Sunday, January 18, 2026
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आजाद भारत की आत्मा यानि “पवित्र संविधान” पर सीधा हमला

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संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भले ही सत्ता कितनी ही ताकतवर क्यों न हो, दृढ निश्चय एवं एकजुटता से उसको पराजित किया जा सकता है-लोकदल

बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के परिनिर्वाण दिवस पर सर्वप्रथम लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह जी ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया श्री सिंह ने लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ के कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज दलितों की बात और होगी. आज उनके हजारों संगठन बाबा साहब के अवदानों को याद करने और अपनी मुक्ति का नया संकल्प लेने के लिए जगह-जगह कार्यक्रम जातियों को वोट के रूप में साधने के लिए सभाएं आयोजित करेंगे : मार्च निकालेंगे. लेकिन सबकुछ के बावजूद ऐसा लगता है जिन अधिकारों से बाबा साहेब ने उन्हें लैस किया, वह उनका सपना बन गया।क्योंकि आज देश का संविधान खतरे में है संविधान बदलने की साजिश चल रही है मोदी सरकार के सत्ता में आते ही अचानक संविधान विरोधी गतिविधियों में तेजी आ गयी। संवैधानिक संस्थाओं में संविधान की भावना के विपरीत नियुक्तियां की गई।

सरकार के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगडे ने तो गजब बात संसद में कह दी की हम यहाँ संविधान बदलने आये हैं।’’ मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े द्वारा एक जनसभा में दिया गया यह बयान आजाद भारत की आत्मा यानि “पवित्र संविधान” पर सीधा हमला था| यह पहली बार नहीं है जब भाजपा और ऐसे विचारों की पार्टियां बसपा और सपा ने  विभाजनकारी विचारधारा ने देश के संविधान की भावना को खंडित करने का दुस्साहस दिखाया है। सरकार के सत्तारूढ़ होते ही दलित, अल्पसंख्यक, महिलाओं के विरुद्ध अत्याचारों और बंदिशों में अप्रत्याशित वृद्धि चिंताजनक है। आखिर मोदी सरकार संविधान को क्यों बदलना चाहते है? श्री सिंह ने कहां की देश ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मामले में सौ का आंकड़ा पार कर चुका है। हम बांग्लादेश पाकिस्तान से भी पीछे जा चुके हैं। प्रेस फ्रिडम इंडेक्स, डेमोक्रेसी इंडेक्स के आंकड़े शर्मानाक स्तर पर जा चुका है। हैपिनेस इंडेक्स में देश के सिर्फ दो, चार पूंजीपति मित्र खुश नजर आ रहे हैं। पर्यावरण का अंदाजा गैस चेम्बर बन चुकी देश की राजधानी दिल्ली से लगाया ही जा सकता है। बेरोजगारी तो युवाओं का गहना बन चुका है…. बेरोजगार होना न्यू नॉर्मल है। इसलिएअब समय आ गया है संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भले ही सत्ता कितनी ही ताकतवर क्यों न हो, दृढ निश्चय एवं एकजुटता से उसको पराजित किया जा सकता है।

इसलिए विख्यात शायर दुष्यंत कुमार ने लिखा है कि:-


कैसे आकाश में सुराख़ हो नहीं सकता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।।