
कारागार मंत्री ने जेल अधिकारियों की ली जमकर क्लास।सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा। जेलों में लगे सीसीटीवी और कैमरों की लगातार होनी चाहिए निगरानी। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई विभाग की समीक्षा बैठक।
राकेश यादव
लखनऊ। प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने को प्रदेशभर के जेल अधिकारियों की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाए। हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। यह बात शुक्रवार को प्रदेश कारागार मुख्यालय के सभागार में जेल अधीक्षकों के साथ आयोजित की गई समीक्षा बैठक में कही।
कन्नौज जेल से दो बंदियों की फरारी की घटना से आक्रोशित कारागार मंत्री ने कहा कि जेलों में लगे सीसीटीवी और कैमरों की 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही संवेदनशील बंदियों की लाइव सीसीटीवी के माध्यम से सतत निगरानी, पीसीओ संचालन व्यवस्था, नवीन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, विभागीय कार्यवाहियों, जेल वार्डर, हेड जेल वार्डर एवं डिप्टी जेलर के नियमित ड्यूटी परिवर्तन, आकस्मिक तलाशी तथा रात्रिकालीन गश्त को और अधिक सुदृढ़ किए जाने पर विशेष बल दिया। इसमें लापरवाही बरतने वाले अफसरों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा।

उन्होंने मुख्यालय स्थित एआई सक्षम वीडियो वॉल ‘जार्विस’ के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा इसकी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि कारागार विभाग का मूल उद्देश्य बंदियों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। ‘एक जेल–एक उत्पाद’ योजना के संदर्भ में कारागार मंत्री ने निर्देश दिए कि कारागारों में निर्मित उत्पादों को विभिन्न आयोजनों एवं सार्वजनिक मंचों के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया जाए, जिससे जन-जागरूकता बढ़े और बंदियों के पुनर्वास को प्रोत्साहन मिल सके। समीक्षा बैठक में महानिदेशक कारागार पी.सी. मीना, डीआईजी सुभाष चंद्र शाक्य, कुंतल किशोर, शैलेन्द्र मैत्रेय, पी.एन. पांडेय, रामधनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और प्रदेश भर के वरिष्ठ जेल अधीक्षक और अधीक्षक उपस्थित रहे।
बैठक से नदारत दिखे प्रमुख सचिव कारागार
कारागार मुख्यालय में विभाग की समीक्षा बैठक में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि इस बैठक में कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही और प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग बैठक से नदारत दिखाई पड़े। सूत्रों की माने तो विभाग की पूर्व में हुई समीक्षा बैठक में भी यह मामला प्रकाश में आया था। इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है।

























