Wednesday, February 25, 2026
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आदिपुरुष से बेहतर हमारे महापुरुष

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विनोद यादव

आदिपुरुष से बेहतर तो हमारें महापुरुष हैं आखिर इस मुद्दे पर बहस क्यूं जो खुद कविता चोरी का आरोप झेल रहा हो।महापुरूषों को पढ़ने वाली जमात आदिपुरुष के पीछें क्यूं परेशान हैं ये समझ में नहीं आता ,आज के वर्तमान काल में तथ्यों और मुद्दों से भटकाव के अनगिनत मार्ग आपकों मिल जाएगें इसलिए जरूरी हैं कि आप तार्किक बने रहें वरिष्ठ पत्रकार नीरज भाई पटेल कहते हैं आप चेतना से लैस रहिए मानवतावादी दृष्टिकोण रखतें हुए सजग और जागरूक बने रहें। हमें जरूरत किसी काल्पनिक पात्र कहानियों से ज्यादा पेरियार ,फूले ,बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ,राम स्वरूप वर्मा ,छात्र पति शिवाजी ,वीरांगना अवंती बाई लोधी, समाजिक क्रांति के महानायक संतराम बीए जी ,माता रमाबाई अंबेडकर , जाईबाई चौधरी ,झलकारी बाई, ऊधादेवी पासी ,बिरसा मुंडा,पेरियार ईबी रामास्वामी नायकर ,मानयवर काशीराम ,डा़ राम मनोहर लोहिया ,अहिल्याबाई होलकर , बीपी मंडल , शहीदे आजम भगत सिंह ,सुखदेव ,राजेंद्र लहडी ,सरदार रोशन सिह ,असफाक उल्ला खां , चंद्र शेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों के जब हम विचारों को पढ़ेंगें तो आदि क्या अनादि पुरुष से बेहर हमारें महापुरुषों के द्वारा लडी़ गयी लडाईयां तो पढ़ने को मिलेगी ही और हाशिए पर रहने वाले समाज में अमूलचूल परिवर्तन के मार्ग को भी दिखाया हैं ।

हम जितना भटकाव के रास्ते पर चलगे मार्ग उतना ही कठिन होता जाएगें हमें इस बात का हमेशा अंदेशा रहना चाहिए। हम सभी के लिए नहीं कह रहें हैं बजार में तरह तरह के तेल बिक रहें रहें हैं जिसकों जो पसंद आए आपने बालों में लगाकर चंपी करें हम तो सिर्फ उन्हें आगाह कर रहें हैं जो सरसों की खेती करके खुद कड़वा तेल (सरसों ) का न लगाकर महकने वाले तेल के पीछे भग रहें हैं तात्पर्य हैं हम मिट्टी से जुडें हुए लोग हैं हमें उनको पढ़ना हैं जिन्होंने हमें सिंचित किया । किसी की भावना आहत हो मैं ऐसा नहीं चाहता नाटक ,नौटंकी , फिल्म ,और कवि सम्मेलन सिर्फ कुछ छडों के लिए लिए अच्छे हो सकते हैं मनोरंजन की दृष्टि से मगर जिस दिन शोषित ,वंचित ,पीडित ,दलित ,पिछडे़ ,आदिवासी तबके के लोग ऐसे महापुरुषों के बारें में किताबें खरीदकर पढ़ लेगें तो उन्हें इस बेवजह की बहस में पड़ने की जरूरत नहीं पडेगी । लिखने का बेशक असर न पड़ता हो लेकिन पढ़ने का असर खुद व खुद आपके चेहरे पर दिखाई देने लगता हैं । इसीलिए कहते हैं सजग रहें जागरूक बनें और मानवतावादी दृष्टिकोण रखतें हुए चेतना से लैस रहिए ।