

मनुष्य के जीवन में दो ही मार्ग होते हैं — चिन्ता और चिन्तन। अधिकांश लोग चिन्ता के बोझ तले जीवन बिताते हैं, लेकिन कुछ ही लोग चिन्तन के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोज पाते हैं। आख़िर क्यों कुछ लोग हर परिस्थिति में मजबूत बने रहते हैं, और कुछ छोटी-सी समस्या में भी टूट जाते हैं? आज मैं आपसे एक ऐसा विषय साझा करने जा रहा हूँ… जो हर इंसान के जीवन से जुड़ा है। मनुष्य के जीवन में दो मार्ग होते हैं — चिन्ता और चिन्तन। अधिकांश लोग चिन्ता में जीवन जीते हैं… और कुछ ही लोग चिन्तन के मार्ग पर चलकर समाधान खोज पाते हैं। सवाल यह है — आप किस मार्ग पर चल रहे हैं?—चिन्ता स्वयं में एक मुसीबत है। यह हमारे मन और मस्तिष्क को जकड़ लेती है।
आसान से आसान कार्य भी चिन्ता के कारण कठिन लगने लगता है। लेकिन चिन्तन… वही शक्ति है जो कठिन से कठिन कार्य को भी सरल बना देती है। जीवन में हमें इसलिए पराजय नहीं मिलती कि कार्य बहुत बड़ा था। हम इसलिए हार जाते हैं क्योंकि हमारे प्रयास छोटे थे। हमारी सोच जितनी छोटी होगी, हमारी चिन्ता उतनी ही बड़ी होगी। और हमारी सोच जितनी बड़ी होगी, हमारा कर्म उतना ही श्रेष्ठ होगा।
मान लीजिए आपके सामने कोई समस्या आ गई। तो व्यक्ति घबराता है, पूरी रात जागकर चिन्ता करता है, हर संभावना में डर खोजता है।—-दूसरा व्यक्ति बैठता है,—-शांत मन से स्थिति का विश्लेषण करता है और समाधान ढूँढता है। पहला व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है। दूसरा व्यक्ति मजबूत हो जाता है। अंतर सिर्फ एक है —चिन्ता बनाम चिन्तन। चिन्तन का अर्थ है — विवेकपूर्ण निर्णय। समस्या से भागना नहीं, समस्या के सामने डट जाना। याद रखिए — समस्या का डटकर मुकाबला करना आधी सफलता प्राप्त कर लेना है। चिन्तनशील व्यक्ति के लिए कोई न कोई मार्ग अवश्य निकल आता है। क्योंकि उसके पास घबराहट नहीं,विवेक होता है।
यदि आप आध्यात्मिक सोच रखते हैं… तो चिन्तन का सबसे पवित्र मार्ग है — ईश्वर का स्मरण। जब मन विचलित होता है, प्रभु नाम का स्मरण षडविकारों को शांत कर देता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर — ये सब मन को भ्रमित करते हैं। लेकिन विश्वास और प्रार्थना मन में विवेक उत्पन्न करती है। और जहाँ विवेक है… वहाँ चिन्ता का स्थान नहीं होता। सोचिए… जरा शांत मन से क्या हम सच में इसलिए हारते हैं क्योंकि लक्ष्य बड़ा था या नहीं।
हम इसलिए हारते हैं क्योंकि हमने अपने प्रयासों को बड़ा नहीं बनाया। जब सोच छोटी होती है तो समस्याएँ पहाड़ बन जाती हैं। जब सोच बड़ी होती है तो पहाड़ भी रास्ता बन जाते हैं। यही जीवन का सत्य है। यही सफलता का मंत्र है।
चिन्ता एक ऐसी मुसीबत है जो सरल कार्य को भी कठिन बना देती है। वहीं चिन्तन वही शक्ति है जो कठिन से कठिन परिस्थिति को भी सहज बना देती है। हम जीवन में इसलिए पराजित नहीं होते कि लक्ष्य बहुत बड़ा था… हम इसलिए हार जाते हैं क्योंकि हमारे प्रयास छोटे रह जाते हैं। हमारी सोच जितनी छोटी होगी, हमारी चिन्ताएँ उतनी ही बड़ी होंगी। और हमारी सोच जितनी बड़ी होगी, हमारे कर्म का स्तर उतना ही श्रेष्ठ होगा। जब समस्या आती है, तो दो रास्ते होते हैं — घबराकर चिन्ता करना… या शांत रहकर चिन्तन करना। चिन्ता हमें कमजोर बनाती है। चिन्तन हमें समर्थ बनाता है। जहाँ विवेक है, वहाँ समाधान है।
यदि जीवन में आगे बढ़ना है… सफल होना है… तो चिन्ता को छोड़िए और चिन्तन को अपनाइए। क्योंकि — चिन्ता हमें कमजोर बनाती है। चिन्तन हमें समर्थ बनाता है। चिन्ता हमें डराती है। चिन्तन हमें रास्ता दिखाता है। चिन्ता हमें बाँधती है।—चिन्तन हमें आगे बढ़ाता है। आज से निर्णय लीजिए — आप चिन्ता में नहीं, चिन्तन में जीएँगे। आप अपने जीवन में किस बात को लेकर चिन्ता करते हैं? और उसे चिन्तन में कैसे बदल सकते हैं? क्या आप आज से चिन्ता छोड़कर चिन्तन अपनाने को तैयार हैं?
























