Saturday, February 28, 2026
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एआई डॉक्टरों की दक्षता बढ़ाने का सशक्त माध्यम

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एआई डॉक्टरों की दक्षता बढ़ाने का सशक्त माध्यम
एआई डॉक्टरों की दक्षता बढ़ाने का सशक्त माध्यम

त्रिनाथ शर्मा

लखनऊ। AIDAA Lucknow City Branch द्वारा एयरवे मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं सिमुलेशन की भूमिका विषय पर एक महत्वपूर्ण सीएमई (Continuing Medical Education) एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर क्षेत्र के विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सिमुलेशन तकनीक की बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का उद्घाटन Prof. Sonia Nityanand, कुलपति, King George’s Medical University, द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. मोनिका कोहली (विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया, केजीएमयू), डॉ. सोहन सोलंकी (टाटा मेमोरियल), डॉ. तन्मय तिवारी तथा डॉ. हेमलता सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित तकनीक एयरवे मैनेजमेंट के दौरान रोगी की सुरक्षा को कई गुना सुदृढ़ कर सकती है। यह कठिन एयरवे की पूर्वानुमान (Prediction), रियल-टाइम डेटा विश्लेषण तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हो रही है। एआई युक्त मॉनिटरिंग सिस्टम रोगी के शारीरिक मानकों का सूक्ष्म विश्लेषण कर संभावित जटिलताओं की पूर्व पहचान करने में सक्षम हैं।

कार्यशाला में सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन लैब में चिकित्सकों को जटिल परिस्थितियों का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा सकता है, जिससे वास्तविक ऑपरेशन थिएटर में त्रुटियों की संभावना कम होती है। सिमुलेशन तकनीक टीमवर्क, संचार कौशल तथा संकट प्रबंधन क्षमता को भी सुदृढ़ बनाती है।

डॉ. विशाल देव, Indian Council of Medical Research, ने एनेस्थीसिया में एआई के जिम्मेदार एवं वैज्ञानिक उपयोग पर बल देते हुए इसे एक उन्नत सहायक तकनीक बताया, जो उपचार की गुणवत्ता को मानकीकृत (Standardize) करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

एआई डॉक्टरों की दक्षता बढ़ाने का सशक्त माध्यम
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डॉ. तन्मय तिवारी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता एवं क्लिनिकल निर्णय को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग नियमित प्रशिक्षण, सतत शिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वित रूप से किया जाना चाहिए। मानव अनुभव और तकनीकी बुद्धिमत्ता का संतुलित समन्वय ही भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एआई आधारित निर्णय-सहायता प्रणाली एवं टेली-सपोर्ट तकनीक के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली एनेस्थीसिया एवं एयरवे सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, रेजिडेंट डॉक्टरों एवं स्नातकोत्तर छात्रों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उक्त कार्यशाला में डॉ. अपर्णा शुक्ला, डॉ. दिनेश कौशल, डॉ. मनोज चौरसिया, डॉ. मनोज गिरी, डॉ. आशीष कन्नौजिया सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक उपस्थित रहे।