Sunday, January 18, 2026
Advertisement
Home अपराध राजधानी में बेखौफ हैं दबंग

राजधानी में बेखौफ हैं दबंग

337
राजधानी में बेखौफ हैं दबंग
राजधानी में बेखौफ हैं दबंग

पुलिस ने पकड़ी एसयूवी, थाने से उठा ले गए दबंग,बार एसोसिएशन महामंत्री लिखकर किया जा रहा था दुरुपयोग।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एसयूवी पर बार एसोसिएशन महामंत्री लिखकर खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा था। शिकायत पर कैसरबाग पुलिस ने गाड़ी कब्जे में लेकर थाने में खड़ी कराते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद बेखौफ दबंग हंगामा करते हुए थाने से जबरन गाड़ी उठा ले गए। मामले में कॉन्स्टेबल की तहरीर पर गाड़ी लेकर जाने वालों के खिलाफ अमानत में खयानत व धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक हुसैनगंज निवासी अधिवक्ता गोविंद कन्नौजिया को बुधवार शाम कैसरबाग इलाके में नूर मंजिल अस्पताल के पास एक स्कार्पियो खड़ी मिली। जिसपर बार एसोसिएशन महामंत्री लिखा था। अधिवक्ता के मुताबिक गाड़ी पर महामंत्री लखनऊ बार एसोसिएशन लिखा था। इस पर उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि वह गाड़ी एसोसिएशन के किसी भी पदाधिकारी की नहीं है। इसके बाद गोविंद ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों व कैसरबाग थाने को सूचना दी।

राजधानी में बेखौफ हैं दबंग

यह भी पढ़ें-18,350 करोड़ का हुआ MOU

उन्होंने आरोप लगाया कि लोग एसोसिएशन के महामंत्री के नाम और पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। गोविंद की शिकायत पर कैसरबाग पुलिस मौके पर पहुंची और गाड़ी थाने उठवा लाई और मुकदमा दर्जकर पड़ताल में जुट गई। १०-१५ संख्या में कुछ लोग थाने पहुंच गए। इसमें कुछ लोगों ने खुद को वकील बताया और जब्त गाड़ी अपनी बताते हुए हंगामा करने लगे। थाने में तैनात कॉन्स्टेबल विपिन सिंह भदौरिया के मुताबिक हेड कॉन्स्टेबल अखिलेश इस वाहन को पकड़ कर लाए थे और गाड़ी को माल खाने के रजिस्टर में अंकित कर लिया था। रात में आए दबंगों ने पहले पुलिस को गुमराह किया, फिर पुलिस की अभिरक्षा से गाड़ी छीन ले गए। विपिन सिंह भदौरिया ने भी थाने में तहरीर देकर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है

पुलिस की कार्यशैली पर सवालकैसरबाग थाने में इंस्पेक्टर रामेंद्र त्रिपाठी, एसीपी योगेश कुमार का कार्यालय है। इसी परिसर में डीसीपी पश्चिम व एडीसीपी पश्चिम का ऑफिस है। इसके बाद भी परिसर से कुछ लोग चार पहिया वाहन हंगामा कर लेकर चले गए। इससे पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा होता है। इसकी जानकारी होने के बाद भी पुलिस के उच्चाधिकारी मामले को छिपाने में जुटे रहे।