
तो किसान नेता राकेश टिकैत अब पश्चिम बंगाल में भाजपा को हराने का काम करेंगे। टिकैत का यह फैसला लोकतंत्र के हित में है।दिल्ली की सीमाओं पर घटने लगी है किसानों की संख्या।18 फरवरी को रेल रोको आंदोलन।
दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों के प्रमुख नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अब वे पश्चिम बंगाल में किसान पंचायतें करेंगे और उन राजनीतिक दलों को सबक सिखाएंगे जो कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में अप्रैल मई में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। टिकैत की घोषणा से जाहिर है कि वे किसान पंचायतें कर बंगाल में भाजपा को हराने का काम करेंगे।
टिकैत की यह घोषणा लोकतंत्र के हित में है। लोकतंत्र का यही मतलब है कि यदि किसी सरकार का निर्णय गलत लगता हो तो देश की जनता चुनाव में संबंधित राजनीतिक दल को हरवा दे। टिकैत को सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पांडिचेरी में भी किसान पंचायतें करनी चाहिए, क्योंकि इन राज्यों में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं।
यह सही है कि कृषि कानून नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बनाए हैं। यदि राकेश टिकैत इन राज्यों में जाकर किसान पंचायतें करते हैं तो किसानों को भी सच्चाई का पता लगेगा। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में भी चुनाव होने हैं। यदि राकेश टिकैत को अप्रैल मई के चुनावों में सफलता मिलती है तो इसका फायदा उत्तर प्रदेश में भी मिलेगा।
अच्छा हो कि रास्ता जाम करने का तरीका छोड़कर राकेश टिकैत और उनके समर्थक लोकतांत्रिक तरीके से केन्द्र सरकार का विरोध करें। देर से ही सही लेकिन राकेश टिकैत ने सही पहल की है। उम्मीद है कि जो किसान अभी दिल्ली की सीमाओं को जाम कर बैठे हैं, वे राकेश टिकैत की पहल को समझेंगे।
हालांकि अब दिल्ली की सीमाओं पर किसानों की संख्या लगातार घटने लगी है और यातायात भी सामान्य होने लगा है। ऐसे में देखना होगा कि 18 फरवरी का रेल रोको आंदोलन कितना सफल होता है। किसानों के संयुक्त मोर्चा ने कृषि कानूनों के विरोध में 18 फरवरी को दोपहर 12 से 3 बजे तक देश भर में ट्रेनों को रोकने का आह्वान किया है। इस से लाखों यात्रियों को परेशानी हो सकती है, क्योंकि 26 जनवरी के दिल्ली में ट्रेक्टर मार्च में हुई हिंसा से भी भारी नुकसान हुआ था।
अब पता चल रहा है कि हिंसा के पीछे साजिश थी। साजिशकर्ताओं का उद्देश्य किसान आंदोलन की आड़ में भारत को बदनाम करना था। लाल किले पर तिरंगे का अपमान करने वाले भी गिरफ्तार हो रहे हैं। किसानों को भी यह समझना चाहिए कि उनकी आड़ में देश विरोधी तत्व सक्रिय हैं।
























