
आज हम एक बेहद गंभीर, डरावनी और लोकतंत्र को झकझोर देने वाली सच्चाई आपके सामने रखने आए हैं। बलरामपुर के माफिया रिजवान जहीर और रमीज नेमत, जो कानून को चुनौती दे रहे हैं, गवाहों को धमका रहे हैं और खुलेआम कह रहे हैं — “अब हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। क्या अब कोई माफिया नया अपराध करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से इजाजत लेगा? अगर ऐसा है, तो फिर आम आदमी के लिए कानून आखिर है किसके लिए?
बलरामपुर। आज हम एक ऐसे मुद्दे को लेकर आपके सामने आए हैं, जो सिर्फ एक जिले या एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था और आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एक तरफ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है, तो दूसरी तरफ बलरामपुर के माफिया रिजवान जहीर और रमीज नेमत जैसे लोग कानून को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। महंगे वकीलों, राजनीतिक संरक्षण और धनबल के सहारे ये लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, सवाल ये है कि क्या अब माफिया तय करेंगे कि कानून कब और कैसे चलेगा? आज की यह कहानी डर, दहशत और न्याय की लड़ाई की सच्चाई आपके सामने रखने वाली है।
हम सरकार और पुलिस प्रशासन का धन्यवाद करते हैं, जिनकी सक्रियता से इन माफियाओं के काले कारनामे सामने आए। लेकिन आज सवाल ये है — क्या माफिया की दौलत, कानून से बड़ी हो गई है? रिजवान जहीर और रमीज नेमत ने देश के सबसे महंगे वकीलों को खड़ा कर माननीय सुप्रीम कोर्ट से ऐसा आदेश हासिल कर लिया, जिसमें कहा गया — “बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के इनके खिलाफ नई FIR दर्ज न हो।” अब सोचिए… क्या कोई अपराधी नया जुर्म करने से पहले कोर्ट से परमिशन लेगा? और जब ये लोग खुलेआम गवाहों को धमका रहे हों, तो पुलिस क्या हाथ पर हाथ धरे बैठी रहे?
इनका दुस्साहस इसलिए भी बढ़ा हुआ है क्योंकि रिजवान जहीर को समाजवादी पार्टी का खुला संरक्षण बताया जा रहा है। वह अपनी बेटी जेबा रिजवान को विधायक बनाने का सपना देख रहा है, ताकि सत्ता की आड़ में अपने अपराध साम्राज्य को और फैलाया जा सके। सोचिए ज़रा — एक तरफ विधायक बनने का सपना, और दूसरी तरफ गवाहों के सिर पर मौत की तलवार! हत्या, 302, 307, गैंगस्टर एक्ट — इनकी क्रिमिनल हिस्ट्री खुद गवाही देती है कि ये कितने खतरनाक हैं। आज वादी और गवाह दहशत में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि अगली बारी कहीं उनकी न हो।
अगर माफिया धन और राजनीतिक रसूख के बल पर न्याय व्यवस्था को अपने हिसाब से मोड़ने लगे, तो आम आदमी का भरोसा कानून से उठ जाएगा। हम न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन सच छिपाकर लिए गए आदेश अपराधियों के हौसले बुलंद कर रहे हैं। हमारी साफ और सीधी मांगें हैं — सरकार सुप्रीम कोर्ट में इन माफियाओं की पूरी और भयावह क्रिमिनल हिस्ट्री मजबूती से रखे। पीड़ितों और गवाहों को तत्काल विशेष सुरक्षा दी जाए। राजनीतिक संरक्षण और काली कमाई से न्याय को प्रभावित करने की उच्च स्तरीय जांच हो।
आज सवाल सिर्फ रिजवान जहीर और रमीज नेमत का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जिसे धनबल और राजनीतिक संरक्षण के सहारे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। अगर आज माफिया कानून से बड़ा हो गया, तो कल आम आदमी के लिए न्याय सिर्फ किताबों में रह जाएगा। हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं और इस लड़ाई को आख़िरी सांस तक लड़ेंगे। प्रशासन और न्याय व्यवस्था से हमारी अपील है—गवाहों को सुरक्षा दी जाए, सच्चाई को दबने न दिया जाए और माफियाओं को उनके अंजाम तक पहुँचाया जाए। क्योंकि अगर आज इंसाफ नहीं मिला, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। क्योंकि डर चुप रहने से बढ़ता है, और न्याय बोलने से।
























