Saturday, January 17, 2026
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वन संरक्षक ही बने वनभक्षक

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वन संरक्षक ही बने वनभक्षक
वन संरक्षक ही बने वनभक्षक

मुख्यमंत्री के वृक्षारोपण महाअभियान पर पलीता लगा रहे वन अफसर…! वन संरक्षक ही बन गए वनभक्षक। रेंजर, वन दारोगा व वन रक्षक की साठगांठ से चल रहा हरे पेड़ों पर आरा। वन संरक्षक ही बने वनभक्षक

आर.के.यादव
आर. के. यादव


लखनऊ। योगी सरकार के वृक्षारोपण-महाअभियान-2023 पर कोई और नहीं वन विभाग के अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। आम जनमानस को स्वच्छ वातावरण देने के लिए चलाए गए इस अभियान के दौरान ही वन विभाग के अधिकारी भू-माफियाओं से सांठगाठ करके हरे पेड़ों को कटवाने में जुटे हुए है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आम की पहचान बनाने वाले मलिहाबाद में भू-मफियाओं ने बागों में लगे सैकड़ों पेड़ों को काटकर प्लाटिंग कर डाली। कुछ ऐसा ही हाल सरोजननीनगर, मोहनलालगंज में देखने को मिल रहा है। मजे की बात यह है कि हरे पेड़ों की बेतरतीब कटान से विभाग के आला अफसर अंजान बने हुए हैं।


पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने और आम जनमानस को स्वच्छ वातावरण देने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने मानसून सत्र में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वृक्षारोपण अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के तहत वृक्षारोपण महाअभियान-2023 चलाया गया। अभियान के तहत प्रदेश में 35 करोड़ पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस निर्देश के तहत बड़ी संख्या में पौधे रोपित भी किए गए। प्रदेश के वन राज्यमंत्री ने रोपित पौधों को संरक्षित रखने के लिए अधिकारियों को जियो टैगिंग किए जाने सरीखे तमाम निर्देश भी दिए। इन निर्देशों का अनुपालन कराना तो दूर की बात वन विभाग के अधिकारी पौधों को संरक्षित रखने के बजाए हरे पेड़ों को कटवाने में जुटे हुए हैं।

परमिट लेकर काटे गए होंगे हरे पेड़ -राजधानी के ग्रामीण इलाकों में घड़ल्ले से हो रही हरे पेड़ों की कटान के संबंध में सहायक वन संरक्षक हरिलाल से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि हरे पेड़ों की कटान के लिए परमिट लिया गया होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक से 25 पेड़ तक काटने की अनुमति दी जाती है। सैकड़ों पेड़ काटे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी अधिकारियों के खिलाफ जिम्मेदारी तय की जाएगी। उधर लखनऊ के डीएफओ रवि कुमार से सीयूजी (7839435107) नंबर पर दर्जनों बार बातचीत करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। मंडल की मुख्य वन संरक्षक रेनू सिंह से भी कई बार प्रयास के बाद बातचीत नहीं हो पाई। इसी प्रकार डीएफओ के निजी सचिव सुभाष ने भी कई बार प्रयास के बाद भी फोन नहीं उठाया।

मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी के मलिहाबाद, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब और मोहनलालगंज के ग्रामीण क्षेत्रों में हरे पेड़ धड़ल्ले से काटे जा रहे है। सूत्रों का कहना है कि आम उत्पादन के लिए अंतरराष्टरीय स्तर पर ख्याती प्राप्त करने वाले मलिहाबाद में भू-माफिया वन विभाग के रेंजर (वनाधिकारी ), वन दारोगा और वनरक्षकों से साठगांठ करके प्लाटिंग के लिए आम के बाग में लगे हरे पेड़ कटवाने में जुटे हुए। इन हरे पेड़ों की कटान के एवज में वनाधिकारी भू-माफियाओं से मोटी रकम वसूल रहे है। कुछ ऐसा ही हाल मोहनलालगंज के खुजौली के आसपास, सरोजनीनगर के बंथरा से सटे कटी बगिया, भटगांव व आसपास के क्षेत्रों में भी देखा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि बीते करीब तीन माह के अंतराल में इन क्षेत्रों में हजारों की संख्या में हरे पेड़ काटकर प्लाटिंग कर दी गई है। इन हरे पेड़ों के कटान की पुष्टि..ï राजस्व खसरा अभिलेखों के साथ ही सेटलाइट और गुगल मैप से आसानी से की जा सकती है। मजे की बात यह है कि विभाग के उच्च अधिकारी सब कुछ जानकर अंजान बने हुए हैं। वन संरक्षक ही बने वनभक्षक