंद्र व ज्ञान प्रकाश। तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम, जितेंद्र सिंह तथा नैंसी शुक्ला हैं। इनसे मुआवजे की राशि भी वसूली जाएगी। सरोजनी नगर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात रहे कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग ने तहसीलदार से एसडीएम बन चुके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नियुक्ति विभाग से अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, नायब तहसीलदारों को निलंबित करने के साथ ही उन्हें पदावनत करने पर भी विचार किया जाएगा। राजस्व विभाग ने जिलों में तैनात अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित डीएम को पत्र भेजा है।
प्रवर्तन निदेशालय जुटा रहा भूमि अधिग्रहण घपले के भी दस्तावेज
सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी से कमीशन मांगने का मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र लगाने वाली कंपनी से पांच प्रतिशत कमीशन मांगे जाने की जांच के साथ ही डिफेंस कारिडोर के लिए लखनऊ में भूमि अधिग्रहण में हुए घपले से जुड़े दस्तावेज भी जुटा रहा है। सूत्रों का कहना है कि ईडी इस मामले में हुई जांच से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटा रहा है। ईडी इसे भी अपनी जांच में शामिल कर सकता है। इस मामले में निलंबित आइएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। तब वह लखनऊ डीएम के पद पर तैनात थे।
एसएईएल सोलर पी 6 प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र लगाने के निवेश का प्रस्ताव दिया था, जिसे मंजूरी देने के लिए पांच प्रतिशत रकम कमीशन के रूप में मांगे जाने का मामला सामने आया था। शासन ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था। कंपनी के प्रतिनिधि विश्वजीत दत्ता की शिकायत पर कमीशन मांगने के आरोपित निकन्त जैन को गिरफ्तार किया गया था। उसके विरुद्ध गोमतीनगर थाने में एफआइआर दर्ज कर पूरे मामले की छानबीन कराई जा रही है। निकान्त के संपर्क में रहे उसके दो करीबियों के बारे में भी छानबीन की जा रही है। काल डिटेल की पड़ताल में दोनों पर संदेह गहराया था।
पूर्व निजी सचिव भी फर्जीवाड़े में थे शामिल
सरोजनीनगर में वर्ष 2021-22 में सरकारी जमीन के नाम पर मुआवजे की लूट करने वालों में केवल तहसील के अफसर ही नहीं राजस्व परिषद के कई अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। तत्कालीन राजस्व परिषद के चेयरमैन के निजी सचिव की भी भूमिका इस फर्जीवाड़े में सामने आई थी, जिसमें मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
राजस्व चेयरमैन के पूर्व निजी सचिव के खिलाफ चार मई 2022 को कैसरबाग थाने में केस दर्ज किया गया ‘था। उस पर आरोप था कि वह पद का दुरुपयोग करते हुए सरोजनीनगर तहसील के एसडीएम, नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल को धमकी देकर खरीद फरोख्त और वसूली के लिए दबाव बनाता था। कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर व पोस्टिंग में भी सक्रिय रहता था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने शिकंजा कसा तो निजी सचिव फरार हो गया। पुलिस ने उस पर पचास हजार का इनाम भी घोषित किया था। जांच में निजी सचिव के बेटे की भी भूमिका सामने आई थी। वह भी तहसील में जमीनों की खरीद फरोख्त में शामिल था। सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन कानूनगो के साथ उसने सरोजनीनगर तहसील की कई जमीनों में फर्जीवाड़ा किया। पुलिस ने निजी सचिव पर शिकंजा कसते हुए धारा 82 की नोटिस जारी की। इसके खिलाफ वह हाई कोर्ट गया जहां उसे राहत मिली। भटगांव में डिफेंस कारिडोर के लिए घपलेबाजों ने वर्ष 2021 में सरकारी जमीन तक निजी लोगों के नाम दर्ज कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पा। राजस्व रिकार्ड को दरकिनार कर सार्वजनिक उपयोग की सुरक्षित श्रेणी की जमीन को भी दूसरों के नाम दर्ज करा दिया।
प्रशासन को जांच रिपोर्ट का इंतजार
जमीनों की खरीद फरोख्त में शामिल होने के लगे थे आरोप। कैसरबाग कोतवाली में दर्ज हुई थी रिपोर्ट,इनाम भी घोषित।
सरकार ने भटगांव में डिफेंस कारिडोर के लिए घपलेबाजों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन प्रशासन को रिपोर्ट का इंतजार है। अफसरों का कहना है कि रिपोर्ट में जो निर्देश होंगे उनका पालन कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश, एडीएम अमरपाल सिंह, एसडीएम शंभु शरण, आनंद कुमार, देवेंद्र कुमार व संतोष कुमार, तहसीलदार मनीष त्रिपाठी, विजय कुमार, ज्ञानेंद्र सिंह व उमेश कुमार और नायब तहसीलदार कविता ठाकुर, राजस्व निरीक्षक राधेश्याम, जितेंद्र कुमार सिंह व नैंसी शुक्ला तथा लेखपाल हरिश्चंद्र व ज्ञान प्रकाश अवस्थी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जब यूपीडा को बेचा तब खतौनी में नाम तक नहीं था। यूपीडा को जिसने जमीन बेची बिक्री की तिथि तथा उसका नाम भी खतौनी में दर्ज नहीं म था। 14 जून 2021 को विजय कुमार नि को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया गया। विजय ने करीब साढ़े पांच लाख रुपये में जमीन राजू को बेची। इसके बाद राजू ने यही जमीन वरुण कुमार मिश्रा और उनकी पत्नी सरिता सिंह को बेचा, जिसके एवज में करीब 15 लाख रुपये मिले। इसके बाद 13 जुलाई को यूपीडा को यही जमीन है करीब 58 लाख रुपये में बेची गई। डिफेंस कारिडोर घोटाला पर योगी की नज़र