शासन का आदेश जेल अफसर के ठेंगे पर..!

एक साल में लखनऊ जेल कैंटीन से बिका करीब 74 लाख का सामान। जेल अफसर कर रहे प्रतिमाह लाखों के वारे-न्यारे। जेल अधीक्षक के लोकायुक्त को दिए गए जवाब से हुआ खुलासा।

राकेश कुमार

लखनऊ। जेल अफसरों के लिए शासन का आदेश टेेंगे पर है। इसका खुलासा लखनऊ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक के लोकायुक्त को दिए गए जबाब से हुआ। अधीक्षक ने लोकायुक्त को दिए गए जवाब में कहा कि वर्ष-2021-2022 वित्तीय वर्ष में कैंटीन से 74 लाख 74 हजार 350 रुपए की बिक्री की गई। यह बिक्री नियमों के तहत की गई। ऐसा तब किया गया जब शासन ने जेल कैंटीन से पकी हुई वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है। यह मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर अटकले लगाई जा रही है कि शासन के निर्देशों के बाद भी जेल की कैंटीन का संचालन होने के साथ-साथ में पकी हृृई खानपान की वस्तुओं की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है।

डीआईजी जेल ने कहा जांच होगी- जेल कैंटीन से बिक्री होने वाले सामान की कुल धनराशि का दस फीसद बंदी कल्याण कोष के खाते में जमा किया जाता है। इस धनराशि का उपयोग जेेल के बंदियो के हितार्थ होने वाले कार्यक्रमों में खर्च किया जाता है। जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने बिक्री से हुए लांभांश का कोई जिक्र ही नहीं किया गया।


वर्ष-2015 में गृह विभाग के तत्कालीन सचिव एसके रघुवंशी ने एक आदेश जारी कर कहा था कि प्रदेश की जेलों में तिहाड़ जेल की तर्ज पर कैंटीन में पकी हुृई वस्तुओं (समोसा, खस्ता, छोला भटूरा, छोला चावल, सब्जी, अंडा करी, ऑमलेट, पूड़ी सब्जी समेत अन्य) की बिक्री की जाएगी। इस शासनादेश के बाद जेल अफसरों की बल्ले-बल्ले हो गई। जेल में कैंटीन के माध्यम से जेल अफसर प्रतिमाह लाखों की कमाई करने लगे।

डीआईजी ने कहा जांच होगी – लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी जेल शैलेंद्र मैत्रेय ने कैंटीन में पकी हुई वस्तुओं की बिक्री पर रोक लगे होने की बात तो स्वीकार की लेकिन इसके अलावा और कुछ भी बताने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पहले इसकी जांच की जाएगी।


सूत्रों का कहना है कि इस सूचना शासन को मिलने के बाद वर्ष-2018 में तत्कालीन प्रमुख सचिव कारागार अरविंद कुमार ने एक शासनादेश जारी कर यह निर्देश दिया कि जेल कैंटीन में पकी हुई वस्तुओं की बिक्री को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है। जेल कैंटीन में बंदियों के दैनिक इस्तेमाल होने वाली वस्तुृओं (अंडरवियर, बनियान, रूमाल, पैक्ड आचार, तौलिया, चना, लईया समेत अन्य)की ही बिक्री की जाएगी। बताया गया है कि इस प्रतिबंध के बाद भी राजधानी की जिला जेले में धड़ल्ले से पकी खानपान की वस्तुओं की बिक्री कर प्रतिमाह लाखों रुपये के वारे-न्यारे किए जा रहे है। इस सच की पुष्टि जेल के वरिष्ठ अधीक्षक के लोकायुृक्त का दिए गए जवाब से की जा सकती है।

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