
अखिलेश यादव ने कहा है कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। क़ानून की भाषा भी साफ़ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है। न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी। देश में संविधान है, तमाम कानून है, इसके बाद भी समय-समय पर भेदभाव और अन्याय होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में दोशी नहीं बचे और निर्दोश के साथ अन्याय न हो। सच्चे न्याय में किसी के साथ अन्याय नहीं
अखिलेश यादव ने कहा कि 2012 में भी यूजीसी के रेगुलेशन आये थे। उसमें क्या कमी रही? विश्वविद्यालयों में क्या-क्या व्यवहार हुए थे। 2012 के रेगुलेशन से क्या सीखा। संविधान कहता है कि कहीं भेदभाव न हो। भाजपा सरकार नौजवानों को नौकरी, रोजगार नहीं दे रही है। मंहगाई बढ़ा रही है। बढ़ती मंहगाई, बेरोजगारी से आम जनता त्रस्त है। मंहगाई से किसान, मजदूर सभी वर्ग परेशान है। खेती का लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है। किसानों की आय दुगुनी नहीं हुई। किसानों का फसलों का सही दाम नहीं मूल्य मिल रहा है। बिचौलिए हावी है। भाजपा सरकार जनता से किया गया कोई वादा पूरा नहीं कर पायी। सच्चे न्याय में किसी के साथ अन्याय नहीं























