Wednesday, February 25, 2026
Advertisement
Home राष्ट्रीय आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला

आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला

80
आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला
आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला
मधुकर त्रिवेदी

कवि दुश्यंत का मशहूर शेर है-‘तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं‘। इतिहास के कितने ही पृष्ठ उन तानाशाहो के जीवन से भरे पड़े हैं जो बाद में विस्मृति की कब्रों में दफन हो गए। पड़ोसी पाकिस्तान में जनाब आसिम मुनीर ने सर्वाधिक सैन्य शक्तियां हथियाँ ली है। पाकिस्तान का उनसे कोई भला होने वाला नहीं, पर वे भारत विरोध की आग में खुद झुलसने का कोई मौका छोड़ने वाले नहीं है। पहले जरा पाकिस्तान के सैनिक तानाशाहों के बारे में जान लें। उनसे पाकिस्तान में न तो स्थिरता आई नहीं वहां खुशहाली आ सकी। अयूब खान, जिया उल हक और मुसर्रफ के सैनिक राज में पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक कठिनाई, कूटनीतिक विफलता यही सब होता रहा। अब भी अराजकता का दौर है। पाकिस्तानी सेना इस दौर में राजनीति के साथ व्यापार में व्यस्त रही। लोकतंत्री संस्थाएं कमजोर होती गई। आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला


जनाब आसिम मुनीर ने अब तक पाकिस्तान में सिर्फ अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं और ताकत बटोरने  का ही काम किया है। पाकिस्तान आर्थिक रूप से कंगाल है। कर्ज के सहारे वहाँ के शासन-प्रशासन का खर्च चल रहा है। पाकिस्तान के अंदरूनी हालात इतने खराब हो गए है कि बड़ी तादाद में पाकिस्तानी दूसरे देशों में जाकर भीख मांगने के धंधे में लग गए हैं। मुस्लिम देष इनसे परेशान है। पाकिस्तान में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सब केवल नाम के हैं, उनके पास कोई अधिकार नहीं रह गए है। पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन के तहत नवंबर 2025 में संसद के दोनों सदनों में फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर को सभी सेनाओं का प्रमुख जीवन भर के लिए बना दिया गया है। पहले कहा जाता था कि पाकिस्तान में निर्वाचित सरकार भी सेना की छाया में काम करती थी परन्तु अब तो सब कुछ सिर्फ मुनीर में ही केंद्रित हो गया है। वे चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) हो गए हैं। उनका कार्यकाल 2030 तक होगा। उनको हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत संसद में चाहिए। उनपर उनके जीवन काल में कोई मुकदमा नही चलेगा। एटमी हथियारों का बटन भी अब मुनीर की पहुंच में होगा। वह बिना प्रधानमंत्री या मंत्रिमंडल की सलाह के स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगे। एक तरह से बंदर के हाथ में उस्तुरा दे दिया गया है।


पाकिस्तान में सर्वोच्च न्यायालय की षक्तियां छिन गई है। सैनिक नेतृत्व को अब उसकी परिधि से बाहर कर दिया गया है। कहते हैं कि मुनीर की महत्वाकांक्षा को संरक्षित करते हुए राष्ट्रपति जरदारी ने अपने लिए इम्यूनिटी मांग ली और प्रधानमंत्री शहबाज षरीफ को सिर्फ अपनी सरकार चलते रहने का जीवनदान चाहिए। आतंकवादी संगठनों को फिर मजबूत बनाने का काम भी चल रहा है। वर्ष 2026 में मुनीर की हरकतो पर निगाह रखना बहुत जरूरी हो गया है। उसने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के समक्ष आत्म समर्पण कर रखा है। सऊदी अरब और तुर्किए से उसे समर्थन मिल रहा है। वह मुस्लिम एटम बम और मुस्लिम सेना बनाने में लगा है।


बदलते राजनीतिक परिवेश में नववर्ष भारत के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण साबित होगा। पाकिस्तान का इतिहास है अपना हर एक युद्ध हारने के बावजूद उवह भारत विरोध में फिर नापाक हरकत करने से बाज नहीं आता है। मुनीर तो आपरेषन सिंदूर में अपनी जीत का डंका बजाते हुए सर्वेसर्वा बन गया है। उसके जैसे व्यक्ति के हाथों में सत्ता का केन्द्रीयकरण उसको गैरजिम्मेदार  बनाकर कुछ भी अनर्थ करा सकता है। स्मरणीय है पाकिस्तानी सेना तहरीक-ए-तालिबान से बराबर पिट रही है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पाक विरोध की हवा बह रही है। वहां के लोग बहुत आक्रोषित है। पाक अधिकृत कष्मीर में भी अषांति है। मुनीर से हालात संभल नहीं रहे हैं। झूठी षेखी में वह आत्मघाती कदम उठा सकता है। पाकिस्तान के अंदरूनी हालात जैसे-जैसे बिगडते जा रहे हैं दंभी-पाक सेना प्रमुख अपने बचाव में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। अथवा सैनिक छेड़छाड़ से स्थगित आपरेषन सिंदूर 0, 2 को पुनः सक्रिय करने को भारत को मजबूर कर सकता है। आसिफ मुनीर आदत से बाज नहीं आने वाला