Saturday, March 7, 2026
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ब्रजेश पाठक का छात्रनेता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर

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राजू यादव
राजू यादव

ब्रजेश पाठक का जीवन बड़ा सादा व उच्च विचार वाला है, वह शुद्ध शाकाहारी हैं उनमे कोई बुरी लत नहीं है। सुबह नियमित रूप से योग-प्राणायाम करते हैं, जिसके बाद दिनभर की व्यस्त जिंदगी शुरू हो जाती है। फरियादियों की समस्याएं हल कराने में वह सुख महसूस करते हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद मिलता है तो नई ऊर्जा भर जाती है।ब्रजेश पाठक भारतीय जनता पार्टी में अनमोल रत्न के रूप में उभरे हैं। इस उपलब्धि को कायम रखना उनकी भारी जिम्मेदारी है। उन्होंने यदि आम नेताओं की बदनाम लीक से हटकर काम किया तो जनता में वह बेजोड़ एवं अविस्मरणीय हो जाएंगे।विरले ही होते है जो कि अभियान रहित,संवेदनशील ह्रदय वाले,शरीफ लोगों की तरफ ध्यान देने वाले, स्वयं के लाभ की जगह जनहित की सोचने वाले, सरल, मिलनसार-मुझे भी ऐसे सभी गुण ब्रजेश पाठक जी में दिखे साथ ही एक अलग तरह की प्रज्ञा भी मौजूद है उनमें। ब्रजेश पाठक का छात्रनेता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर

25 जून 1964 को सुरेश पाठक के घर हरदोई जनपद में जन्मे ब्रजेश पाठक का सियासी सफर आसान नहीं रहा है। ब्रजेश नाम के व्यक्ति का व्यक्तित्व संघर्षशील, तेजस्वी, स्वाभिमानी, माता पिता और गुरु के भक्त होते हैं। ब्रजेश पाठक ने कानून की पढ़ाई की है, लेक‍िन उन्‍होंने अपने राजनीति जीवन की शुरुआत अपने छात्र जीवन से की है।1989 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे, इसके बाद 1990 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। ब्रजेश पाठक को उत्तर प्रदेश की राजनीत‍ि का बड़ा चेहरा माना जाता है। 2004 में लोकसभा सदस्‍य न‍िर्वाच‍ित हुए ब्रजेश पाठक 2017 में पहली बार व‍िधानसभा पहुंचे थे, इसके बाद योगी ने उनके कद को देखते हुए उन्‍हें अहम मंत्रालय की ज‍ि‍म्‍मेदार‍ियों से नवाजा था। अब 2022 के चुनाव में एक बार फ‍िर उन पर नजरें ट‍िका 2024 लोकसभा कि ओर देख रही है। ब्रजेश पाठक का छात्रनेता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर

ब्रजेश पाठक 2004 में कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए, ब्रजेश पाठक ने 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर उन्नाव सीट से भाग्य आजमाया तो राजनीति में पहली बड़ी कामयाबी मिली और चुनाव जीत गए। 2009 में बसपा मुखिया मायावती ने उन्हें राज्यसभा में जगह दिलाई और पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया। बसपा ने उन्हें सदन में अपना उपनेता बनाया था। ब्रजेश पाठक 2017 चुनाव से पहले भाजपा में शाम‍िल हुए और पहली बार व‍िधानसभा पहुंचे।2016 में भाजपा में शामिल हुए ब्रजेश पाठक।राजनीति में इतने लंबे करियर की वजह से ब्रजेश पाठक अबतक सियासत के मौसम को परखना सीख चुके थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से करीब 6 महीने पहले उन्होंने बीजेपी का कमल थाम लिया। 2017 में भाजपा से उन्हें लखनऊ सेंट्रल से चुनाव लड़ने का टिकट मिला और वे अखिलेश सरकार में तब के कैबिनेट मंत्री रहे रविदास मेहरोत्रा को 5 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंच गए। यूपी विधानसभा में यह उनकी पहली एंट्री थी और उन्हें मुख्यमंत्री योगी ने कैबिनेट मंत्री बनाया।अब ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें लखनऊ सेंट्रल विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, उन्होंने इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री रहे रविदास मेहरोत्रा को मात देकर पहली बार व‍िधानसभा पहुंचे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर योगी ने उन्हें कानून मंत्री बनाया।उत्तर प्रदेश की राजनीत‍ि में ब्रजेश पाठक नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा है। प्रदेश की स‍ियासत में बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक उत्तर प्रदेश में कद्दावर नेता के साथ ही योगी सरकार में कैब‍िनेट मंत्री भी रहे हैं, लेक‍िन उनका यह स‍ियासी सफर इतना आसान नहीं रहा है। इस स‍ियासी सफर में उन्‍हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। कभी बसपा का एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक ने छात्र नेता से कैब‍िनेट मंत्री तक सफर तय क‍िया है। भाजपा के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने जीवन का पहला व‍िधानसभा चुनाव कांग्रेस के ट‍िकट पर लड़ा था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार दो उपमुख्यमंत्री बनाए हैं।उनमें केशव प्रसाद मौर्य के अलावा पिछली सरकार में कानून मंत्री रहे ब्रजेश पाठक भी शामिल हैं।ब्रजेश पाठक उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं। इस बार लखनऊ कैंट विधानसभा से भारी जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे हैं।ब्रजेश पाठक की राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से हुई।ब्रजेश पाठक लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं और अब तक तीन पार्टियों से भी जुड़ चुके हैं।उत्तर प्रदेश की राजनीत‍ि में ब्रजेश पाठक नाम क‍िसी पहचान का मोहताज नहीं हैं।प्रदेश की स‍ियासत में बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक भाजपा में कद्दावर नेता के साथ ही सूबे के बड़े ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं।इसलिए ब्राह्मण-ठाकुर की सियासत के लिए चर्चित इस राज्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रजेश पाठक को अपना उपमुख्यमंत्री बनाकर इस जातीय समीकरण को बैलेंस करने की कोशिश की है।योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी ब्रजेश पाठक विधायी, न्याय एवं ग्रामीण अभियन्त्रण सेवा विभाग में कैबिनेट मंत्री थे।

हरदोई जिले के मल्लावां क्षेत्र के निवासी ब्रजेश पाठक को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ मंत्रिमंडल मेें उपमु्ख्यमंत्री बनाए जाने से पूरे जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई। सूचना मिलने के बाद से ही मल्लावां सहित पूरे जनपद में मिठाई बांटने व आतिशबाजी किए जाने का क्रम शुरू हो गया।ब्रजेश पाठक का ये स‍ियासी सफर इतना आसान नहीं रहा है। इस स‍ियासी सफर में ब्रजेश पाठक को कई उतार -चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। बसपा का कभी एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक ने छात्र नेता से कैब‍िनेट मंत्री तक सफर तय क‍िया है।ब्रजेश पाठक ने 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर उन्नाव सीट से भाग्य आजमाया तो राजनीति में पहली बड़ी कामयाबी मिली और चुनाव जीत गए। 2009 में बसपा मुखिया मायावती ने उन्हें राज्यसभा में जगह दिलाई और पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया।बसपा ने 2012 में इनकी पत्नी नम्रता पाठक को भी उन्नाव सदर सीट से टिकट दिया, लेकिन वो चुनाव हार ग‌ईं।मायावती के कार्यकाल में नम्रता पाठक यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। 2014 की मोदी लहर में ब्रजेश पाठक ने उन्नाव से हाथी की सवारी करनी चाही,लेकिन तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। ब्रजेश पाठक का छात्रनेता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर

राजनीति में इतने लंबे करियर की वजह से ब्रजेश पाठक अबतक सियासत के मौसम को परखना सीख चुके थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से करीब 6 महीने पहले उन्होंने भाजपा का कमल थाम लिया। 2017 में भाजपा से उन्हें लखनऊ सेंट्रल से चुनाव लड़ने का टिकट मिला और वे अखिलेश सरकार में तब के कैबिनेट मंत्री रहे रविदास मेहरोत्रा को 5 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंच गए। यूपी विधानसभा में यह उनकी पहली एंट्री थी और उन्हें मुख्यमंत्री योगी ने कैबिनेट मंत्री बनाया।अब ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए हैं।


ब्रजेश पाठक के लिए सुनहरा मौका है। कल्याण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी में अपनी लोकप्रियता का कीर्तिमान स्थापित किया था। उनके अवसान के बाद उस रिक्त स्थान की पूर्ति योगी आदित्यनाथ ने की लेकिन योगी आदित्यनाथ का कद इतना ऊंचा हो गया है कि वह अब भाजपा में राष्ट्रीय स्तर के नेता बन गए हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश भाजपा में अब कल्याण सिंह जैसी लोकप्रियता हासिल करने वाले जिस एक अन्य नेता का आविर्भाव हुआ है, वह ब्रजेश पाठक हैं। ब्रजेश पाठक को योगी मंत्रिमंडल का सर्वाधिक लोकप्रिय मंत्री मन जाता है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी जनता से निकटता ही है। जनता से इस निकट जुड़ाव का ही नतीजा है कि उनके यहां नित्यप्रति अपनी समस्याएं लेकर आनेवालों की संख्या सैकड़ों में होती है। चुनाव-परिणाम घोषित होते ही जो नजारा ब्रजेश पाठक के आवास पर देखने को मिला, वह उनकी अपार लोकप्रियता का ही ज्वलंत उदाहरण था। चुनाव-परिणाम आने के पहले उनके आवास पर भीतर से लेकर सड़क तक भारी जनसमूह एकत्र हो गया था और जैसे ही ब्रजेश पाठक के जीतने की खबर वहां पहुंची, ‘ब्रजेश पाठक जिंदाबाद’, ‘हमारा नेता कैसा हो, ब्रजेश पाठक जैसा हो’ नारों के साथ भाजपा तथा मोदी एवं योगी के जयकारों से आकाश गूंजने लगा। इतना भारी उत्साहमय वातावरण अन्य किसी मंत्री के यहां नहीं था। बृजेश पाठक को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उनके घर पर लगातार बधाई देने वाली जनता का तांता लगा रहा और लोगों में खुशी थी कि मेरा मंत्री अब उप मुख्यमंत्री बन गया है और इससे हमारे कार्य अब और तेजी से होंगे।ब्रजेश पाठक के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके आवास पर लगातार बधाई देने वालों का तांता लगा रहता है और वह उन्हें सहर्ष स्वीकार भी करते हैं यही नहीं उनकी पत्नी भी इसमें उनका सहयोग कर रही हैं। ब्रजेश पाठक के यहां आगंतुकों की भीड़ निरंतर बढ़ती जाती थी, जिसके साथ प्रशंसकों के नारे भी तेज हो रहे थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि ब्रजेश पाठक के यहां सारी सजावट व व्यवस्थाएं उनके प्रशंसकों द्वारा ही की गईं।

कोरोना काल में ब्रजेश पाठक ने जिस तरह स्वास्थ्य को लेकर अपनी सजगता दिखाई, योगी पार्ट 2 कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें उसी विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंप दी है।ब्रजेश पाठक ने कोविड महामारी के दौरान लखनऊ में महामारी से प्रभावित लोगों की मदद में अलग पहचान बनाई। उन्हें चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा जैसा महकमा एक साथ देकर उनके पद के साथ कद को भी तवज्जो दी गई है।ब्रजेश पाठक संघ या भाजपा के बैकग्राउंड के नेता नहीं हैं। ऐसे में तमाम खांटी भाजपाई नेताओं को पीछे छोड़कर उनका उप मुख्यमंत्री बनना चर्चा का विषय बन गया है। ब्रजेश पाठक को लेकर कहा जाता है कि वह हवा के रुख को अच्छी तरह से भांपने वाले नेता हैं। ब्रजेश पाठक ऐसे नेता हैं जो महज 6 साल ही बीते हैं और वह प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बन गए हैं। ब्रजेश पाठक ऐसे पहले नेता हैं, जो भाजपा के बैकग्राउंड से नहीं आते हैं और इतना बड़ा पद हासिल किया है।ब्रजेश पाठक की सबसे अहम बात यह है कि वह हमेशा एक अच्छे मौसम वैज्ञानिक रहे हैं।ब्रजेश पाठक हवा के रुख को अच्छी तरह से भांपने वाले नेता हैं। ब्रजेश पाठक का छात्रनेता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर