Saturday, February 28, 2026
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महर्षि दयानंद सरस्वती को अंशिका ने अर्पित की नृत्यांजली

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महर्षि दयानंद सरस्वती को अंशिका ने अर्पित की नृत्यांजली
महर्षि दयानंद सरस्वती को अंशिका ने अर्पित की नृत्यांजली

महर्षि दयानंद सरस्वती को अंशिका ने अर्पित की नृत्यांजली।सपना गोयल एवं नृत्यांगना अंशिका त्यागी, डॉ. दरबारी लाल अस्थाना सम्मान से हुईं अलंकृत।

अजय सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना ट्रस्ट की ओर से महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती माह के पावन अवसर पर प्रेरक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन शनिवार 28 फरवरी को चिनहट स्थित “सनातन धाम लॉन” समक्ष रजत डिग्री कॉलेज में किया गया।

इसमें नृत्यांगना अंशिका त्यागी के दल द्वारा “मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम” पर आधारित विभिन्न सतरंगी भाव नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं। इस अवसर पर वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना सम्मान से वरिष्ठ समाज सेविका सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल और नृत्यांगना अंशिका त्यागी को अलंकृत भी किया गया।

सांस्कृतिक संध्या में “जनमे अवध में राम मंगल गाओ रे”, “ठुमक चलत राम चंद्र”, “हम कथा सुनाते हैं” और “राम आवे अवध की ओर” भाव नृत्य आकर्षण का केन्द्र बने।

नृत्यांगना अंशिका त्यागी के साथ शची द्विवेदी, दिशा गुप्ता, सोनाली गौड़, अभय कुमार, विशाल गुप्ता और अरुण सोनकर ने मनभावन नृत्य कर प्रशंसा हासिल की। कार्यक्रम का कुशल संचालन नीशू त्यागी ने किया।

सह-संयोजिका रत्ना अस्थाना ने बताया कि आधुनिक भारत के चिन्तक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने ही सबसे पहले साल 1876 में ‘स्वराज्य’ का नारा दिया था। 12 फ़रवरी 1824 को जन्मे महर्षि ने सत्य, वैदिक ज्ञान, सामाजिक सुधार और शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा दी थी। डॉ.दरबारी लाल अस्थाना के संदर्भ में बताया कि उनका जन्म 24 जुलाई 1905 को आगरा में हुआ था।

साल 1930 में वृंदावन के प्रेम महाविद्यालय के छात्रों के साथ जब वह सत्याग्रह आन्दोलन कर रहे थे तब उन्हें 9सी-12 धारा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। 4 अगस्त 1930 को उन्हें छह महीने के कठोर कारावास का दंड सुनाया गया था वहीं 11 अक्टूबर 1930 में उन्हें मथुरा जेल से सीतापुर जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने देहरादून में रहकर मेडिकल प्रैक्टिस आरंभ की।

इसके बाद वह लखनऊ आ गए और साल 1954 से उन्होंने उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि लखनऊ केंद्र के संचालक के रूप में लम्बे समय तक कार्य किया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी का स्वर्गवास 3 मार्च 1985 को लगभग 80 वर्ष की आयु में हो गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 15 अगस्त 1972 को ताम्रपत्र से सम्मानित किया था।