1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, “ये दिल मांगे मोर” का नारा देने वाले कैप्टन बत्रा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पॉइंट 4875 पर कब्जा किया और वीरगति प्राप्त की। उन्हें ‘शेरशाह’ के नाम से भी जाना जाता है।
2. मेजर सोमनाथ शर्मा (प्रथम परमवीर चक्र, मरणोपरांत)
भारतीय सेना के पहले परमवीर चक्र विजेता। 1947 के भारत-पाक युद्ध के दौरान श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा करते हुए उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक पाकिस्तानी आक्रमणकारियों का मुकाबला किया।
3. कर्नल संतोष बाबू (महावीर चक्र, मरणोपरांत)
2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के दौरान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने बहादुरी से नेतृत्व किया और देश के लिए शहीद हो गए।
1971 के युद्ध में मात्र 21 साल की उम्र में उन्होंने बसंतर की लड़ाई में 10 दुश्मन टैंकों को नष्ट कर दिया। घायल होने के बावजूद उन्होंने अपना टैंक छोड़ने से मना कर दिया और अंतिम समय तक लड़ते रहे।
5. मेजर संदीप उन्नीकृष्णन (अशोक चक्र, मरणोपरांत)
26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान एनएसजी कमांडो के रूप में उन्होंने “ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा” कहते हुए अपने साथियों की जान बचाई और आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए।
6. कैप्टन सौरभ कालिया (वीरगति, 1999)
कारगिल युद्ध के शुरुआती दिनों में गश्त के दौरान उन्हें और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था। उन्होंने अकल्पनीय यातनाएं सहने के बावजूद कोई भी सैन्य जानकारी दुश्मन को नहीं दी।
7. राइफलमैन जसवंत सिंह रावत (महावीर चक्र, मरणोपरांत)
1962 के भारत-चीन युद्ध में उन्होंने अकेले ही 72 घंटों तक चीनी सेना को रोके रखा और लगभग 300 चीनी सैनिकों को मार गिराया। अरुणाचल प्रदेश में आज भी उनका मंदिर बना हुआ है और उन्हें एक ‘अमर’ सैनिक माना जाता है।
1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में दुश्मन के बंकरों को नष्ट करते हुए उन्होंने असाधारण वीरता दिखाई और गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी अपने मिशन को पूरा कर वीरगति प्राप्त की।
9. मेजर सुधीर कुमार वालिया (अशोक चक्र, मरणोपरांत)
अगस्त 1999 में कुपवाड़ा में आतंकवादियों के एक ठिकाने पर हमला करते हुए उन्होंने 4 आतंकियों को मार गिराया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे अपने जवानों का तब तक मार्गदर्शन करते रहे जब तक ऑपरेशन सफल नहीं हो गया।
10. लांस नायक दिनेश कुमार (मरणोपरांत, 2025)
मई 2025 में पाकिस्तान द्वारा की गई भारी गोलाबारी के दौरान नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात लांस नायक दिनेश कुमार ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना बलिदान दिया।