Sunday, January 18, 2026
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जानें कैसे होगी धनतेरस पर धन वर्षा

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आचार्य गिरिजेश धर

सोने को सौभाग्य, समृद्धि, बहुतायत और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वास्तव में लोग सोने को उसमें धन की देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में देखते हैं। इसलिए दिवाली के पहले लक्ष्मी पूजन से पहले सोने के आभूषण खरीदने की प्रथा है। धनतेरस पर बर्तन व अन्‍य कई तरह की चीजें खरीदने की परंपरा और मान्‍यता है। लेकिन इस दिन सोने की खरीदारी करना सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है। सोना खरीदने के पीछे पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है।धनतेरस का त्योहार हिंदुओं के मुख्य त्योहारों में से एक है। यह दिवाली के पूरे पांच दिनों के त्योहारों की श्रृंखला में सर्वप्रमुख है। यूं कहा जाए कि दिवाली के त्योहार की शुरुआत ही धनतेरस के दिन से होती है। कार्तिक मास की त्रयोदसी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस त्योहार पर मुख्य रूप से भगवान् धन्वन्तरि का जन्मदिवस मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन ही भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन में बाहर आये थे। 

दीपावली का पर्व आने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। वहीं इस बार दिवाली से पहले मनाया जाने वाला पर्व धनतेरस 2 नवंबर को है। कार्तिक मास के कृष्‍णपक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के त्‍योहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर, मां लक्ष्‍मी, धन्‍वतंरि और यमराज की पूजा की जाती है। धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की उदयव्यापिनी त्रयोदशी को मनाई जाती है। यहां उदयव्यापिनी त्रयोदशी से मतलब है कि, अगर त्रयोदशी तिथि सूर्य उदय के साथ शुरू होती है, तो धनतेरस मनाई जानी चाहिए।
धन तेरस के दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में यमराज को दीपदान भी किया जाता है। अगर दोनों दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल का स्पर्श करती है अथवा नहीं करती है तो दोनों स्थिति में दीपदान दूसरे दिन किया जाता है।

इस दिन सोने-चांदी और घर के बर्तनों की खरीदारी करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन की गई खरीदारी आपको बहुत लाभ पहुंचा सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर कुछ चीजें ऐसी है जिन्हें खरीदने पर मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती है और घर में धन की कोई कमी नहीं होती है। तो आइए जानते हैं धनतेरस पर क्या खरीदने से मां लक्ष्‍मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पीतल के बर्तन: जो लोग सोने-चांदी के सिक्के नहीं खरीद सकते वो लोग आज पीतल का कोई भी बर्तन खरीदें और उसमें कुछ मीठा या चावल के दाने डालकर लाइये। धनतेरस पर किसी चीज़ से भरा हुआ पीतल का बर्तन लाना बड़ा ही अच्छा माना जाता है। दरअसल इसके पीछे एक मान्यता छुपी हुई है। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान धन्वन्तरि का अवतरण हुआ था, तब वो अपने दो बायें हाथों में से एक में अमृत से भरा पीतल का कलश लिये हुए थे और उनके बाकी हाथों में शंख, चक्र और औषधी विद्यमान थी, लिहाजा इस दिन पीतल का बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ होता है।
झाड़ू: झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू को घर लाने से स्वयं मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। झाड़ू से हम अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और घर का सारी नकारात्‍मकता दूर करते हैं। यही कारण है कि झाड़ू का महत्व बेहद ही खास माना जाता है।

अक्षत: धनतेरस के दिन अक्षत यानी चावल को भी घर लाना चाहिए। शास्‍त्रों में बताया गया है कि अन्‍न में चावल यानी कि अक्षत को सबसे शुभ माना जाता है। अक्षत का मतलब होता है धन संपत्ति में अनंत वृद्धि। इसलिए धनतेरस के दिन अक्षत लाने से आपके धन में वृद्धि होती है।

सोने-चांदी के सिक्के: आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार मां लक्ष्मी की कृपा से अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिये और अपने बिजनेस में पैसों की आवाजाही को बढ़ाने के लिये धनतेरस को लक्ष्मी-गणेश जी का चित्र बना हुआ सोने या चांदी का सिक्का लाकर, उसे संभालकर अपने पास रखना चाहिए और दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के समय इसे लकड़ी के पाटे पर स्थापित करके इसकी विधि-पूर्वक पूजा करनी चाहिए और बाद में इसे अपने घर या ऑफिस की तिजोरी या मन्दिर में स्थापित करना चाहिए। इससे आपके घर और बिजनेस की आर्थिक स्थिति अच्छी होगी और आपको लाभ ही लाभ मिलेंग। मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश जी खरीदना भी बड़ा ही शुभ होता है।

धनिया: धनतेरस के दिन धनिया खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन धनिया लाकर मां लक्ष्मी को अर्पित करनी चाहिए और इसेमें से कुछ दाने गमले में भी बो देने चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसको बोने पर अगर धनिया के पौधे निकलते हैं तो पूरी साल आपके घर समृद्धि बनी रहती है।

धनतेरस पूजा 2021 शुभ मुहूर्त-  02 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक का है। वहीं वृषभ काल शाम 6.18 मिनट से रात 8.14 मिनट तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6.18 मिनट से रात 8.11मिनट तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6.18 मिनट से रात 8.11 मिनट तक रहेगा।