
पश्चिम बंगाल में फुरफुरा शरीफ के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से कांग्रेस के गठबंधन पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा को ऐतराज।राहुल गांधी ने तो पहले ही कथा कि उत्तर भारतीयों में समझ की कमी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में ममता बनर्जी को हराने के लिए कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टियों के साथ साथ फुरफुरा शरीफ के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडिया सेम्युलट फ्रंट (आईएसएफ) से भी गठबंधन किया है। आईएसएफ से गठबंधन पर कांग्रेस के दिग्गज नेता आनंद शर्मा ने ऐतराज जताया है।
राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य रह चुके और पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा का कहना है कि आईएसएफ जैसे संगठन के साथ गठबंधन करना कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ है। इससे चुनाव में कांग्रेस को नुकसान होगा। वहीं लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि है कि आईएसएफ से गठबंधन का फैसला उनका अकेले का फैसला नहीं है।
पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की सहमति भी रही है। यानि आईएसएफ से गठबंधन से पहले कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से पूछा गया है। मौजूदा समय में अधीर रंजन चौधरी गांधी परिवार के प्रति वफादार नेताओं में एक हैं, इसलिए उन्हें लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता के साथ साथ पश्चिम बंगाल कांग्रेस का अध्यक्ष भी बना रखा है। 28 फरवरी को गठबंधन की जो संयुक्त चुनावी सभा हुई उसमें राहुल गांधी की ओर से अधीर रंजन चौधरी ने ही उपस्थिति दर्ज करवाई।
आनंद शर्मा को अब भले आईएसएफ से गठबंधन में खोट नजर आता हो, लेकिन राहुल गांधी तो पहले ही कह चुके हैं कि मुद्दों को समझने में उत्तर भारतीयों की समझ कम है। राहुल की नजर में दक्षिण भारतीय ज्यादा समझदार होते हैं। उन्होंने स्वयं भी इस बात का एहसास किया है।
आनंद शर्मा ने राहुल गांधी की सोच के अनुरूप ही अपना ऐतराज जताया है। दक्षिण भारत से जुड़े अधीर रंजन चौधरी ने मुद्दे को अच्छी तरह समझा इसलिए तो आईएसएफ जैसे संगठन से गठबंधन किया है। आनंद शर्मा ये मुद्दे को समझने की कमी है, इसलिए गठबंधन का विरोध कर रहे हैं। असल में मौजूदा समय में कांग्रेस का मुद्दा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को हराना है।
ममता बनर्जी तभी हारेंगी, जब मुस्लिम मतदाताओं पर प्रभाव रखने वाला फुरफुरा शरीफ विरोध में खड़ा होगा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की ताकत मुस्लिम मतदाता है। अब यदि फुरफुरा शरीफ के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी अपने अनुयायियों को गठबंधन को वोट देने के लिए कहेंगे तो ममता को नुकसान होगा ही। असल में अधीर रंजन चौधरी को पता है कि ममता के मुख्यमंत्री रहने से कांग्रेस को कभी भी फायदा होने वाला नहीं है।
ममता ने कांग्रेस से अलग होकर ही पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। ममता ने जब कांग्रेस में सोनिया गांधी का ही नेतृत्व स्वीकार नहीं किया तो फिर राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता। यह बात राहुल गांधी को भी पता है, इसलिए पश्चिम बंगाल में ममता की टीएमसी को हराने के लिए अधीर रंजन चौधरी को पूरी छूट दी गई है।























