Thursday, January 29, 2026
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शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है सत्य

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शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है सत्य
शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है सत्य

शिवानंद मिश्रा

सत्य शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है। हरियाणा में कांग्रेस का शोर था लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ अलग थी। मोदी और शाह को लोग गालियां बक रहे थे। कुछ लोगों ने तो भाजपा की श्रद्धांजलि लिखना भी शुरु कर दी थी। कांग्रेस अपने शपथग्रहण की तारीखें निकलवा रही थी। मीडिया  में यह चर्चा थी कि भाजपा में मोदी के दिन भर गये है। अजीत भारती जैसे यूट्यूबर (उन्हें  पत्रकार नहीं मानता) मोदी और शाह को बैठे बैठे सलाह दे रहे थे। सब तरफ शोर था-भाजपा हार रही है लेकिन कोई था जो शान्ति से यह शोरगुल में न पडते हुए अपना काम कर रहा था।  शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है सत्य

शोरगुल में सत्य सुनाई नहीं देता है। सत्य को जानने के लिए शान्ति चाहिए। शान्त मन से ही सत्य का बोध होता है। मोदी जी के विरोधियों ने कितने बकवास किए – मोदीजी शान्त रहे। बस अपना काम करते रहे और वही काम उनको जीता गया। यह सबक है – जहां शोर होता है, वहां आवश्यक नहीं कि सत्य ही हो। जो शान्त रहता है, वह आवश्यक नहीं कि कमजोर ही हो।  लेकिन कुछ को शोर पसन्द है। कुछ लोग उपासना जैसी पवित्र वस्तु में भी शोर करने लगे है। उपासना शांति से होती है लेकिन वहां पर भी शोर हो रहा है।

भाजपा २०२४ चुनाव जीत रही थी लेकिन फिर मार्च में पासा बदलता है। उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र – यह दो राज्यो में घर के भेदी ही पार्टी को डुबाने  के लिए लगे है। जमीन से जुडे मोदी शाह को अंदाजा आ जाता है। इसीलिए नायडू और नीतिश से गठबंधन कर के खेल बचा लिया जाता है।  सर्वत्र शोर था कि भाजपा ने गठबन्धन क्यों किया. बस जो शान्त था वह समझता था कि गठबंधन क्यों किया गया! 2022 में यूपी चुनाव भाजपा हार रही थी। सर्वत्र शोर था कि बाबा की सरकार ३०० पार जायेगी और सपा का नामोनिशान नहीं रहेगा। कुछ लोग थे जो इस शोर से दूर शान्त रहते है, खिसकती हुई जमीन देखते है, बहनजी के साथ समझौता करते है और वोट ट्रांसफर करवाकर सरकार बचा लेते है लेकिन उनके काम शोर में कोई नहीं देखता।

भाजपा छत्तीसगढ हार रही थी. सर्वत्र कांग्रेस का शोर था। फिर से शान्त मन से किसी ने काम किया और सरकार बचा ली। यही बात उत्तराखण्ड में हुई। इस लिए शोर को मत सुनो। मन शान्त रखो। धरा पर कान रखो और उसकी आहट सुनो। सोशल मीडिया से वोट नहीं मिलते है। शोरगुल मचाने वाले कब गायब हो जाते है पता भी नहीं चलता। राजनीति में बहुत बाते होती है।  सब से आवश्यक है समझौता कि धैर्य रखा जाये। पोपकोर्न की तरह उछलकूद करनेवाले केवल अपने पांव तुडवाते है। अब भविष्य क्या है? महाराष्ट्र बचाना है। यह होने के बाद यूपी में नया चेहरा लाना है। शोर मचानेवाले काम नहीं करते है – यह सत्य है। शोर को मत सुनो, सत्य को सुनो। शोर शराबे से दूर रहकर ही सुना जाता है सत्य