Tuesday, February 10, 2026
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लखीमपुर खीरी की घटना इतिहास की दुःखद व बर्बर घटनाओं में से एक-शिवपाल यादव

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सरकार की हाउस अरेस्ट की योजना को चकमा देकर लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हुए शिवपाल यादव एवं उनके समर्थकों की इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर ट्रैफिक रोक कर गिरफ्तारी।अन्नदाताओं को स्वतंत्र भारत में अपने स्वर को मुखर करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे दुःखद व बर्बर घटनाओं में से एक।

लखनऊ। प्रगतिशील समाजवादी(लोहिया) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को लखनऊ स्थित उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया था। भारी पुलिस बल और बैरीकेडिंग के बावजूद पुलिस को चकमा देकर प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हो गए। हालांकि, शिवपाल यादव और उनके समर्थकों के विशाल काफिले को शहीद पथ-हाईकोर्ट होते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर ट्रैफिक रोक कर गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। हिरासत में लेने के बाद प्रसपा अध्यक्ष और उनके समर्थकों को पुलिस लाइन ले जाया गया । जहां लगभग दोपहर 2:30 बजे लखनऊ प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को सम्बोधित करते हुए चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।


ज्ञापन की चार सूत्रीय मांग निम्नवत है-

  1. गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त किया जाए एवं उनके पुत्र को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
  2. दोषी पुलिसकर्मियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए।
  3. घटना की निष्पक्ष व न्यायिक जांच की जाए।
  4. मृतकों के परिजनों को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए एवं सरकारी नौकरी दी जाए।

प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश के सभी जनपदों में लखीमपुर खीरी में हुए अन्नदाताओं के नरसंहार के विरुद्ध शांतिपूर्ण सत्याग्रह करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने का आह्वान किया है।शिवपाल यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे दुःखद व बर्बर घटनाओं में से एक है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे अन्नदाताओं को स्वतंत्र भारत में अपने स्वर को मुखर करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। सत्ता अन्नदाताओं के सत्याग्रह को निर्ममता से कुचल रही है। पहले किसानों पर लाठीचार्ज व वाटर कैनन का प्रयोग किया गया और अब किसानों को रौंदने की बर्बरता की गई।