Saturday, February 21, 2026
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। दिल्ली के सत्ता गलियारों से लेकर लखनऊ तक सियासी संदेशों की गूंज सुनाई दे रही है। और इसकी वजह हैं— मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज

राजू यादव

योगी–मोदी मुलाकात: सिर्फ शिष्टाचार या बड़ा सियासी संकेत?

सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब एक घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की। योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के लिए राम मंदिर का प्रतीक चिह्न लेकर पहुंचे। लेकिन इस मुलाकात का संदेश सिर्फ धार्मिक या औपचारिक नहीं था। बैठक के दौरान योगी के हाथ में एक फाइल भी दिखाई दी। सूत्रों के मुताबिक, यह फाइल थी— SIR (State Investment Report) की। यानी उत्तर प्रदेश में निवेश, औद्योगिक प्रगति और आगामी आर्थिक रोडमैप। सूत्र बताते हैं कि योगी ने प्रधानमंत्री मोदी को SIR के आंकड़े, निवेश प्रस्ताव, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी और यूपी के विकास मॉडल की जानकारी दी। योगी ने पीएम मोदी को जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण समारोह का न्योता भी दिया। साथ ही अगले महीने संभावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी को लेकर भी चर्चा हुई।

दिल्ली में भाजपा के दिग्गजों का जमावड़ा —अब जरा समझिए— सीएम योगी दिल्ली में, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक दिल्ली में, डिप्टी सीएम केशव मौर्य दिल्ली में, भाजपा संगठन के शीर्ष नेता दिल्ली में तो सवाल उठना लाज़मी है— क्या सिर्फ औपचारिक मुलाकातें हो रही हैं? या फिर योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार तय हो रहा है? नितिन नबीन से पहली मुलाकात: खास क्यों? सीएम योगी की नितिन नबीन से यह पहली मुलाकात थी। इस बैठक में— यूपी सरकार की उपलब्धियां,आगामी योजनाएं, पंचायत चुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन सूत्र बताते हैं कि असली चर्चा थी— मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक संतुलन।

योगी सरकार 2.0: दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार क्यों जरूरी?

योगी सरकार 2.0 का पहला मंत्रिमंडल विस्तार 5 मार्च 2024 को हुआ था। उस वक्त— ओमप्रकाश राजभर अनिल कुमार, सुनील शर्मा और दारा सिंह चौहान को मंत्री बनाया गया था। लोकसभा चुनाव के बाद— जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि सांसद बने और उन्होंने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं। योगी मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण–योगी सरकार में— 21 सामान्य, 22 पिछड़े, 8 SC, 1 ST, 1 सिख, 1 मुस्लिम मंत्री है। ब्राह्मण, ठाकुर, ओबीसी और दलित— हर वर्ग का गणित बेहद संवेदनशील है। और यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार अब मजबूरी बन चुका है।

ब्रजेश पाठक की मुलाकात के मायने—वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य पहले से ही दिल्ली में मौजूद थे। ब्रजेश पाठक ने मुलाकात की— भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह से की मुलाकात। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है— ब्रजेश पाठक यूपी में भाजपा का ब्राह्मण चेहरा हैं। हाल के दिनों में ब्राह्मण विधायकों की बैठक और उसके बाद उपजा असंतोष इन सब मुद्दों पर भी दिल्ली में चर्चा हुई हो सकती है।

कौन-कौन मंत्री पद की दौड़ में?—सूत्रों के मुताबिक संभावित नाम— भूपेंद्र चौधरी, राजेश चौधरी (मांट विधायक), डॉ. महेंद्र सिंह (MLC), आकाश सक्सेना (रामपुर विधायक) श्रीकांत शर्मा, प्रतीक भूषण सिंह, राजेश्वर सिंह खास बात ये है कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर फैसले लिए जा सकते हैं।

योगी का X पोस्ट भी संकेत दे गया—पीएम मोदी से मुलाकात के बाद योगी ने X पर लिखा— प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई ऊर्जा देता है। राजनीति में शब्द कभी यूं ही नहीं लिखे जाते।

बड़ा सवाल क्या योगी मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल होगा? किस मंत्री की छुट्टी तय है? किस चेहरे की एंट्री पक्की मानी जाए? दिल्ली की इन मुलाकातों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आप क्या मानते हैं? क्या योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार अब तय है? उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज