

कारागार विभाग के एआईजी प्रशासन का अजब गजब खेल। मोटी रकम लेकर एआईजी जेल प्रशासन लगा रहे अधिकारियों की विशेष ड्यूटी। ढाई माह में लगाई दर्जनों अधिकारियों और कर्मियों की जेल पर ड्यूटी। तीन माह के लिए लगाई ड्यूटी आठ माह बाद भी नहीं हुई वापसी..! कारागार विभाग में प्रशासन का अजब गजब खेल
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में अधिकारियों और कर्मियों की विशेष ड्यूटी आला अफसरों की वसूली का जरिया बन गई है। अपर महानिरीक्षक कारागार (एआईजी) प्रशासन मोटी रकम लेकर अधिकारियों की मनमाने तरीके से विशेष ड्यूटी लगाकर जेब भरने में जुटे हुए है। दिलचस्प बात यह है कि तीन माह के लिए लगाई गई विशेष ड्यूटी के आठ माह बाद भी अधिकारियों की वापसी नहीं की गई। इसको लेकर अधिकारियों और कर्मियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। मामला अनुशासन से जुड़ा होने की वजह से वसूली के इस गंभीर मामले पर चुप्पी साध रखी है। उधर विभाग के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।
कारागार मुख्यालय के अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने स्थानांतरण सत्र के दौरान जमकर बेतरतीब तरीके से अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के तबादले किए। इसमें अधिकारियों से मोटी रकम लेकर उन्हें कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया गया। यही नहीं वसूली के चक्कर में एक एक जेलर का तीन तीन बार तबादला आदेश बदल दिया गया। आजमगढ़ जेल पर तैनात विकास कटियार, झांसी जेल पर तैनात कस्तूरी लाल गुप्ता, प्रदीप कश्यप, इसका जीता जागता उदाहरण है। मुख्यालय में विशेष ड्यूटी लगाकर वसूली करने का सिलसिला अभी भी बदस्तूर जारी है। सूत्रों का कहना है एआईजी प्रशासन विशेष ड्यूटी सिर्फ उन्हीं अधिकारियों की वापसी करते हैं जिनका समय पर लिफाफा नहीं पहुंचता है। इस कड़ी में जेलर प्रिय कुमार मिश्रा की महोबा जेल से प्रतापगढ़ विशेष ड्यूटी लगाई गई उन्हें फिर महोबा वापस कर दिया गया। इसी प्रकार राजेश कुमार की उन्नाव से महोबा ड्यूटी लगाई गई फिर उन्हें उन्नाव वापस कर दिया गया।
केंद्रीय कारागार नैनी में विशेष ड्यूटी पर लगाए गए प्रदीप कश्यप की पहले आजमगढ़ जेल पर विशेष ड्यूटी लगाई गई। फिर उन्हें वापस कर कानपुर नगर जेल के जेलर अनिल पांडे को आजमगढ़ जेल भेज दिया गया। अजय राय की जौनपुर जेल से केंद्रीय कारागार नैनी और फिर उन्हें नैनी से जौनपुर जेल वापस कर दिया गया। प्रयागराज जेल में भारी मात्रा में नगद धनराशि मिलने पर जेलर के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उनकी इटावा सेंट्रल जेल पर विशेष ड्यूटी लगा दी गई कुछ समय बाद ही उन्हें पुनः प्रयागराज जेल पर वापस कर दिया गया। इसी प्रकार एटा से झांसी, झांसी से केंद्रीय कारागार नैनी और नैनी से आजमगढ़ और आजमगढ़ से फिर केंद्रीय कारागार नैनी वापसी कर दी है। जबकि विकास कटियार की पहले बागपत और उसके बाद फिरोजाबाद जेल पर विशेष ड्यूटी लगा दी गई।
झांसी जेल पर तैनात कस्तूरी लाल गुप्ता का पहले फतेहगढ़ जिला जेल फिर सुल्तानपुर जेल और उसके बाद बागपत जेल भेज दिया गया। इन अधिकारियों को तीन माह के लिए विशेष ड्यूटी पर लगाया गया था लेकिन आठ माह बीतने के बाद भी आज तक इन्हें वापस नहीं किया गया है।यह तो बानगी है इसी प्रकार दर्जनों अधिकारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई लेकिन समयावधि पूरी होने के बाद भी आज तक उन्हें वापस नहीं किया गया है। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई। कारागार विभाग में प्रशासन का अजब गजब खेल
























